सारांश जैन ने श्रीलंका के खिलाफ कोलंबो टेस्ट में 33 साल 145 दिन की उम्र में भारत के लिए टेस्ट डेब्यू किया। वह 1999 के बाद भारत के सबसे उम्रदराज टेस्ट डेब्यूटेंट बने। घरेलू क्रिकेट में 11 साल की मेहनत के बाद मिला यह मौका उनके लिए खास है, जिसे पिता की एक चिट्ठी ने मुश्किल दौर में लगातार प्रेरित किया।
भारतीय क्रिकेट में कुछ डेब्यू सिर्फ आंकड़ों की वजह से खास नहीं होते, उनके पीछे छिपी कहानी उन्हें यादगार बना देती है। सारांश जैन का टीम इंडिया तक पहुंचने का सफर भी कुछ ऐसा ही है। मध्य प्रदेश के इस स्पिन ऑलराउंडर ने श्रीलंका के खिलाफ कोलंबो के सिंहलीज स्पोर्ट्स क्लब में अपना टेस्ट डेब्यू किया। 33 साल 145 दिन की उम्र में टेस्ट कैप हासिल करने वाले सारांश के लिए यह 11 साल की घरेलू क्रिकेट की मेहनत का नतीजा है। डेब्यू से पहले टीम इंडिया के हडल में रवींद्र जडेजा ने उन्हें टेस्ट कैप सौंपी।
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33 साल की उम्र में बनाया खास रिकॉर्ड
सारांश जैन ने 33 साल 145 दिन की उम्र में भारत के लिए टेस्ट डेब्यू किया। इसके साथ ही वह 1999 के बाद भारत के सबसे उम्रदराज टेस्ट डेब्यूटेंट बन गए हैं। भारत के लिए 33 साल की उम्र के बाद टेस्ट डेब्यू करने वाले पिछले खिलाड़ी रॉबिन सिंह थे। उन्होंने 1998 में जिम्बाब्वे के खिलाफ हरारे टेस्ट में 35 साल 23 दिन की उम्र में डेब्यू किया था। यानी सारांश का टेस्ट डेब्यू उम्र के लिहाज से भारतीय क्रिकेट के इतिहास में खास रिकॉर्ड बन गया है।
भारत के लिए 33 वर्ष या उससे अधिक उम्र में टेस्ट डेब्यू करने वाले खिलाड़ी
खिलाड़ी
टेस्ट डेब्यू की तारीख
डेब्यू के वक्त बिल्कुल सटीक उम्र
सारांश जैन
23 अगस्त 2026
33 साल, 145 दिन
रॉबिन सिंह
7 अक्टूबर 1998
35 साल, 23 दिन
राकेश शुक्ला
17 सितंबर 1982
34 साल, 225 दिन
पानामल पंजाबी
1 जनवरी 1955
33 साल, 103 दिन
शाह नायलचंद
16 अक्टूबर 1952
33 साल, 287 दिन
श्यूट बनर्जी
(सरोबिंदु नाथ बनर्जी)
23 मार्च 1949
37 साल, 124 दिन
केकी खुर्शेदजी तारापोर
22 अप्रैल 1948
37 साल, 332 दिन
अमीर इलाही
12 दिसंबर 1947
39 साल, 102 दिन
कोटार रामास्वामी
27 जून 1936
40 साल, 39 दिन
रुस्तमजी जमशेदजी
15 दिसंबर 1933
41 साल, 27 दिन (भारत के सबसे उम्रदराज टेस्ट डेब्यूटांट)
लाधा रामजी
15 दिसंबर 1933
33 साल, 308 दिन
सीके नायडू
25 जून 1932
36 साल, 238 दिन
सारांश जैन का डेब्यू
- फोटो : BCCI Twitter
आईपीएल डेब्यू से पहले अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट
सारांश जैन के डेब्यू की एक और खास बात है। वह उन चुनिंदा भारतीय खिलाड़ियों की सूची में शामिल हो गए हैं, जिन्होंने आईपीएल में खेलने से पहले ही अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में डेब्यू किया। इस सूची में मुरली विजय और मोहम्मद शमी जैसे बड़े नाम शामिल हैं। मुरली विजय ने आईपीएल डेब्यू से पहले 2008 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ नागपुर टेस्ट से अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में कदम रखा था। वहीं मोहम्मद शमी ने 2013 में पाकिस्तान के खिलाफ दिल्ली में अपना वनडे डेब्यू किया था। अब सारांश जैन भी इस खास सूची का हिस्सा बन गए हैं। उन्होंने आईपीएल डेब्यू से पहले ही श्रीलंका के खिलाफ टेस्ट क्रिकेट में कदम रखा है।
11 साल की मेहनत के बाद मिला टीम इंडिया का टिकट
सारांश जैन ने 2014 के आखिर में मध्य प्रदेश के लिए प्रथम श्रेणी क्रिकेट में डेब्यू किया था। इसके बाद करीब 11 वर्षों तक वह घरेलू क्रिकेट में लगातार अपनी उपयोगिता साबित करते रहे। दाएं हाथ के ऑफ स्पिनर और बाएं हाथ के बल्लेबाज सारांश ने बल्ले और गेंद दोनों से मध्य प्रदेश के लिए अहम योगदान दिया। घरेलू क्रिकेट में लगातार अच्छे प्रदर्शन के बावजूद उन्हें लंबे समय तक भारतीय टीम का बुलावा नहीं मिला। लेकिन उन्होंने इंतजार के दौरान अपनी मेहनत जारी रखी और आखिरकार श्रीलंका के खिलाफ टेस्ट सीरीज में उनका सपना पूरा हुआ।
