बांग्लादेश क्रिकेट में पिछले कुछ दिनों से विवाद थम नहीं रहा। बांग्लादेश के सीनियर क्रिकेटर मोहम्मद मिथुन, जो इस समय खिलाड़ियों के हितों की लड़ाई में बोर्ड के खिलाफ खड़े हैं। उन्होंने खुलासा किया है कि उन्हें जान से मारने की धमकी मिली है। यह पूरा मामला उस बयान के बाद तेज हुआ जिसमें बीसीबी के शीर्ष अधिकारी नजमुल इस्लाम ने क्रिकेटरों के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी की थी।
मिथुन के चौंकाने वाले खुलासे
मिथुन, जो क्रिकेटर्स वेलफेयर्स एसोसिएशन ऑफ बांग्लादेश (CWAB) के अध्यक्ष हैं, ने क्रिकबज से बातचीत में कहा, 'यह सच है कि मुझे जान से मारने की धमकी मिली है और मेरे लिए यह पहली बार है। मैंने कभी कोई विवादित बात नहीं कही। यह सब मेरे सिर के ऊपर जा रहा है। मैंने कब देश के खिलाफ बात की?'
उन्होंने आगे कहा कि उनका बयान सिर्फ खिलाड़ियों और क्रिकेट के हित में था, न कि किसी निजी एजेंडा के लिए। मिथुन ने कहा, 'मैंने कोई ऐसा शब्द इस्तेमाल नहीं किया जो देश के खिलाफ हो। मैं सिर्फ क्रिकेट और खिलाड़ियों की भलाई के लिए बोल रहा था। कोई भी देश से ऊपर नहीं है।'
नजमुल और बांग्लादेश टीम
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वॉयस नोट्स और कॉल्स से मिली धमकियां
मिथुन ने बताया कि धमकियां उन्हें वॉयस नोट्स के जरिए मिलीं। उन्होंने कहा, 'मैं अब अनजान नंबरों से कॉल नहीं उठा रहा। लेकिन व्हाट्सऐप पर मैसेज और वॉयस नोट्स रोक नहीं सकता। सिर्फ मैं ही नहीं, दूसरे खिलाड़ियों को भी अलग-अलग तरीकों से धमकियां मिली हैं।'
बीसीबी का क्या स्टैंड है?
लगातार बढ़ते विवाद के बीच बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड ने कहा है कि वह इन धमकियों और खिलाड़ियों की शिकायतों की जांच करेगा। बीसीबी डायरेक्टर इफ्तेखार ने कहा, 'हमारे पास सुरक्षा विभाग है। मैंने सुरक्षा टीम को कहा है कि इस मामले को गंभीरता से लिया जाए। हम इसे हल्के में नहीं ले रहे।'
तमीम इकबाल और नजमुल इस्लाम
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आखिर खिलाड़ी विरोध क्यों कर रहे हैं?
विवाद का केंद्र बिंदु है बोर्ड अधिकारी नजमुल इस्लाम का बयान, जिसमें उन्होंने बांग्लादेश के पूर्व कप्तान तमीम इकबाल को 'इंडियन एजेंट' कहा था। तमीम ने भारत-बांग्लादेश क्रिकेट तनाव के बीच संवाद की अपील की थी, जिसके बाद इस्लाम ने उन पर हमला बोला।
बीसीबी डायरेक्टर इफ्तेखार ने कहा, 'हालात इसलिए और बिगड़े क्योंकि उन्होंने और बयान दिए। बोर्ड अध्यक्ष ने इस बारे में उनसे बात की है, भले ही उन्होंने मीडिया में इससे इनकार किया हो।' इस बयानबाजी और धमकियों के बीच दो BPL मैच और कई ढाका लीग फिक्स्चर रद्द भी हुए, जिससे बांग्लादेश क्रिकेट पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी दबाव बढ़ा है।