रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु के पॉडकास्ट में बातचीत करते हुए विराट कोहली ने भारतीय टेस्ट टीम के अपने दौर को याद किया। उन्होंने कहा कि उस टीम की सबसे बड़ी ताकत खिलाड़ियों के बीच की दोस्ती और आपसी भरोसा था। विराट ने कहा, 'सबसे अहम चीज हमारी औसत उम्र थी। सीनियर और जूनियर के बीच कोई झिझक नहीं थी। हम दोस्तों के एक ग्रुप की तरह थे।' उन्होंने बताया कि चेतेश्वर पुजारा, अजिंक्य रहाणे, रविचंद्रन अश्विन, ईशांत शर्मा, मोहम्मद शमी और रवींद्र जडेजा जैसे खिलाड़ी लगभग एक ही उम्र के थे और साथ में आगे बढ़े।
'हर खिलाड़ी लेता था जिम्मेदारी'
विराट ने कहा कि उस दौर में सिर्फ कप्तान या कोचिंग स्टाफ ही नहीं, बल्कि हर खिलाड़ी टीम को बेहतर बनाने की जिम्मेदारी महसूस करता था। उन्होंने कहा, 'ऐसा नहीं था कि कुछ लोग ही सब कुछ संभालते थे। हर खिलाड़ी को लगता था कि अगले छह से आठ साल के लिए टीम बनाने में उसकी भूमिका है।' विराट के मुताबिक यही सोच टीम को लगातार बेहतर बनने और ऊंचे मानक बनाए रखने के लिए प्रेरित करती थी।
विदेशी जमीन पर मिली ऐतिहासिक सफलताएं
धोनी के टेस्ट क्रिकेट से कप्तानी छोड़ने के बाद विराट ने 2014 ऑस्ट्रेलिया दौरे पर टीम की कमान संभाली थी। इसके बाद उन्होंने भारतीय टेस्ट टीम को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। उनकी कप्तानी में भारत ने 68 टेस्ट मैचों में 40 जीत दर्ज कीं, जो किसी भी भारतीय कप्तान द्वारा सबसे ज्यादा हैं। विराट के नेतृत्व में भारत ने 2018-19 में ऑस्ट्रेलिया में ऐतिहासिक टेस्ट सीरीज जीती। इसके अलावा दक्षिण अफ्रीका, इंग्लैंड, न्यूजीलैंड और ऑस्ट्रेलिया जैसे सेना (S.E.N.A) देशों में भारत ने सात टेस्ट जीत दर्ज कीं, जो किसी एशियाई कप्तान के लिए रिकॉर्ड है।
तेज गेंदबाजी बनी सबसे बड़ी ताकत
विराट कोहली के दौर में भारतीय टीम की तेज गेंदबाजी भी दुनिया की सबसे खतरनाक आक्रमणों में शामिल हुई। शमी और ईशांत की अगुआई में भारत ने विदेशी परिस्थितियों में शानदार प्रदर्शन किया। 2025 में टेस्ट क्रिकेट से संन्यास लेने वाले विराट ने अपने करियर में 9230 रन बनाए। उनके नाम 30 टेस्ट शतक दर्ज हैं और वह भारत के चौथे सबसे ज्यादा रन बनाने वाले टेस्ट बल्लेबाज हैं।