पाकिस्तान क्रिकेट में मोहम्मद रिजवान और इमाम-उल-हक से जुड़ी जांच के बीच एक और घटनाक्रम सामने आया है। पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) ने रिजवान को मामले पर सार्वजनिक रूप से बयान देने की अनुमति नहीं दी है। पाकिस्तान की मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, रिजवान ने बोर्ड से दो बार इस मामले पर अपनी बात रखने की अनुमति मांगी थी, लेकिन दोनों बार उनकी अपील खारिज कर दी गई।
जांच पर अपना पक्ष रखना चाहते थे रिजवान
रिपोर्ट के मुताबिक, रिजवान राष्ट्रीय साइबर अपराध जांच एजेंसी (NCCIA) की जांच से जुड़े पूरे विवाद पर सार्वजनिक स्पष्टीकरण देना चाहते थे। वह अपने खिलाफ लगाए गए आरोपों और जांच के दौरान हुई घटनाओं को लेकर अपना पक्ष लोगों के सामने रखना चाहते थे। रिजवान ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (ICC) की भ्रष्टाचार रोधी इकाई को भी एक पत्र लिखकर मामले की प्रक्रिया को लेकर स्पष्टीकरण मांगा था। वह इस पत्र को लिखने की वजह भी सार्वजनिक रूप से बताना चाहते थे।
केंद्रीय अनुबंध की शर्त बनी वजह
पाकिस्तान के जियो न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, रिजवान ने अपने केंद्रीय अनुबंध के प्रावधानों के तहत पीसीबी से अनुमति मांगी थी। अनुबंध की धारा 4.1 के अनुसार, अनुबंध से जुड़े किसी मामले पर सार्वजनिक बयान देने से पहले खिलाड़ी को बोर्ड की अनुमति लेना जरूरी है। पीसीबी ने रिजवान के दोनों अनुरोधों को मंजूरी नहीं दी। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि रिजवान का उद्देश्य पीसीबी या किसी अन्य संस्था पर आरोप लगाना नहीं था। वह केवल घटनाक्रम और अपना पक्ष जनता के सामने रखना चाहते थे।
NCCIA कर रही है मामले की जांच
रिजवान और इमाम-उल-हक उन सात खिलाड़ियों में शामिल थे, जिन्हें इंग्लैंड दौरे से वापस भेजा गया था। इसके बाद दोनों से एनसीसीआईए ने पूछताछ की। दोनों खिलाड़ियों से करीब दो घंटे तक पूछताछ हुई और उनके मोबाइल फोन से जुड़े डेटा की जांच की जा रही है। जांच में इंग्लैंड दौरे के दौरान कथित ड्रेसिंग रूम जानकारी लीक होने के साथ वित्तीय लेनदेन और संदिग्ध गतिविधियों की भी पड़ताल की जा रही है।
रिजवान ने एनसीसीआईए को लिखित जवाब देकर जांच और अपने खिलाफ आरोपों की स्पष्ट जानकारी मांगी थी। रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने कहा था, 'यह समझ से परे है कि एनसीसीआईए ऐसे मामले की जांच क्यों कर रही है। मुझे अपने खिलाफ लगाए गए आरोपों की पूरी जानकारी दी जानी चाहिए, ताकि मैं जांच में हिस्सा ले सकूं।' मामला अभी जांच के स्तर पर है और एनसीसीआईए ने दोनों खिलाड़ियों के खिलाफ आरोपों की पुष्टि नहीं की है।