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21 साल पुराना किस्सा: क्रिकेट में पहली बार कब और क्यों दिखाया गया था रेड कार्ड? इस महान गेंदबाज को मिली थी सजा

Thu, 15 Oct 2026 06:28 AM IST
स्वप्निल शशांक स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

क्रिकेट में रेड कार्ड की कोई आधिकारिक अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था नहीं है, लेकिन 17 फरवरी 2005 को ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड के बीच पहले टी20 अंतरराष्ट्रीय मैच में अंपायर बिली बोडेन ने ग्लेन मैक्ग्रा को रेड कार्ड दिखाया था। मैक्ग्रा ने काइल मिल्स के सामने अंडरआर्म गेंद फेंकी थी। यह क्रिकेट इतिहास की सबसे अनोखी घटनाओं में शामिल है।
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अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में भी मिल चुका है रेड कार्ड - फोटो : Twitter
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विस्तार
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क्रिकेट को आमतौर पर जेंटलमेंस गेम कहा जाता है, जहां खेल भावना और नियमों का पालन सबसे अहम माना जाता है। मैदान पर खिलाड़ियों को अनुशासन में रखने के लिए अंपायर कई तरह के फैसले लेते हैं। आपने फुटबॉल में खिलाड़ियों को रेड कार्ड मिलने के बारे में तो सुना होगा, लेकिन क्या आपको पता है कि क्रिकेट के मैदान पर भी एक गेंदबाज को रेड कार्ड दिखाया जा चुका है? ऑस्ट्रेलिया के दिग्गज तेज गेंदबाज ग्लेन मैक्ग्रा के नाम यह अनोखा रिकॉर्ड दर्ज है। हालांकि, यह घटना किसी गंभीर अनुशासनहीनता के कारण नहीं, बल्कि एक मजाकिया अंदाज में फेंकी गई गेंद की वजह से हुई थी।
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21 साल पहले पहले टी20 अंतरराष्ट्रीय मैच में हुई थी घटना
यह घटना 17 फरवरी 2005 की है, जब ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड के बीच ऑकलैंड में क्रिकेट इतिहास का पहला टी20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबला खेला गया था। क्रिकेट के इस नए प्रारूप के शुरुआती दौर में खेले गए इस मैच में एक ऐसा पल आया, जो आज भी खेल के सबसे अनोखे किस्सों में गिना जाता है।

मैच के दौरान ऑस्ट्रेलिया के तेज गेंदबाज ग्लेन मैक्ग्रा ने न्यूजीलैंड के बल्लेबाज काइल मिल्स के सामने अंडरआर्म गेंद फेंक दी। मैक्ग्रा ने गेंद फेंकने से पहले ऑस्ट्रेलियाई कप्तान रिकी पोंटिंग और अंपायर से बातचीत भी की थी। इसके बाद उन्होंने अपने गेंदबाजी एक्शन में बदलाव करते हुए गेंद को हाथ से नीचे की ओर लुढ़का दिया।

मैक्ग्रा की इस हरकत ने मैदान पर मौजूद लोगों का ध्यान खींचा। हालांकि, न्यूजीलैंड के बल्लेबाज काइल मिल्स इससे प्रभावित नहीं दिखे। मैदानी अंपायर बिली बोडेन ने भी इस पर अपने खास अंदाज में प्रतिक्रिया दी। उन्होंने अपनी जेब से रेड कार्ड निकाला और मैक्ग्रा को दिखा दिया। क्रिकेट के मैदान पर रेड कार्ड दिखाए जाने का यह दृश्य इतना अनोखा था कि मैक्ग्रा का नाम इस घटना के साथ जुड़ गया। उन्हें अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में रेड कार्ड पाने वाला इकलौता खिलाड़ी माना जाता है।
 
 

