भारत-पाकिस्तान मुकाबला हो और शोर न हो, ऐसा भला कैसे हो सकता है? लेकिन इस बार चर्चा रन, रणनीति या प्लेइंग इलेवन की नहीं, बल्कि एक गेंदबाज के हाथ की है। पाकिस्तान के मिस्ट्री स्पिनर उस्मान तारिक का गेंद डालने से पहले ठहर जाना, यही ‘पॉज’ बहस का धुरी बन गया है। विश्लेषक, पूर्व खिलाड़ी, यूट्यूबर, कॉमेडियन, ट्रोल, सबके पास राय है, और हर राय में यकीन भी पूरा।
पॉज: चालाकी या कला?
तारिक गेंद डालने से पहले लोड-अप में एक पल के लिए स्थिर हो जाते हैं, बायां घुटना उठा हुआ, कोहनी मुड़ी हुई, अंगुलियां गेंद पर कसी हुईं। सवाल उठा कि क्या यह बल्लेबाज को भटकाने की कोशिश है?
लेकिन जिन लोगों ने बारीकी से देखा, वे मानते हैं कि यह हर गेंद पर एक जैसा है। यानी यह उनकी स्वाभाविक लय का हिस्सा है, न कि कोई अचानक पैदा की गई तरकीब। भारत के अनुभवी ऑफ स्पिनर रविचंद्रन अश्विन जैसे खिलाड़ियों का तर्क है कि जब बल्लेबाज क्रीज पर इधर-उधर नाच सकते हैं, स्टांस बदल सकते हैं, तो गेंदबाज़ के पास भी रफ्तार और लय से खेलने का हक होना चाहिए।
असली बवाल: कोहनी का ‘किंक’
पॉज से ज्यादा चर्चा तारिक की कोहनी पर है। उनका हाथ स्वाभाविक रूप से थोड़ा मुड़ा रहता है। खुद उनका कहना है कि उनके एल्बो जॉइंट में 'दो कोने' हैं। क्रिकेट की दुनिया में यह मुद्दा नया नहीं। श्रीलंका के महान स्पिनर मुथैया मुरलीधरन वर्षों तक इसी तरह की बहसों से गुजर चुके हैं। मेडिकल सबूतों ने बार-बार बताया कि उनका हाथ जन्मजात मुड़ा हुआ था, फिर भी शक खत्म नहीं हुआ।
लैब की परीक्षा: सिर्फ शक नहीं, विज्ञान
तारिक एक नहीं, कई बार आईसीसी से मान्यता प्राप्त बायोमैकेनिक्स टेस्ट पास कर चुके हैं। प्रक्रिया बेहद सख्त होती है, सेंसर लगाए जाते हैं, हाई-टेक कैमरे अलग-अलग कोणों से रिकॉर्ड करते हैं, मैच की फुटेज से तुलना होती है, स्पीड और स्पिन तक मिलाई जाती है। आईसीसी की सीमा साफ है, 15 डिग्री से ज्यादा सीधा होना अवैध माना जाएगा। तारिक इस कसौटी पर खरे उतरे हैं। यानी कागज पर, मशीन पर, और प्रक्रिया पर, वह क्लीन हैं।
लैब टेस्ट: प्रक्रिया एक नजर में
- गेंदबाज को तीन ओवर की वैध गेंदबाजी करनी होती है।
- कंधे, बांह और धड़ पर बायोमैकेनिकल सेंसर लगाए जाते हैं।
- कई एंगल से विकोन मोशन-कैप्चर कैमरे हर मूवमेंट रिकॉर्ड करते हैं।
- इन तीन ओवरों में मैच में इस्तेमाल होने वाली हर विविधता डालना अनिवार्य होता है।
- मैच की असली फुटेज को लैब में डाली गई गेंदों से मिलाया जाता है, ताकि खिलाड़ी टेस्ट में अलग एक्शन न अपनाए।
- गेंद की स्पीड, रिवॉल्यूशन (स्पिन) और ट्रैजेक्टरी मापी जाती है, और इन्हें मैच जैसी तीव्रता से मेल खाना चाहिए।
- आईसीसी द्वारा नियुक्त वरिष्ठ कोच स्वतंत्र रूप से सत्यापित करता है कि गेंदबाज़ मुकाबले जैसी ही स्थिति में गेंदबाजी कर रहा है।
फिर भी शक क्यों?
यहीं खेल धारणा बनाम फिजिक्स का है। अजीब दिखने वाला एक्शन अक्सर ज्यादा शक पैदा करता है, जबकि पारंपरिक एक्शन पर सवाल कम उठते हैं। विज्ञान कहता है कि अलग दिखना और गलत होना एक ही बात नहीं। पाकिस्तान के कप्तान सलमान आगा ने साफ कहा, 'वह दो बार क्लियर हो चुका है और आईसीसी ने जो भी कहा, उसने सब किया। लोग क्यों बातें कर रहे हैं, मुझे नहीं पता, लेकिन मैं भरोसा दिलाता हूं कि उसे फर्क नहीं पड़ता। वह इस सबका आदी है।'
कहानी संघर्ष की भी
कम लोग याद रखते हैं कि तारिक का सफर कितना अलग रहा है। दुबई के एक होटल में सब्जियां काटने से लेकर अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट तक पहुंचना, यह सीधी रेखा नहीं, जिद और मौके पहचानने की कहानी है।
उन्होंने करियर के काफी देर से तेज गेंदबाजी छोड़ स्पिन अपनाई, और अपनी जगह खुद बनाई।
खुद तारिक का जवाब
आखिरकार उन्होंने भी आलोचकों को संदेश दिया। ब्रायन मर्गेट्रॉयड से बातचीत में उन्होंने कहा, 'जो भी इस पर टिप्पणी कर रहा है, उसे पहले क्रिकेट पढ़ना चाहिए, फिर आरोप लगाने चाहिए।' और फिर जोड़ा, 'अज्ञानता ज्ञान को मार सकती है।'
खेल से बड़ा शोर
सवाल यह नहीं कि तारिक की गेंद कितनी घूमेगी, बल्कि यह कि बहस कितनी घूमेगी। एक खिलाड़ी, जो टेस्ट में पास हो चुका है, वह फिर भी कटघरे में है, क्योंकि भारत-पाकिस्तान मैच को हमेशा एक अतिरिक्त मसाला चाहिए।