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सचिन-युवराज और गंभीर-जहीर को टीम से निकाला गया था?: पूर्व चयनकर्ता ने मामले पर खुलकर दिया बयान; जानें क्या कहा

Mon, 12 Oct 2026 04:00 PM IST
स्वप्निल शशांक स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, मुंबई

सार

पूर्व मुख्य चयनकर्ता संदीप पाटिल ने कहा कि सचिन तेंदुलकर, युवराज सिंह, गौतम गंभीर और जहीर खान को टीम छोड़ने या संन्यास लेने के कारण पता हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि पांच सदस्यीय चयन समिति ने भारतीय क्रिकेट के भविष्य को ध्यान में रखकर फैसले लिए थे। पाटिल के मुताबिक, चयनकर्ताओं को व्यक्तिगत रिश्तों से ऊपर टीम का हित रखना चाहिए।
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सचिन, युवराज, जहीर और गंभीर - फोटो : Twitter
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विस्तार
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भारतीय क्रिकेट के दिग्गज खिलाड़ियों सचिन तेंदुलकर, युवराज सिंह, गौतम गंभीर और जहीर खान को टीम से बाहर करने या उनके संन्यास के पीछे क्या वजह थी? भारत की 1983 विश्व कप विजेता टीम के सदस्य और पूर्व मुख्य चयनकर्ता संदीप पाटिल ने इस मुद्दे पर अपनी बात रखी है। उन्होंने कहा कि इन दिग्गज खिलाड़ियों को खुद पता है कि उन्हें टीम छोड़नी क्यों पड़ी। पाटिल के मुताबिक, चयनकर्ताओं के लिए व्यक्तिगत रिश्तों से ऊपर भारतीय क्रिकेट के भविष्य को रखना जरूरी था।

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पांच सदस्यीय चयन समिति ने लिए थे फैसले
संदीप पाटिल ने 2012 से 2016 तक भारतीय पुरुष क्रिकेट टीम की वरिष्ठ चयन समिति के अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाली थी। उनका कार्यकाल 2011 वनडे विश्व कप में भारत की जीत के बाद टीम में बदलाव के दौर के साथ जुड़ा रहा। इस दौरान अलग-अलग प्रारूपों में कई अनुभवी खिलाड़ियों की जगह युवा प्रतिभाओं को मौका दिया गया।

दूरदर्शन के कार्यक्रम 'द ग्रेट इंडियन क्रिकेट शो' में बातचीत के दौरान पाटिल ने स्पष्ट किया कि खिलाड़ियों को टीम से बाहर करने के फैसले केवल उन्होंने अकेले नहीं लिए थे। पांच सदस्यीय चयन समिति मिलकर निर्णय लेती थी। उन्होंने कहा, 'सबसे पहले, मैं यह स्पष्ट करना चाहता हूं कि ये फैसले सिर्फ मैं नहीं ले रहा था। पांच सदस्यों की चयन समिति थी और मैं उसका अध्यक्ष था।'

पाटिल ने आगे कहा, 'हमने जो भी फैसले लिए, वे भारतीय क्रिकेट के भविष्य को ध्यान में रखकर लिए थे। आज इस बारे में बात करना बहुत बुरा लगता है, लेकिन सचिन तेंदुलकर, गौतम गंभीर, युवराज सिंह और जहीर खान जैसे महान खिलाड़ियों को टीम छोड़नी पड़ी या संन्यास लेना पड़ा, उन्हें इसकी वजह पता है।' उन्होंने कहा कि चयनकर्ताओं की जिम्मेदारी देश, भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) और भारतीय क्रिकेट के हितों को प्राथमिकता देना था।

संदीप पाटिल - फोटो : IANS
खिलाड़ियों से दोस्ती अपनी जगह, चयन की जिम्मेदारी अपनी जगह
पाटिल ने चयनकर्ता के तौर पर काम करने के दौरान पेशेवर सीमाएं बनाए रखने की जरूरत पर भी जोर दिया। उनके अनुसार, खिलाड़ियों के साथ अच्छे संबंध होने का मतलब यह नहीं कि चयन में व्यक्तिगत पसंद को जगह दी जाए। चयनकर्ताओं को टीम के दीर्घकालिक हितों को ध्यान में रखकर फैसले करने होते हैं।

उन्होंने कहा, 'आप खिलाड़ियों के दोस्त हो सकते हैं, लेकिन एक सीमा होनी चाहिए। आप यह नहीं कह सकते कि वह मेरा दोस्त है, इसलिए मैं उसे टीम में चुनूंगा। जब आपको यह जिम्मेदारी दी जाती है, तो आपको इसे गंभीरता से लेना होता है।' पाटिल ने आगे कहा, 'आप अपने क्रिकेट के बारे में नहीं सोच रहे होते, बल्कि भारत के क्रिकेट और उसके भविष्य के बारे में सोच रहे होते हैं। कभी-कभी आपको ऐसे फैसले लेने पड़ते हैं जिनसे आप खुद खुश नहीं होते, लेकिन आप उन्हें भारतीय टीम की भलाई के लिए लेते हैं।'
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2011 विश्व कप के बाद बदलाव का दौर
पाटिल की चयन समिति के कार्यकाल में भारतीय क्रिकेट बदलाव के दौर से गुजर रहा था। 2011 में वनडे विश्व कप जीतने के बाद टीम में कई अनुभवी खिलाड़ियों के भविष्य और युवा खिलाड़ियों को अवसर देने को लेकर फैसले किए गए। सचिन तेंदुलकर, युवराज सिंह, गौतम गंभीर और जहीर खान भारतीय क्रिकेट के बड़े नाम रहे हैं। पाटिल, जो राष्ट्रीय क्रिकेट अकादमी (एनसीए) के प्रमुख भी रह चुके हैं, फिलहाल मुंबई की वरिष्ठ और आयु-वर्ग की पुरुष टीमों के मेंटर हैं। उनका कहना है कि चयनकर्ता की भूमिका निभाते समय व्यक्तिगत रिश्तों से ऊपर टीम और देश के हित को रखना जरूरी होता है।
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