फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

VIDEO: अपनी बायोपिक का क्या नाम रखना चाहते हैं हरभजन सिंह? बताया- कौन सा बॉलीवुड हीरो निभा सकता है उनका किरदार

Thu, 13 Aug 2026 11:07 AM IST
स्वप्निल शशांक स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

पूर्व भारतीय क्रिकेटर हरभजन सिंह ने अपने क्रिकेट करियर, भविष्य की भूमिका और उस मुकाबले को लेकर खुलकर बात की जिसे वह दोबारा खेलना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि उनकी जिंदगी पर फिल्म बने तो विक्की कौशल उनका किरदार निभाएं। वहीं, उन्होंने क्रिकेट और खेल की सेवा को अपनी प्राथमिकता बताया।
विज्ञापन
हरभजन सिंह - फोटो : ANI
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

अगर हरभजन सिंह के क्रिकेट करियर पर बॉलीवुड फिल्म बने तो उसमें उनका किरदार कौन निभाएगा? इस सवाल का जवाब खुद हरभजन ने दिया है। पूर्व भारतीय ऑफ स्पिनर ने कहा कि उनकी जिंदगी पर फिल्म बने तो वह उसका नाम 'जज्बा' रखना चाहेंगे और अभिनेता विक्की कौशल को अपना किरदार निभाते देखना पसंद करेंगे।
विज्ञापन


हरभजन ने इसके पीछे की वजह भी बताई। उन्होंने कहा, 'अगर मेरे क्रिकेट करियर पर बॉलीवुड फिल्म बने तो मैं उसका नाम 'जज्बा' रखूंगा और चाहता हूं कि विक्की कौशल मेरा किरदार निभाएं। वह पंजाबी हैं, होशियारपुर से हैं और बहुत अच्छे अभिनेता हैं।' हरभजन के इस जवाब में उनके पंजाब कनेक्शन की झलक भी दिखाई दी। उन्होंने विक्की कौशल को अपने किरदार के लिए इसलिए पसंद किया क्योंकि दोनों की जड़ें पंजाब से जुड़ी हैं और विक्की को वह बेहतरीन अभिनेता मानते हैं।

विक्की कौशल - फोटो : सोशल मीडिया
क्रिकेट से जो मिला, उसे वापस देना चाहते हैं
क्रिकेट से संन्यास के बाद हरभजन राजनीति में सक्रिय हैं, लेकिन उन्होंने साफ किया कि खेल आज भी उनकी प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि भविष्य में उन्हें क्रिकेट से जुड़ी कोई भी जिम्मेदारी मिलती है तो वह उसे पूरी ईमानदारी से निभाना चाहेंगे। हरभजन ने कहा, 'मेरी जिंदगी में जो कुछ भी मेरी किस्मत में होगा, मुझे मिलेगा। लेकिन अगर जिंदगी में मुझे क्रिकेट या खेल के लिए कुछ करने का मौका मिलता है तो मैं बहुत खुश होऊंगा। मेरी इच्छा है कि मैं किसी न किसी रूप में खेल की सेवा करूं और क्रिकेट को कुछ वापस दूं, जिसने मुझे इतना कुछ दिया है।' उन्होंने संभावित भूमिकाओं का जिक्र करते हुए कहा कि अगर उन्हें बीसीसीआई अध्यक्ष, चयनकर्ता या मुख्य कोच बनने का मौका मिलता है और वह भारतीय क्रिकेट की मदद कर सकते हैं तो वह इसके लिए तैयार रहेंगे।

हरभजन सिंह - फोटो : PTI
'मैं पारंपरिक अर्थों में राजनेता नहीं हूं'
हरभजन ने राजनीति में अपनी भूमिका को लेकर भी स्पष्टता दी। उन्होंने कहा कि वह पारंपरिक अर्थों में खुद को राजनेता नहीं मानते, बल्कि एक खिलाड़ी हैं जो राजनीति के मंच के जरिए खेल के लिए काम करना चाहता है। उन्होंने कहा, 'मैं पारंपरिक अर्थों में राजनेता नहीं हूं। मैं एक खिलाड़ी हूं, जो राजनेता बना है, लेकिन मेरा उद्देश्य इस मंच का इस्तेमाल भारतीय खेल में सुधार करने और उसके विकास में योगदान देने का है। मेरा लक्ष्य यही है। मेरी कोई व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा नहीं है कि मुझे यह बनना है या वह बनना है। अगर मैं भारत में खेलों के लिए योगदान दे पाऊं तो मैं खुद को भाग्यशाली मानूंगा।'
 

