क्रिकेट की दुनिया ने शुक्रवार को अपना एक ऐसा सितारा खो दिया, जिसकी चमक शायद कभी फीकी नहीं पड़ेगी। वेस्टइंडीज के महान ऑलराउंडर सर गारफील्ड 'गैरी' सोबर्स का शुक्रवार को 89 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। उन्हें सिर्फ एक महान बल्लेबाज या गेंदबाज नहीं, बल्कि क्रिकेट इतिहास का सबसे कम्प्लीट क्रिकेटर माना जाता है।
महान ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाज सर डॉन ब्रैडमैन ने उन्हें कभी 'फाइव-इन-वन क्रिकेटर' कहा था। वजह भी साफ थी, वह विश्वस्तरीय बल्लेबाज थे, बाएं हाथ से फास्ट-मीडियम गेंदबाजी कर सकते थे, ऑर्थोडॉक्स स्पिन डाल सकते थे, चाइनामैन (लेफ्ट-आर्म रिस्ट स्पिन) भी फेंकते थे और फील्डिंग में भी अद्भुत थे। क्रिकेट के इतिहास में इतने गुण एक ही खिलाड़ी में शायद ही कभी देखने को मिले।
छह अंगुलियों के साथ जन्म, पांच साल की उम्र में पिता का साया छिन गया
- 28 जुलाई 1936 को बारबाडोस के ब्रिजटाउन में जन्मे सोबर्स का बचपन संघर्षों से भरा रहा। उनका जन्म दोनों हाथों में छह-छह अंगुलियों के साथ हुआ था। बचपन में ही उन्होंने अतिरिक्त अंगुलियां खुद हटवा लीं और फिर उसी आत्मविश्वास के साथ क्रिकेट खेलना शुरू कर दिया।
- लेकिन जिंदगी की सबसे बड़ी चोट तब लगी, जब वह सिर्फ पांच साल के थे। उनके पिता, जो मर्चेंट नेवी में कार्यरत थे, द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान जर्मन पनडुब्बी के हमले में मारे गए। पिता के निधन के बाद उनकी मां ने अकेले पूरे परिवार की जिम्मेदारी संभाली।
- समुद्र किनारे भाइयों के साथ खेला गया क्रिकेट ही उनका पहला कोच बना। किसी औपचारिक प्रशिक्षण के बिना भी उनकी प्रतिभा इतनी असाधारण थी कि उन्होंने कम उम्र में ही फुटबॉल, बास्केटबॉल और गोल्फ में भी बारबाडोस का प्रतिनिधित्व किया।
16 साल में फर्स्ट क्लास, 17 साल में टेस्ट क्रिकेट
सोबर्स की प्रतिभा ज्यादा दिनों तक छिप नहीं सकी। महज 16 वर्ष की उम्र में उन्होंने बारबाडोस के लिए फर्स्ट क्लास क्रिकेट में डेब्यू किया। सिर्फ 14 महीने बाद, 17 साल की उम्र में उन्हें वेस्टइंडीज की टेस्ट टीम में जगह मिल गई। शुरुआत में उन्हें मुख्य रूप से गेंदबाज के रूप में चुना गया था और वह निचले क्रम में बल्लेबाजी करते थे, लेकिन आने वाले वर्षों में दुनिया ने उनके भीतर छिपे महान बल्लेबाज को भी देखा।
सर गैरी सोबर्स
- फोटो : Reuters
365 रन... जिसने इतिहास बदल दिया
1958 में पाकिस्तान के खिलाफ खेली गई पारी ने उन्हें अमर बना दिया। उस समय केवल 21 साल के सोबर्स ने अपना पहला टेस्ट शतक लगाया, लेकिन वहीं नहीं रुके। उन्होंने 365 रन* बनाकर टेस्ट क्रिकेट का सर्वोच्च व्यक्तिगत स्कोर बनाया। यह रिकॉर्ड 36 वर्षों तक अटूट रहा और क्रिकेट इतिहास की सबसे महान पारियों में गिना जाता है।
दोस्त को खोया, लेकिन टूटे नहीं
1959 में सोबर्स एक भीषण सड़क दुर्घटना का शिकार हुए। इस हादसे में उनके बेहद करीबी दोस्त और वेस्टइंडीज के साथी क्रिकेटर कॉली स्मिथ की मौत हो गई। यह घटना उन्हें भीतर तक झकझोर गई, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। उन्होंने कहा कि अब वह सिर्फ अपने लिए नहीं, बल्कि अपने दिवंगत दोस्त के लिए भी खेलेंगे। इसके बाद उनके बल्ले और गेंद से ऐसे प्रदर्शन देखने को मिले, जिन्होंने उन्हें महानतम खिलाड़ियों की कतार में पहुंचा दिया।
