आईसीसी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डेव रिचर्डसन ने यह स्पष्ट कर दिया है कि खेल संचालन संस्था भारत को पाकिस्तान के खिलाफ द्विपक्षीय सीरीज खेलने के लिए मजबूर नहीं कर सकती।
लाहौर में मीडिया से बात करते हुए रिचर्डसन ने इस बात से भी इनकार किया कि आईसीसी का पाकिस्तान क्रिकेट की तुलना में भारत की तरफ अधिक झुकाव है। उन्होंने कहा, ‘भारत अगर पाकिस्तान के साथ खेलने के लिए तैयार नहीं है, तो हम उन्हें मजबूर नहीं कर सकते।'
रिचर्डसन ने कहा, आपको यह समझना होगा कि द्विपक्षीय सीरीज दो क्रिकेट बोर्डों के बीच आपसी समझौते से आयोजित की जाती हैं। हम भी चाहते हैं कि भारत और पाकिस्तान द्विपक्षीय सीरीज खेलें लेकिन उनके बीच राजनीतिक तनाव है और किसी भी तरह की क्रिकेट मौजूदा संबंधों पर निर्भर करता है।
रिचर्डसन ने कहा कि मौजूदा स्थिति में जल्द ही भारत और पाकिस्तान के बीच द्विपक्षीय संबंधों को फिर से शुरू करने की संभावना नहीं दिखाई दे रही है। उन्होंने कहा कि भारत आईसीसी को बहुत सारे व्यवसाय देता है लेकिन हमारी नजरों में सभी सदस्य राष्ट्र समान हैं।
हालांकि, उन्होंने जोर देते हुए कहा कि अगर आईसीसी के किसी इवेंट में भारत और पाकिस्तान एक ही समूह में हुए तो उन्हें एक दूसरे के खिलाफ जरूर खेलना होगा।
पीसीबी प्रमुख नजम सेठी ने मीडिया से कहा कि उन्होंने आईसीसी को भारत के खिलाफ पाकिस्तान के दावों पर गौर करने के लिए अन्य बोर्डों के तीन प्रतिनिधियों को नामांकित करने को कहा था। हम अपने मुआवजे के दावे के लिए एक सही और उचित तर्क चाहते हैं, हमारे वकील अब इस मामले को अंतिम रूप देने में लगे हैं।
इस दौरान रिचर्डसन ने वर्ल्ड इलेवन में किसी भारतीय खिलाड़ी के नहीं खेलने के बारे में भी बात की। उन्होंने कहा दौरे की संवेदनशीलता को देखते हुए पीसीबी के साथ मिलकर यह निर्णय लिया गया था कि कोच एंडी फ्लावर इस मामले में किसी भी भारतीय खिलाड़ी को प्रस्ताव नहीं भेजेंगे और न ही किसी भारतीय खिलाड़ी से मिलेंगे।