हरभजन सिंह - फोटो : ANI
2003 विश्व कप फाइनल को फिर खेलना चाहते हैं
हरभजन ने अपने करियर के उस मैच का भी खुलासा किया जिसे वह मिटाकर दोबारा खेलना चाहते हैं। उनके लिए यह मुकाबला 2003 वनडे विश्व कप का फाइनल है, जिसमें भारत को ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ हार का सामना करना पड़ा था। उन्होंने कहा, 'अगर मैं अपने करियर से एक मैच मिटाकर उसे दोबारा खेल सकता, तो वह 2003 विश्व कप का फाइनल होता, जो हम हार गए थे। मैं उस मैच को दोबारा खेलना बहुत पसंद करूंगा।' भारत ने 2003 विश्व कप के फाइनल में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 125 रन से हार झेली थी। हरभजन उस टूर्नामेंट में भारतीय टीम का अहम हिस्सा थे। वर्षों बाद भी उस हार की कसक उनके शब्दों में साफ नजर आई।
विज्ञापन

पत्नी से बहस में हार जाते हैं हरभजन, बताया क्यों?
क्रिकेट मैदान पर दुनिया के बड़े-बड़े बल्लेबाजों को अपनी फिरकी में फंसाने वाले हरभजन सिंह के लिए घर में मुकाबला थोड़ा अलग है। पूर्व भारतीय ऑफ स्पिनर ने बताया कि वह अपनी पत्नी से बहस जीतने में सफल नहीं हो पाते। हालांकि, हरभजन के मुताबिक, हर बहस जीतना जरूरी भी नहीं होता और कभी-कभी रिश्ते को बचाने के लिए हार जाना ही असली जीत होती है।
 
  • हरभजन ने अपने अनुभव को मजेदार अंदाज में साझा करते हुए कहा, 'कई साल तक बल्लेबाजों को आउट करने की कोशिश करने के बाद भी जिस व्यक्ति से मैं बहस नहीं जीत सकता, वह मेरी पत्नी हैं। वह मुश्किल नहीं हैं, लेकिन कभी-कभी आप जीतकर हारते हैं और हारकर जीत जाते हैं।'
  • हरभजन ने कहा, 'मैं गुरु गोपाल का पॉडकास्ट सुन रहा था और उन्होंने कहा कि कभी-कभी आपको बहस हार जानी चाहिए। जो व्यक्ति हारता है, असल में वही जीतता है। रिश्ते को बचाने के लिए कभी-कभी बहस हार जाना बहुत जरूरी है। मुझे यह बहुत गहरी बात लगी और मैं इससे पूरी तरह सहमत हूं।'
  • उन्होंने कहा, 'यह जरूरी नहीं कि बात किसी लड़ाई की हो। कभी-कभी सिर्फ इतना होता है कि दो लोगों के नजरिए अलग होते हैं और किसी चीज को देखने का उनका तरीका अलग होता है। कई बार आपको दूसरे व्यक्ति से अच्छी सलाह भी मिलती है, क्योंकि जो आप कहते हैं या जो आप देखते हैं, वह हमेशा पूरी सच्चाई नहीं हो सकती।'
  • भज्जी ने कहा, 'कभी-कभी सच्चाई कड़वी हो सकती है और इसी वजह से मुझे लगता है कि बहस को छोड़ देना और हार मान लेना बेहतर है। इसमें कोई बुराई नहीं है।' हरभजन ने कहा, 'मैं यह नहीं कहूंगा कि मैं क्रिकेट के मैदान पर कभी डरा या घबराया था। लेकिन एक बात पक्की है, मेरे बच्चे मुझे निश्चित तौर पर आउट कर सकते हैं। उनके लिए मैं कुछ भी करूंगा।'
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें