छह 'R' का अनूठा फ्रेमवर्क
इस नई पॉलिसी के तहत छह 'R' के एक विशेष फ्रेमवर्क की रूपरेखा तैयार की गई है: रेडी, रिव्यू, रिस्टोर, रीकंडीशन, रिटर्न और रिफाइन। यह ढांचा फीफा के चरणबद्ध कार्यक्रम जैसा ही है, जो खिलाड़ियों के साथ-साथ उनके प्रबंधकों को भी शामिल करता है। डॉ. इंगे ने बताया कि कई सदस्य देशों के आग्रह पर बीते एक साल से इस नीति पर गहन विचार-विमर्श चल रहा था। इसके बाद सभी देशों की मेडिकल टीमों से फीडबैक लेकर इसे अंतिम रूप दिया गया।
डॉ. फिलिपा इंगे ने कहा "यह गाइडलाइंस इतनी लचीली हैं कि सदस्य देश इसे अपने माहौल के अनुसार ढाल सकते हैं। इससे एथलीटों को एक ऐसा भरोसा मिलेगा कि वे बच्चा पैदा करने के साथ-साथ क्रिकेट करियर को भी जारी रख सकती हैं।"
व्यावहारिक और मानसिक चुनौतियां सबसे बड़ी रुकावट
डॉ. इंगे के अनुसार, इस पूरी प्रक्रिया में शारीरिक सीमाओं से कहीं ज्यादा लॉजिस्टिक्स (तैयारियों) और मानसिक स्थिति को संभालना सबसे बड़ी चुनौती थी। जब उन्होंने महिला क्रिकेटरों से बात की, तो उनके सामने कई तरह के सवाल आए। जैसे- मैदान पर स्तनपान कैसे कराया जाएगा? मां बनने के बाद शरीर में ऊर्जा का स्तर बनाए रखने के लिए कैसा आहार होना चाहिए? यात्रा (ट्रेवल) के दौरान क्या व्यवस्थाएं होंगी? और सबसे महत्वपूर्ण बात यह कि इस विषय पर अपने संबंधित क्रिकेट बोर्ड से बातचीत की शुरुआत कैसे की जाए।
इसके अलावा, प्रेग्नेंसी के लंबे ब्रेक के बाद खिलाड़ियों के भीतर प्रदर्शन को लेकर भी एक मनोवैज्ञानिक लड़ाई चलती है। डॉ. इंगे ने उम्मीद जताई कि यदि सदस्य देशों के कोचिंग स्टाफ में खेल मनोवैज्ञानिक उपलब्ध होंगे, तो वे खिलाड़ियों को इस मानसिक तनाव से उबारने और उनके प्रदर्शन को फिर से शीर्ष पर ले जाने में बड़ी भूमिका निभा सकते हैं।