पूर्व भारतीय क्रिकेटर और कमेंटेटर संजय मांजरेकर एक बार फिर अपने बयान की वजह से चर्चा में आ गए हैं। भारत के टी20 विश्वकप जीतने के बाद उन्होंने सोशल मीडिया पर ऐसा बयान दिया जिसने क्रिकेट जगत में नई बहस छेड़ दी। मांजरेकर ने कहा कि भारत के टी20 विश्व कप खिताबों की अहमियत वनडे विश्व कप जीत की तुलना में कम है।
उन्होंने अपनी पोस्ट में लिखा, 'समय के साथ हमें हर साल दिए जाने वाले इन विश्व कप खिताबों को सही नजरिए से देखना होगा। भारत की टी20 विश्व कप जीत, 1983 और 2011 के वनडे विश्व कप की जीत के मुकाबले अपनी असली चुनौती और पवित्रता के मामले में कहीं नहीं ठहरती।'
1983 और 2011 की जीत को बताया ऐतिहासिक
भारत ने अपना पहला वनडे विश्व कप 1983 में कपिल देव की कप्तानी में जीता था। उस समय भारत ने फाइनल में वेस्टइंडीज को हराकर इतिहास रचा था। इसके बाद भारत को दूसरा वनडे विश्व कप जीतने में 28 साल का लंबा इंतजार करना पड़ा। यह सपना 2011 विश्वकप में पूरा हुआ, जब एमएस धोनी की कप्तानी में भारत ने श्रीलंका को हराकर खिताब अपने नाम किया।
टी20 विश्व कप में भारत की सफलता
टी20 फॉर्मेट में भी भारत का प्रदर्शन शानदार रहा है। भारत ने पहला टी20 विश्व कप 2007 में एमएस धोनी की कप्तानी में जीता था। इसके बाद लंबे इंतजार के बाद भारत ने टी20 विश्वकप 2024 और टी20 विश्वकप 2026 के खिताब भी अपने नाम किए। हाल ही में अहमदाबाद में खेले गए फाइनल में सूर्यकुमार यादव की कप्तानी में भारत ने न्यूजीलैंड को हराकर यह खिताब जीता। इस जीत के साथ भारत लगातार दो टी20 विश्व कप जीतने वाली और कुल तीन बार यह ट्रॉफी अपने नाम करने वाली दुनिया की पहली टीम बन गई।
फैंस ने जताई नाराजगी
टी20 विश्व कप जीत के तुरंत बाद आए मांजरेकर के इस बयान ने सोशल मीडिया पर बहस छेड़ दी। कई क्रिकेट फैंस ने उनकी टिप्पणी की आलोचना करते हुए कहा कि हर फॉर्मेट का विश्व कप अपने आप में महत्वपूर्ण होता है। हालांकि कुछ लोगों का मानना है कि वनडे विश्व कप की ऐतिहासिक अहमियत और उसका लंबा फॉर्मेट उसे अलग पहचान देता है। फिलहाल मांजरेकर के इस बयान ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्रिकेट के अलग-अलग फॉर्मेट में विश्व कप जीत की अहमियत को कैसे देखा जाना चाहिए।