सारांश जैन का डेब्यू
- फोटो : BCCI Twitter
घरेलू क्रिकेट में ऐसा है रिकॉर्ड
सारांश जैन के प्रथम श्रेणी आंकड़े उनकी ऑलराउंड क्षमता की कहानी बताते हैं। उन्होंने 54 प्रथम श्रेणी मैचों में 188 विकेट लिए हैं। उनका गेंदबाजी औसत 27.30 रहा है और वह 10 बार पारी में पांच विकेट लेने का कारनामा कर चुके हैं।बल्लेबाजी में भी सारांश ने उपयोगी योगदान दिया है। उनके नाम 2,223 रन हैं, जो उन्होंने 31.75 की औसत से बनाए हैं। उनके खाते में दो शतक और 14 अर्धशतक भी हैं।
पिता भी खेल चुके हैं रणजी ट्रॉफी
सारांश के क्रिकेट सफर में उनके पिता सुबोध जैन की भूमिका बेहद अहम रही है। सुबोध जैन मध्य प्रदेश के लिए रणजी ट्रॉफी खेल चुके हैं। यानी सारांश को क्रिकेट का संस्कार परिवार से ही मिला। लेकिन उनके करियर के शुरुआती दौर में परिवार के सामने मुश्किल वक्त भी आया। जब सारांश ऑस्ट्रेलिया दौरे पर क्रिकेट खेलने गए थे, उसी दौरान उनके पिता का कैंसर का ऑपरेशन हुआ। सर्जरी के बाद वह बोल नहीं पा रहे थे। ऐसे में उन्होंने अपने बेटे के लिए एक चिट्ठी लिखी।
सारांश जैन
- फोटो : PTI
पिता की वह चिट्ठी बनी सबसे बड़ी ताकत
उस चिट्ठी में सारांश के पिता ने उन्हें क्रिकेट पर पूरा ध्यान केंद्रित रखने की सलाह दी थी। सारांश ने उस हस्तलिखित चिट्ठी को आज तक संभालकर रखा है। टीम इंडिया तक पहुंचने के लंबे इंतजार में यही चिट्ठी उनके लिए प्रेरणा का बड़ा स्रोत बनी रही। घरेलू क्रिकेट में लगातार मौके तलाशते हुए सारांश ने अपने पिता की उस सीख को नहीं छोड़ा और आखिरकार 33 साल की उम्र में भारत की टेस्ट कैप हासिल कर ली।
रणजी ट्रॉफी में बल्ले और गेंद से किया कमाल
सारांश जैन 2021-22 रणजी ट्रॉफी जीतने वाली मध्य प्रदेश टीम के अहम सदस्य थे। मुंबई के खिलाफ फाइनल में उन्होंने 57 रन की महत्वपूर्ण पारी खेली और टीम को पहली बार रणजी ट्रॉफी चैंपियन बनने में योगदान दिया। रणजी ट्रॉफी 2022-23 में उनका प्रदर्शन और भी शानदार रहा। उन्होंने 360 रन बनाने के साथ 35 विकेट झटके। इस प्रदर्शन के लिए उन्हें टूर्नामेंट के सर्वश्रेष्ठ ऑलराउंडर के रूप में लाला अमरनाथ पुरस्कार से सम्मानित किया गया। इसके अगले रणजी सीजन में भी सारांश ने निरंतरता दिखाई। उन्होंने 57.55 की औसत से 518 रन बनाए और 20.43 की औसत से 30 विकेट अपने नाम किए।
दलीप ट्रॉफी और भारत-ए के प्रदर्शन ने दिलाई जगह
साल 2025 की दलीप ट्रॉफी में सारांश ने सेंट्रल जोन को खिताब दिलाने में अहम भूमिका निभाई। उन्होंने टूर्नामेंट में 16 विकेट लिए और प्लेयर ऑफ द सीरीज चुने गए। इसके बाद भारत-ए के श्रीलंका दौरे पर भी उन्होंने अपना प्रभाव छोड़ा। गॉल में श्रीलंका-ए के खिलाफ चार दिवसीय मुकाबले में सारांश ने छह विकेट लेने के अलावा नाबाद 70 रन की उपयोगी पारी खेली। स्पिन की मददगार श्रीलंकाई परिस्थितियों में उनके इस ऑलराउंड प्रदर्शन ने चयनकर्ताओं का ध्यान खींचा।
अब टीम इंडिया में नई शुरुआत
श्रीलंका के खिलाफ दूसरे टेस्ट में कुलदीप यादव की जगह सारांश जैन को प्लेइंग-11 में मौका मिला। इसके साथ ही भारत को अपने स्पिन विभाग में ऑफ-स्पिन का विकल्प भी मिला। रवींद्र जडेजा और मानव सुथार के साथ सारांश की मौजूदगी टीम के स्पिन आक्रमण को अलग तरह की विविधता देती है। लेकिन उनके लिए यह सिर्फ एक टेस्ट मैच नहीं, बल्कि 11 साल के इंतजार, पिता की चिट्ठी और लगातार मेहनत के बाद हासिल हुआ वह सपना है, जिसके लिए उन्होंने लंबा इंतजार किया।