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धोनी की ऐतिहासिक पारी: 21 साल पहले आज ही के दिन श्रीलंकाई गेंदबाजों की उड़ाई थी नींद, जयपुर में बरसाए 10 छक्के

Sat, 31 Oct 2026 11:19 AM IST
स्वप्निल शशांक स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

31 अक्तूबर 2005 को महेंद्र सिंह धोनी ने जयपुर में श्रीलंका के खिलाफ 145 गेंदों में नाबाद 183 रन बनाए थे। उनकी पारी की बदौलत भारत ने 299 रन का लक्ष्य छह विकेट से हासिल किया। इस दौरान धोनी ने विकेटकीपर के सर्वोच्च वनडे स्कोर का रिकॉर्ड भी अपने नाम किया था।
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धोनी - फोटो : BCCI
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विस्तार
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31 अक्तूबर 2005... भारतीय क्रिकेट में यह तारीख महेंद्र सिंह धोनी के प्रशंसकों के लिए बेहद खास है। इसी दिन तब लंबे बाल रखने वाले 24 वर्षीय धोनी ने दुनिया को अपनी बल्लेबाजी का दम दिखाया था। जयपुर के सवाई मानसिंह स्टेडियम में श्रीलंका के खिलाफ तीसरे वनडे में उन्होंने नाबाद 183 रन की पारी खेलकर भारतीय क्रिकेट में अपनी अलग पहचान बनाई थी। धोनी ने महज 145 गेंदों में यह पारी खेली थी। उनकी बल्लेबाजी के दम पर भारत ने 299 रन का मुश्किल लक्ष्य आसानी से हासिल कर लिया था।

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सचिन के जल्दी आउट होने के बाद धोनी को मिला प्रमोशन
मुकाबले में श्रीलंका ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी का फैसला किया था। टीम ने निर्धारित 50 ओवर में चार विकेट पर 298 रन बनाए। विकेटकीपर बल्लेबाज कुमार संगकारा ने 147 गेंदों में नाबाद 138 रन की शानदार पारी खेली। वहीं, महेला जयवर्धने ने 71 रन बनाए। भारत के सामने 299 रन का चुनौतीपूर्ण लक्ष्य था। उस दौर में वनडे क्रिकेट में इतने बड़े लक्ष्य का पीछा करना आसान नहीं माना जाता था।

भारतीय पारी की शुरुआत भी अच्छी नहीं रही। महान बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर पहले ही ओवर में चामिंडा वास की गेंद पर महज दो रन बनाकर आउट हो गए। इसके बाद कप्तान राहुल द्रविड़ और कोच ग्रेग चैपल ने एक बड़ा फैसला लिया। उन्होंने नियमित बल्लेबाजी क्रम में बदलाव करते हुए युवा धोनी को तीसरे नंबर पर भेज दिया। यह फैसला भारतीय क्रिकेट के यादगार पलों में शामिल हो गया।
 

 

85 गेंदों में शतक, मुरलीधरन समेत सभी गेंदबाजों की धुनाई
नंबर तीन पर बल्लेबाजी करने उतरे धोनी ने शुरुआत से ही आक्रामक रुख अपनाया। उन्होंने श्रीलंकाई गेंदबाजों को संभलने का मौका नहीं दिया। दिग्गज स्पिनर मुथैया मुरलीधरन भी उनकी आक्रामक बल्लेबाजी के सामने बेअसर नजर आए। धोनी ने महज 85 गेंदों में अपना शतक पूरा कर लिया। उनकी पारी में 15 चौके और 10 छक्के शामिल थे।

पारी के दूसरे हिस्से में उन्हें पैरों में तेज ऐंठन की परेशानी भी हुई, लेकिन उन्होंने अपना आक्रामक अंदाज नहीं छोड़ा। धोनी ने अंत तक नाबाद रहते हुए भारत को जीत दिलाई। उन्होंने तिलकरत्ने दिलशान की गेंद पर मिडविकेट के ऊपर से शानदार छक्का लगाकर मुकाबला खत्म किया। भारत ने 46.1 ओवर में चार विकेट पर 303 रन बनाकर छह विकेट से जीत दर्ज की। टीम ने 23 गेंद शेष रहते लक्ष्य हासिल कर लिया।

 

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धोनी ने बनाए थे दो बड़े रिकॉर्ड
इस पारी के साथ धोनी ने कई रिकॉर्ड अपने नाम किए थे।
 

  • विकेटकीपर का सर्वोच्च वनडे स्कोर: धोनी के 183* रन ने ऑस्ट्रेलिया के एडम गिलक्रिस्ट के 172 रन के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया था। यह रिकॉर्ड अब भी कायम है।

  • एक वनडे पारी में भारतीय बल्लेबाज के सर्वाधिक छक्के: धोनी के 10 छक्के उस समय किसी भारतीय बल्लेबाज की एक वनडे पारी में सबसे ज्यादा छक्के थे।


इस एक पारी ने धोनी को अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में नई पहचान दिलाई। लंबे बालों वाला यह युवा बल्लेबाज आगे चलकर भारतीय क्रिकेट का सबसे सफल कप्तानों में शामिल हुआ और देश को 2007 टी20 विश्व कप, 2011 वनडे विश्व कप और 2013 चैंपियंस ट्रॉफी का खिताब दिलाया।

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