संभल। सड़क हादसे में घायल हुए एक निजी कंपनी के कर्मचारी को संभल के जिला अस्पताल में मंगलवार को बेहतर उपचार न मिल सका। उसकी मौत हो गई। परिजनों ने चिकित्सक व चिकित्सा कर्मियों पर लापरवाही का आरोप लगाया है। सड़क हादसा मुरादाबाद-संभल के बीच सिरसी में हुआ।
मुरादाबाद में बुद्धि बिहार की एकता बिहार कालोनी का निवासी करन (26) मोबाइल टावर कंपनी में तकनीकी कर्मचारी था। वह संभल में अपने मोबाइल टावर की किसी साइट पर काम देखने के लिए मुरादाबाद से बाइक पर सवार होकर निकला था। मुरादाबाद-संभल मार्ग पर सिरसी पेट्रोल पंप के करीब अचानक किसी अज्ञात वाहन ने टक्कर मार दी। करन गंभीर रूप से घायल हो गया। आनन-फानन में राहगीरों ने पुलिस को फोन किया। कुछ ही देर में 100 डायल पहुंच गई। सिपाहियों ने उसे सड़क से उठाया और अपनी गाड़ी से तत्काल जिला अस्पताल लाए। जिला अस्पताल के आपातकालीन चिकित्साकक्ष में डा. चमन प्रकाश मौजूद थे। चिकित्साकर्मी भी मुस्तैद थे लेकिन जब डाक्टर चमन प्रकाश ने घायल करन की स्थिति देखी तो वह बोल पड़े कि सिरसी से यहां क्यों ले आए? मुरादाबाद ले जाते तो बेहतर इलाज होता। पुलिसकर्मियों ने अपनी मजबूरी बताई। वे बोले हम तो अपने ही जिले में ला सकते हैं। पुलिसकर्मी और चिकित्सक के बीच हल्की कहासुनी का माहौल बना और कुछ ही देर में घायल करन का उपचार शुरू हो गया। करन की रीढ़ की हड्डी में और सिर में चोट थी। उसे तत्काल हायर सेंटर में ले जाने की जरूरत थी पर जिला अस्पताल में सिर्फ मरहम पट्टी की गई। क्योंकि यहां पर न तो सर्जन हैं और न ही ब्लड बैंक आदि की कोई सुविधा है। इसीलिए रेफर स्लिप थमा कर चिकित्सक और चिकित्साकर्मियों ने अपना हाथ झाड़ लिया। घायल तड़प रहा था। उस समय तक परिजन नहीं थे। पुलिस की परिजन की भूमिका में थे। करन की हालात देखकर हर कोई परेशान था। आसपास के लोग एकत्र हो गए। इस बीच पुलिस वाले एंबुलेंस तलाशने में लग गए। कुछ देर तक जब कोई सरकारी एंबुलेंस नहीं मिली तो निजी एंबुलेंस का इंतजाम किया गया है। एक स्थानीय अस्पताल में ले जाया गया। जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। उसके बाद मुरादाबाद से परिजन पहुंचे और परिजनों के संग उस निजी कंपनी के कर्मचारी भी आए जिसमें करन काम करता था।
भाई को जन्म दिन का तोहफा न दे सका करन
संभल। करन अपने भाइयों में सबसे बड़ा था। चार भाई और दो बहनों के परिवार में करन से छोटे शुभम का मंगलवार को जन्म दिन था। करन सुबह अपने अधिकारी के पास यह कहते हुए पहुंचा था कि उसे बाइक चाहिए। वह सुबह जल्दी जाकर जल्दी लौटना चाहता है ताकि अपने भाई के जन्म दिन पर उसे बधाई दे सके। करन मुरादाबाद से उत्साहित होकर निकला था। निजी कंपनी में अधिकारी सचिन ने बताया कि वह मेरी एवेंजर बाइक लेकर आया था पर रास्ते में हादसा हो गया।
हमने जान बचाने के लिए हर संभव प्रयास किया - चिकित्साधिकारी
संभल। आपातकालीन चिकित्सा कक्ष में मौजूद चिकित्साधिकारी डा. चमन प्रकाश ने बताया कि जब करन को लाया गया तो उसकी हालत गंभीर थी। कूल्हे में फ्रैक्चर थे और अंदरूनी रक्तस्राव हो रहा था। हमने तत्काल जीवन रक्षक दवाएं देकर उसे रेफर किया था। यह बात सही है कि मैंने पुलिसकर्मियों से कहा था कि अगर सिरसी के बजाए घायल को मुरादाबाद ले गए होते तो तत्काल बेहतर इलाज संभल हो जाता।
पुलिस को रेफर स्लिप थमा कर चले गए थे चिकित्सक
अस्पताल में भीड़ लगी थी और मैं बाहर से गुजर रहा था। अचानक भीड़ और पुलिस को देखकर मैं अंदर गया। मैंने देखा कि घायल तड़प रहा था। डाक्टर कह रहे थे कि डायल 100 घायल को लेकर आई है तो क्या पुलिस की जिम्मेदारी खत्म हो गई लेकिन मैंने कहा कि घायल को लाने के बाद इलाज की जिम्मेदारी तो अस्पताल की है। इस बीच मैंने देखा कि डाक्टर एंबुुलेंस के लिए संपर्क कर रहे थे फिर भी कोई एंबुलेंस नहीं पहुंची। हालात देखकर मैंने कहा कि जो भी रुपये एंबुलेंस वाला लेगा वह मैं दे दूंगा लेकिन जल्द ही मंगाओ। लेकिन एंबुुलेंस पहुंचने और घायल का इलाज होने में देर होती गई। इस दौरान घायल ने दम तोड़ दिया। मौके से डाक्टर साहब, दीवान जी को रेफर के कागज देकर चले गए। कुछ देर के लिए अस्पताल के कर्मचारी भी नजर न आए।
- सपन कुमार, राहगीर एवं प्रत्यक्षदर्शी।