भारतीय क्रिकेट टीम के मौजूदा हेड कोच गौतम गंभीर बुधवार को अपना 45वां जन्मदिन मना रहे हैं। बतौर खिलाड़ी गंभीर की पहचान उन बल्लेबाजों में रही, जो बड़े मुकाबलों में टीम के लिए खड़े होते थे। टी20 विश्व कप 2007 के फाइनल में पाकिस्तान के खिलाफ 75 रन और वनडे विश्व कप 2011 के फाइनल में श्रीलंका के खिलाफ 97 रन की पारियां उनकी सबसे यादगार उपलब्धियों में शामिल हैं। हालांकि, टेस्ट क्रिकेट में खेली गई उनकी 137 रन की एक पारी भी उतनी ही खास है। न्यूजीलैंड के नेपियर में 2009 में गंभीर ने 436 गेंदों का सामना करते हुए भारत को हार से बचाने में अहम भूमिका निभाई थी।
गौतम गंभीर
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जब भारत पर मंडरा रहा था हार का खतरा
नेपियर में खेले गए टेस्ट में न्यूजीलैंड ने पहली पारी में नौ विकेट पर 619 रन बनाकर पारी घोषित की थी। जवाब में भारतीय टीम 305 रन पर सिमट गई और उसे फॉलोऑन खेलने के लिए मजबूर होना पड़ा। भारत के सामने दूसरी पारी में बड़ा लक्ष्य खड़ा करने के बजाय सबसे पहले हार टालने की चुनौती थी। दूसरी पारी में वीरेंद्र सहवाग और गौतम गंभीर ने पारी की शुरुआत की। सहवाग 22 रन बनाकर आउट हो गए, लेकिन गंभीर ने एक छोर संभाले रखा। उन्होंने राहुल द्रविड़ के साथ दूसरे विकेट के लिए 133 रन जोड़े। दोनों ने इस साझेदारी के दौरान 376 गेंदें खेलीं। द्रविड़ ने 62 रन बनाए।
गौतम गंभीर और युवराज सिंह
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द्रविड़, सचिन और लक्ष्मण के साथ दीवार बने गंभीर
द्रविड़ के आउट होने के बाद गंभीर को सचिन तेंदुलकर का साथ मिला। दोनों ने तीसरे विकेट के लिए 97 रन जोड़े और इस दौरान 191 गेंदें खेलीं। सचिन ने 64 रन का योगदान दिया। इसके बाद गंभीर और वीवीएस लक्ष्मण ने चौथे विकेट के लिए 96 रन की साझेदारी की। दोनों ने 289 गेंदों तक न्यूजीलैंड के गेंदबाजों को विकेट के लिए तरसाया। गंभीर ने 436 गेंदों पर 137 रन बनाए। उनकी पारी में धैर्य, एकाग्रता और विकेट पर टिके रहने की क्षमता का शानदार उदाहरण देखने को मिला।
गंभीर के आउट होने के बाद भी भारत की चुनौती खत्म नहीं हुई थी। लक्ष्मण और युवराज सिंह ने मोर्चा संभाला। लक्ष्मण 212 गेंदों पर नाबाद 124 रन बनाकर लौटे, जबकि युवराज ने 63 गेंदों पर नाबाद 54 रन बनाए। दोनों ने बाकी समय निकालकर भारत की हार टाल दी। मैच समाप्त होने पर भारत का स्कोर दूसरी पारी में चार विकेट पर 476 रन था।
गौतम गंभीर
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643 मिनट की बल्लेबाजी, जिसने बचाया टेस्ट
इस मुकाबले में द्रविड़, सचिन, लक्ष्मण और युवराज ने भी अहम योगदान दिया, लेकिन गंभीर की पारी भारत को मैच में बनाए रखने की सबसे बड़ी वजहों में शामिल रही। उन्होंने क्रीज पर 643 मिनट बिताए और 436 गेंदों का सामना किया। यह सिर्फ शतक नहीं था, बल्कि मुश्किल परिस्थिति में टीम की जरूरत के मुताबिक बल्लेबाजी करने की मिसाल भी थी। विश्व कप फाइनल की पारियों ने गंभीर को भारतीय क्रिकेट के यादगार चेहरों में शामिल किया, लेकिन नेपियर में उनकी 137 रन की पारी ने दिखाया कि वह टेस्ट क्रिकेट में भी लंबे समय तक संघर्ष करने और दबाव झेलने में सक्षम थे।
गौतम गंभीर
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ऐसा रहा गंभीर का अंतरराष्ट्रीय करियर
गौतम गंभीर ने 2003 से 2016 के बीच भारत के लिए 58 टेस्ट, 147 वनडे और 37 टी20 अंतरराष्ट्रीय मैच खेले। टेस्ट में उन्होंने नौ शतक और 22 अर्धशतकों की मदद से 4,154 रन बनाए। वनडे में उनके नाम 11 शतक और 34 अर्धशतकों के साथ 5,238 रन दर्ज हैं। टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में उन्होंने सात अर्धशतकों की मदद से 932 रन बनाए। गंभीर ने 2018 में क्रिकेट से संन्यास लिया। खिलाड़ी के रूप में उन्होंने भारत को 2007 टी20 विश्व कप और 2011 वनडे विश्व कप जिताने में अहम भूमिका निभाई। दोनों विश्व कप फाइनल में उनकी पारियां आज भी भारतीय क्रिकेट की यादगार पारियों में गिनी जाती हैं।
गौतम गंभीर
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कोच के रूप में दूसरी पारी
गंभीर अब भारतीय क्रिकेट में कोच के रूप में अपनी दूसरी पारी खेल रहे हैं। वह नौ जुलाई 2024 को भारतीय टीम के हेड कोच बने थे। उनके कार्यकाल में भारत ने आईसीसी चैंपियंस ट्रॉफी 2025 और टी20 विश्व कप 2026 का खिताब जीता। उनका मौजूदा कार्यकाल वनडे विश्व कप 2027 तक है। 14 अक्तूबर 1981 को दिल्ली में जन्मे गंभीर के करियर में विश्व कप फाइनल के अहम रन और नेपियर की संघर्षपूर्ण पारी, दोनों की अपनी खास जगह है। एक ने भारत को विश्व चैंपियन बनाने में मदद की, तो दूसरी ने मुश्किल हालात में टेस्ट मैच बचाने का रास्ता दिखाया।