श्रीवत्स गोस्वामी ने उठाया सवाल
पूर्व भारतीय विकेटकीपर श्रीवत्स गोस्वामी ने सीधे कोहनी के मुड़ने पर सवाल नहीं उठाया, बल्कि गेंद छोड़ने से पहले आने वाले 'पॉज' यानी उस्मान के कुछ क्षण के लिए रुकने पर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा, 'फुटबॉल में भी पेनल्टी रन-अप के दौरान रुकने की इजाजत नहीं है। यह कैसे ठीक है? एक्शन ठीक है, लेकिन डिलीवरी से पहले पॉज? इसे गंभीरता से जारी नहीं रखा जा सकता।'
अश्विन ने पलट दी बहस
इसके बाद मैदान में एंट्री हुई रविचंद्रन अश्विन की। उन्होंने फुटबॉल वाली तुलना से सहमति जताई, लेकिन मुद्दे को अलग दिशा दे दी। अश्विन ने कहा, 'सहमत हूं कि फुटबॉल में इसकी इजाजत नहीं है! लेकिन बल्लेबाज बिना अंपायर या गेंदबाज को बताए स्विच-हिट या रिवर्स खेल सकता है… तो पाबंदियां सिर्फ गेंदबाज पर ही क्यों?' फिर उन्होंने नियमों पर बड़ा सवाल खड़ा किया। अश्विन ने कहा, 'असल में गेंदबाज बिना अंपायर को बताए अपनी गेंदबाजी वाली बांह भी नहीं बदल सकता। पहले वह नियम बदलिए।'
आकाश चोपड़ा भी कूदे
अश्विन की बात को सपोर्ट करते हुए आकाश चोपड़ा ने कहा कि पॉज अपने आप में गलत नहीं है, लेकिन उन्होंने अश्विन के सामने तकनीकी सवाल रख दिया। उन्होंने पूछा, 'अगर रन-अप से कोई मोमेंटम नहीं बन रहा, तो क्या बिना बांह मोड़े कुछ गेंदों पर 20-25 किमी/घंटा की रफ्तार बढ़ाना संभव है?' और यहीं से बहस भावनाओं से निकलकर बायोमैकेनिक्स पर पहुंच गई।
आईसीसी पहले दे चुका है क्लीन चिट
याद दिला दें कि उस्मान तारिक की एक्शन को आईसीसी पहले ही दो बार क्लियर कर चुका है। उनकी कोहनी का झुकाव तय 15 डिग्री की सीमा के भीतर पाया गया था। तारिक खुद भी कह चुके हैं कि उनकी बांह का प्राकृतिक ढांचा ऐसा है। तकनीकी तौर पर सब सही होने के बावजूद, इस मुद्दे ने क्रिकेट फैंस और विशेषज्ञों को दो हिस्सों में बांट दिया है। अश्विन, गोस्वामी और चोपड़ा की सार्वजनिक बहस ने साफ कर दिया कि यह विवाद जल्दी खत्म होने वाला नहीं।