एक ओवर में छह छक्के लगाने वाले पहले बल्लेबाज
1968 में इंग्लैंड की काउंटी क्रिकेट में नॉटिंघमशायर की ओर से खेलते हुए सोबर्स ने इतिहास रच दिया। उन्होंने ग्लैमॉर्गन के गेंदबाज मैल्कम नैश के एक ओवर की सभी छह गेंदों पर छह छक्के लगाए। फर्स्ट क्लास क्रिकेट में ऐसा करने वाले वह दुनिया के पहले बल्लेबाज बने।
सर गारफील्ड सोबर्स
- फोटो : ANI
कप्तान बने, पीढ़ियों को प्रेरित किया
1965 में उन्हें वेस्टइंडीज का कप्तान बनाया गया। उन्होंने 39 टेस्ट मैचों में टीम की कप्तानी की और कैरेबियाई देशों के युवाओं के लिए उम्मीद और प्रेरणा का प्रतीक बन गए। उनका प्रभाव सिर्फ रिकॉर्ड तक सीमित नहीं था। उन्होंने साबित किया कि छोटे से द्वीप में जन्मा एक लड़का भी दुनिया का सबसे महान खिलाड़ी बन सकता है।
सर डॉन ब्रैडमैन ने भी सर सोबर्स की तारीफ की थी
- फोटो : ANI/ICC
सम्मान, जो उनकी महानता बताते हैं
क्रिकेट में उनके असाधारण योगदान के लिए उन्हें 'सर' (नाइटहुड) की उपाधि से सम्मानित किया गया। उन्हें विजडन क्रिकेटर्स ऑफ द सेंचुरी में शामिल किया गया और आईसीसी हॉल ऑफ फेम में भी जगह मिली। आज भी दुनिया के हर महान ऑलराउंडर की तुलना सर गारफील्ड सोबर्स से की जाती है।
करियर के आंकड़े, जो उन्हें अमर बनाते हैं
टेस्ट क्रिकेट करियर
| रिकॉर्ड |
आंकड़े |
| मैच |
93 |
| पारियां |
160 |
| रन |
8,032 |
| बल्लेबाजी औसत |
57.78 |
| सर्वोच्च स्कोर |
365* |
| शतक |
26 |
| अर्धशतक |
30 |
| विकेट |
235 |
| गेंदबाजी औसत |
34.04 |
| सर्वश्रेष्ठ गेंदबाजी |
6/73 |
| पारी में 5 विकेट |
6 |
| कैच |
109 |
फर्स्ट क्लास क्रिकेट करियर
| रिकॉर्ड |
आंकड़े |
| मैच |
383 |
| रन |
28,314 |
| बल्लेबाजी औसत |
54.87 |
| शतक |
86 |
| अर्धशतक |
140 |
| सर्वोच्च स्कोर |
365* |
| विकेट |
1,043 |
| गेंदबाजी औसत |
27.74 |
| पारी में 5 विकेट |
71 |
| मैच में 10 विकेट |
12 |
| कैच |
407 |
प्यार, परिवार और निजी जिंदगी
सोबर्स की निजी जिंदगी भी काफी चर्चाओं में रही। भारतीय अभिनेत्री अंजू महेंद्रू के साथ उनका रिश्ता सुर्खियों में रहा, हालांकि दोनों की शादी नहीं हो सकी। इसके बाद उन्होंने 12 सितंबर 1969 को ऑस्ट्रेलिया की प्रूडेंस (प्रू) किर्बी से शादी की। दोनों के दो बेटे मैथ्यू और डेनियल हुए, जबकि उन्होंने जेनेवीव नाम की एक बेटी को गोद भी लिया। बाद में दोनों का तलाक हो गया, लेकिन परिवार के साथ उनके रिश्ते हमेशा मजबूत बने रहे।
एक युग का अंत
क्रिकेट में कई महान बल्लेबाज आए, कई महान गेंदबाज भी, लेकिन सर गारफील्ड सोबर्स जैसे खिलाड़ी शायद ही दोबारा देखने को मिलें। उन्होंने यह साबित किया कि महानता केवल रिकॉर्ड से नहीं, बल्कि खेल को नई ऊंचाइयों तक ले जाने से हासिल होती है। शुक्रवार को उनके निधन के साथ एक युग का अंत जरूर हुआ है, लेकिन क्रिकेट का हर ऑलराउंडर आने वाले वर्षों में भी उसी कसौटी पर परखा जाएगा, जिसका नाम है- सर गारफील्ड 'गैरी' सोबर्स।