बलवाई पुलिस की आंखों के सामने। वह भी सड़क पर नहीं, थाने के अंदर। सिपाही और दरोगा ही नहीं, इंस्पेक्टर भी मौजूद लेकिन सब के सब तमाशबीन हैं। सीन ताजगंज थाना का रविवार दोपहर 12 बजे का है। बलवाई नारे लगा रहे हैं। पुलिस चुपचाप सुन रही है। इसके बाद वे लोग चले गए। पुलिस ने पकड़ने की कोशिश तक नहीं की।
ये बलवाई सुल्तानपुरा और ईदगाह के बवाल में शामिल बताए गए हैं। पुलिस ने इन्हें नामजद कर रखा है। अफसर दावा कर रहे हैं इनकी तलाश में पुलिस के दबिश देने का लेकिन दावे का दम इस तरह सामने आया। शहर में एक के बाद एक हो रहे बवाल के पीछे पुलिस का ऐसा ढीला रवैया भी कहीं न कहीं जिम्मेदार है। हर बार की यही कहानी हो गई है। ईदगाह में बवाल हुआ। पुलिस ने अगले दिन दो केस दर्ज किए। इसमें आज तक एक भी गिरफ्तारी नहीं हो पाई है। इसके बाद सुल्तानगंज में सांप्रदायिक टकराव हुआ। कई लोग हिरासत में लिए गए लेकिन थाना सदर से ही छोड़ दिए गए। बाद में दो केस दर्ज किए। आरोपी बना दिए 100 से ज्यादा लेकिन गिरफ्तारी एक की भी नहीं की गई। इनमें से 15 आरोपी दोनों घटनाओं में शामिल बताए गए। ये ही लोग थाना ताजगंज में पहुंचे थे। लेकिन यहां भी कोई गिरफ्तारी नहीं की गई। ताजगंज के बवाल में मौके से कल्लू नाम का शख्स हिरासत में लिया गया। इसके अलावा किसी और को देर रात तक नहीं पकड़ा जा सका।
माहौल की नब्ज से हटा एलआईयू का हाथ
आगरा।
चुनाव के दौरान पुलिस के साथ एलआईयू भी सक्रिय रही। यह भी एक वजह रही कि शहर के संवेदनशील इलाकों की गतिविधियों के बारे में समय से सूचना अफसरों तक पहुंचती रही। नतीजा यह रहा कि चुनाव में कोई खुराफात नहीं हुई। जहां थोड़ा सा हंगामा भी हुआ वहां कार्रवाई की गई। लेकिन वोट पड़ने के बाद पुलिस के साथ खुफिया पुलिस भी कमजोर पड़ गई। कई जगह माहौल बिगाड़ने की कोशिश हो चुकी है लेकिन एलआईयू को कहीं भी समय से सूचना नहीं मिली। पुलिस सूत्रों ने बताया कि शहर के संवेदनशील इलाकों के बारे में चुनाव के बाद कोई रिपोर्ट भी नहीं दी गई है। तीन जगह बवाल हो चुके हैं। अभी भी खुफिया पुलिस की सक्रियता पहले जैसी नजर नहीं आ रही है। फातिमा केस में भी एलआईयू की चूक सामने आ चुकी है। वह बांग्लादेश की रहने वाली है। इसके बावजूद उसका पासपोर्ट जारी किया गया। एत्माद्दौला क्षेत्र में कई सालों से जाली करेंसी का काला कारोबार चल रहा था। खुफिया पुलिस को इसकी भी भनक नहीं लग पाई।