दलीप ट्रॉफी में ईस्ट जोन और नॉर्थ ईस्ट जोन के बीच क्वार्टर फाइनल मुकाबला जारी है। बंगलूरू के सीओई में खेले जा रहे इस मुकाबले में भले ही वैभव सूर्यवंशी बल्लेबाजी में कोई कमाल न दिखा पाए हों, लेकिन गेंदबाजी में उनका जलवा जारी है। ईस्ट जोन से खेल रहे वैभव ने नॉर्थ ईस्ट जोन की दूसरी पारी में महज चार गेंदों में दो विकेट झटके। उन्होंने तीन ओवर का स्पेल डाला, जिसमें 11 रन खर्च किए और दो विकेट लिए।
पहली पारी में वैभव ने नहीं की गेंदबाजी
दरअसल, मैच में ईस्ट जोन ने पहले बल्लेबाजी करते हुए अपनी पहली पारी में 467 रन बनाए थे। वैभव छह गेंद में दो चौके की मदद से आठ रन बना पाए थे। इसके बाद उनकी आलोचना भी हुई थी और सवाल भी उठे थे कि क्या वह रेड बॉल क्रिकेट के लायक हैं। हालांकि, ईस्ट जोन ने कुमार कुशाग्र के 55 रन, सुदीप कुमार घरामी के 146 रन और शाहबाज अहमद के 167 रन की बदौलत पहाड़ जैसा स्कोर खड़ा किया। जवाब में नॉर्थ ईस्ट जोन की पहली पारी 111 रन पर सिमट गई। इस तरह उन्हें फॉलो ऑन खेलने पर मजबूर होना पड़ा। पहली पारी में वैभव ने गेंदबाजी नहीं की।
दूसरी पारी में दो विकेट झटके और चौंकाया
- हालांकि, फॉलोऑन खेलते हुए भी नॉर्थ ईस्ट जोन ने एक वक्त 102 रन बनाने में आठ विकेट गंवा दिए थे। इनमें दो विकेट वैभव ने लिए। उन्होंने अपने दूसरे ओवर की दूसरी गेंद पर मध्यक्रम के बल्लेबाज किशन लिंगडोह को आउट किया। किशन अच्छी बल्लेबाजी कर रहे थे और 40 गेंद में दो चौके और एक छक्के की मदद से 25 रन बना लिए थे। वैभव ने उन्हें कैच आउट कराया।
- फिर ओवर की पांचवीं गेंद पर लोअर ऑर्डर के बल्लेबाज इमलीवाती लेमतुर को ईशान किशन के हाथों कैच कराया। इमलीवाती चार रन बना सके। वैभव एक लेफ्ट आर्म ऑर्थोडॉक्स स्पिनर हैं। हालांकि, उनकी गेंद नॉर्थ ईस्ट जोन के बल्लेबाजों को समझ नहीं आई।
- फॉलो ऑन खेलते हुए नॉर्थ ईस्ट जोन की पूरी टीम 146 रन पर सिमट गई और ईस्ट जोन ने मुकाबला पारी और 210 रन से अपने नाम किया। वैभव के अलावा अनुकूल रॉय ने पांच विकेट लिए। वहीं, मुकेश कुमार, अभिजीत सरकार और शाहबाज को एक-एक विकेट मिला।
सूर्यवंशी ने छोड़ी अपनी छाप
दलीप ट्रॉफी में सूर्यवंशी की एंट्री नए सीजन की शुरुआत के साथ हुई है। युवा खिलाड़ी ने टी20 क्रिकेट की तेज-तर्रार मांगों से अब लंबे प्रारूप की चुनौती का रुख किया है। उन्हें ईस्ट जोन का उपकप्तान भी बनाया गया है। हालांकि, उनकी उम्र और प्रथम श्रेणी क्रिकेट में सीमित अनुभव को देखते हुए यह फैसला कुछ लोगों के लिए हैरानी भरा भी था।
बल्ले से नहीं चला कमाल, गेंद से दिया जवाब
मैच में सूर्यवंशी बल्ले से ज्यादा प्रभाव नहीं छोड़ सके। हालांकि, उन्होंने जल्द ही गेंदबाजी से इसकी भरपाई कर दी। किशोर खिलाड़ी ने अपनी गेंदबाजी से दिखाया कि उनकी क्रिकेटिंग क्षमता सिर्फ आक्रामक बल्लेबाजी तक सीमित नहीं है। सूर्यवंशी पहले ही अपनी विस्फोटक बल्लेबाजी और गेंदबाजों पर आक्रमण करने की क्षमता के लिए सुर्खियां बटोर चुके हैं, लेकिन दलीप ट्रॉफी में उनकी गेंदबाजी ने यह संकेत दिया कि जरूरत पड़ने पर वह गेंद से भी टीम के लिए योगदान दे सकते हैं। अभी यह देखना बाकी है कि गेंदबाजी उनके खेल का नियमित हिस्सा बनती है या नहीं, लेकिन एक ओवर में दो विकेट ने निश्चित रूप से यह याद दिला दिया कि सूर्यवंशी के क्रिकेट में उनकी विस्फोटक बल्लेबाजी के अलावा भी काफी कुछ है।