टी20 विश्वकप से पहले भारत-पाकिस्तान मैच को लेकर शुरू हुआ हाईवोल्टेज ड्रामा आखिरकार सोमवार को समाप्त हो गया। पाकिस्तानी सरकार ने पीसीबी और पाकिस्तान टीम से भारत के खिलाफ 15 फरवरी को होने वाले मैच में खेलने की मंजूरी दे दी है। इससे पहले एक फरवरी को पाकिस्तानी सरकार ने बांग्लादेश के समर्थन में ड्रामा करते हुए भारत के खिलाफ मैच का बहिष्कारण करने का एलान किया था। नौ दिन के ड्रामे के बाद और आईसीसी के चाबुक के बाद पाकिस्तान को घुटने टेकने पड़े।
जब पाकिस्तान का यह ड्रामा शुरू हुआ था, तो कुछ क्रिकेट पंडितों ने पाकिस्तान और बांग्लादेश को अपना समर्थन दिखाया था और भारत पर सवाल उठाए थे। इनमें इंग्लैंड के पूर्व कप्तान नासिर हुसैन भी शामिल हैं। अब भारत के महान क्रिकेटर सुनील गावस्कर ने उन्हें करार जवाब देते हुए लताड़ा है। गावस्कर का कहना है कि पुरानी ताकतों को भारत का दम देखना पच नहीं रहा। उन्होंने वैभव सूर्यवंशी का उदाहरण देते हुए नासिर हुसैन की जमकर खिंचाई की। आइए पूरा मामला जानते हैं...
नासिर हुसैन और बाबर आजम
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क्या बोले थे नासिर हुसैन?
दरअसल, भारत-पाकिस्तान मैच पर खड़े हुए बवाल के बीच नासिर हुसैन ने स्काई स्पोर्ट्स पॉडकास्ट में सवाल उठाया था कि क्या आईसीसी सभी टीमों के साथ एक जैसा व्यवहार करता है? उन्होंने कहा, 'अगर भारत किसी टूर्नामेंट से एक महीने पहले कह देता कि हमारी सरकार हमें किसी देश में खेलने नहीं देगी, तो क्या आईसीसी उतना ही सख्त रहता? हर कोई सिर्फ एक चीज चाहता है, समानता।' नासिर ने यह भी जोड़ा कि भारत के पास पैसा है, ताकत है, लेकिन ताकत के साथ जिम्मेदारी भी आती है।
गावस्कर का बयान सामने आया है
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सुनील गावस्कर का पलटवार
सुनील गावस्कर ने इस टिप्पणी का सीधा नाम लिए बिना जवाब दिया। उन्होंने लिखा, 'कुछ लोग, खासकर पुरानी ताकतें, यह पचा नहीं पा रही हैं कि अब विश्व क्रिकेट का पावर सेंटर भारत है।' उन्होंने कहा कि सवाल पूछने वाले यह भूल जाते हैं कि चैंपियंस ट्रॉफी 2025 में भारत ने पाकिस्तान जाने से काफी पहले ही मना कर दिया था। तब तक शेड्यूल भी जारी नहीं किया गया था और इसके बाद ही आईसीसी ने न्यूट्रल वेन्यू का इंतजाम किया था। गावस्कर ने स्पोर्टस्टार में अपने आर्टिकल में साफ लिखा, 'दुनिया का हर समझदार व्यक्ति जानता है कि भारत की कोई भी सरकार अपने खिलाड़ियों को पाकिस्तान भेजने की अनुमति नहीं देगी।'
नासिर हुसैन और सुनील गावस्कर
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2003 वर्ल्ड कप का उदाहरण
गावस्कर ने दोहरे मापदंड दिखाने के लिए 2003 विश्व कप की घटना याद दिलाई, जब इंग्लैंड ने जिम्बाब्वे में खेलने से मना कर दिया था। उन्होंने कहा, 'तब कोई सुरक्षा खतरा नहीं था, फिर भी इंग्लैंड ने खेलने से इनकार कर दिया और अंक छोड़ दिए। क्या आईसीसी ने कुछ किया? नहीं। क्योंकि तब इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया का दबदबा था और बाकी कोई उन्हें नाराज़ नहीं करना चाहता था।'
वैभव सूर्यवंशी
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वैभव सूर्यवंशी वाला तंज
गावस्कर यहीं नहीं रुके। उन्होंने अंडर-19 विश्व कप फाइनल में वैभव सूर्यवंशी की 80 गेंदों पर 175 रन की विस्फोटक पारी का जिक्र करते हुए व्यंग्य किया। उन्होंने लिखा, 'अब अगर देखें तो जो वैभव सूर्यवंशी ने किया, वही असली धौंस जमाना (बुलीइंग) है, न कि वो काल्पनिक बुलीइंग जो कुछ लोग देखते हैं।' यह टिप्पणी सीधे तौर पर उन आलोचनाओं पर वार थी, जिनमें भारत या बीसीसीआई को ताकत का गलत इस्तेमाल करने वाला बताया जा रहा था।
सुनील गावस्कर
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आईसीसी वोटिंग पर भी उठाया मुद्दा
गावस्कर ने यह भी याद दिलाया कि बांग्लादेश के मामले में आईसीसी बोर्ड की वोटिंग में पाकिस्तान और बांग्लादेश को छोड़कर बाकी सभी ने उनके प्रस्ताव के खिलाफ वोट किया था। इसके बावजूद निशाना सिर्फ भारत पर साधा गया।
पंत, रवि शास्त्री, रोजर बिन्नी और सुनील गावस्कर
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बहस खत्म नहीं, पर जवाब मिल गया
इस पूरे विवाद ने साफ कर दिया है कि क्रिकेट अब सिर्फ मैदान का खेल नहीं रहा। राजनीति, कूटनीति और आर्थिक ताकत सब साथ चलती हैं, लेकिन गावस्कर के तर्कों ने यह जरूर दिखाया कि इतिहास को नजरअंदाज कर सिर्फ एक देश को कठघरे में खड़ा करना आसान है, सही नहीं।