क्यों किया पाकिस्तान ने ऐसा?
उन लोगों के लिए जो केवल स्कोर देखकर परिणाम को सामान्य मान सकते हैं, असल कहानी इसका तकनीकी पहलू है। अंडर-19 विश्व कप के नियमों के अनुसार सुपर सिक्स चरण में सिर्फ उन्हीं मैचों के अंक और नेट रन रेट आगे जाते हैं जो उन टीमों के खिलाफ खेले गए हों जो सुपर सिक्स में पहुंची हों।
इसका मतलब:
- अगर जिम्बाब्वे स्कॉटलैंड से ऊपर रहता, तो पाकिस्तान का जिम्बाब्वे के खिलाफ मैच से मिले अंक सुपर सिक्स में गिने जाएंगे। और पाकिस्तान की जीत ज्यादा बेहतर होने से उसका नेट रन रेट और मजबूत होगा।
- चूंकि पाकिस्तान ने जिम्बाब्वे को स्कॉटलैंड की तुलना में कहीं अधिक बड़े अंतर से हराया था, इसलिए इस परिणाम के चलते सुपर सिक्स में प्रवेश करते समय उनका नेट रन रेट सामान्य स्थिति की तुलना में कहीं अधिक मजबूत होगा।
- इस स्थिति में स्कॉटलैंड के खिलाफ जीत का पाकिस्तान कोई फायदा नहीं होगा, क्योंकि स्कॉटलैंड अगले राउंड में नहीं जा पाएगा और उसके खिलाफ मिली जीत से मिले अंक और रन रेट आगे के राउंड में नहीं जाएंगे।
इसीलिए पाकिस्तान ने ये सुनिश्चित किया कि जिम्बाब्वे स्कॉटलैंड से आगे रहे, चाहे इसके लिए रन-चेज को धीमा ही क्यों न करना पड़े।
पूर्व खिलाड़ियों की प्रतिक्रिया
रणनीति पर बहस तुरंत छिड़ गई। पूर्व जिम्बाब्वे कप्तान और कमेंटेटर एंडी फ्लावर ने इसे खेल भावना से नहीं बल्कि चतुराई से देखना चुना। उन्होंने कहा, 'पहले उन्हें यह सुनिश्चित करना था कि वे मैच नहीं हारेंगे, फिर उन्होंने बस धीमा किया ताकि जिम्बाब्वे आगे रहे। कुछ लोग इसकी नैतिकता पर सवाल उठाएंगे, पर मैं नहीं।' फ्लावर ने इसे 'धोखे वाली चालाकी लेकिन तर्कसंगत' कहा।
आलोचना: क्या यह खेल भावना के खिलाफ?
दूसरी तरफ कुछ लोग मानते हैं कि यह कदम खेल भावना के खिलाफ है। उनके अनुसार रन बनाना धीमा करना एक जानबूझकर परिणाम-प्रभावित करने जैसा लगता है। हालांकि आईसीसी की आचार संहिता में परिणाम को जानबूझकर प्रभावित करना के लिए दंड का प्रावधान है, पर मंशा साबित करना लगभग असंभव होता है। इसलिए विवाद अभी नैतिकता बनाम रणनीति के दायरे में अटका हुआ है।