क्या क्रिकेट में रेड कार्ड मिलने पर खिलाड़ी को बाहर कर दिया जाता है?
फुटबॉल में रेड कार्ड मिलने का मतलब होता है कि खिलाड़ी को मैदान से बाहर जाना होगा, लेकिन अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में फुटबॉल की तरह खिलाड़ियों को बाहर करने के लिए रेड कार्ड की कोई आधिकारिक व्यवस्था नहीं है। मैक्ग्रा को दिखाया गया कार्ड भी क्रिकेट के नियमों के तहत किसी खिलाड़ी को मैच से बाहर करने की सजा नहीं था। यह उस घटना में अंपायर की ओर से दिया गया एक मजाकिया और यादगार संकेत था। इसलिए मैक्ग्रा के मामले को क्रिकेट में रेड कार्ड दिखाए जाने की अनोखी घटना के तौर पर याद किया जाता है, न कि अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में लागू किसी औपचारिक रेड कार्ड नियम के उदाहरण के रूप में।

अंडरआर्म गेंदबाजी पर क्यों हुआ था विवाद?
अंडरआर्म गेंदबाजी का जिक्र आते ही क्रिकेट प्रेमियों को 1981 का वह विवाद याद आता है, जिसने ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड के बीच खेले गए मुकाबले को इतिहास के सबसे चर्चित क्रिकेट प्रसंगों में शामिल कर दिया। तब ऑस्ट्रेलिया के कप्तान ग्रेग चैपल ने अपने छोटे भाई ट्रेवर चैपल को मैच की आखिरी गेंद अंडरआर्म फेंकने का निर्देश दिया था। न्यूजीलैंड को मुकाबला टाई करने के लिए उस गेंद पर छह रन की जरूरत थी।

अंडरआर्म गेंद फेंके जाने के कारण बल्लेबाज के लिए छक्का लगाना बेहद मुश्किल हो गया था। इस घटना ने खेल भावना और नियमों के इस्तेमाल को लेकर बड़ा विवाद खड़ा कर दिया था। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अंडरआर्म गेंदबाजी प्रतिबंधित है। इसी वजह से 2005 में मैक्ग्रा का ऐसा करना भी क्रिकेट के इतिहास की उस पुरानी घटना की याद दिलाता है। हालांकि, मैक्ग्रा के मामले में यह प्रसंग हल्के-फुल्के अंदाज में सामने आया था।
 
 

मैक्ग्रा ने बाद में रेड कार्ड के विचार का समर्थन किया
दिलचस्प बात यह है कि रेड कार्ड की इस घटना के करीब एक दशक बाद ग्लेन मैक्ग्रा ने क्रिकेट में रेड कार्ड की व्यवस्था शुरू करने के विचार का समर्थन किया था। मैरीलेबोन क्रिकेट क्लब (एमसीसी), जो क्रिकेट के नियमों का संरक्षक है, ने मैदान पर अनुशासन के बेहद गंभीर उल्लंघन के मामलों में अंपायरों को खिलाड़ियों को मैदान से बाहर भेजने का अधिकार देने की सिफारिश की थी। मैक्ग्रा ने इस विचार के समर्थन में अपनी राय दी थी।

मैक्ग्रा ने यह भी माना था कि उनके करियर में कुछ ऐसे गंभीर मौके आए थे, जब रेड कार्ड जैसी सजा का डर उन्हें अपना व्यवहार नियंत्रित करने के लिए मजबूर कर सकता था। यह उनके उस रुख को दिखाता है कि खेल में अनुशासन बनाए रखने के लिए कड़े कदमों की जरूरत पड़ सकती है। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में फुटबॉल की तरह रेड कार्ड दिखाकर खिलाड़ियों को बाहर करने का नियम लागू नहीं किया है। यानी मैक्ग्रा की घटना के बावजूद क्रिकेट के अंतरराष्ट्रीय नियमों में रेड कार्ड की औपचारिक व्यवस्था नहीं है।
 

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फ्रेंचाइजी क्रिकेट में भी दिख चुका है रेड कार्ड
अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में रेड कार्ड का औपचारिक नियम नहीं होने के बावजूद कुछ फ्रेंचाइजी लीग ने मैदान पर अनुशासन बनाए रखने के लिए इस तरह की व्यवस्था अपनाई है। कैरेबियन प्रीमियर लीग (सीपीएल) में सुनील नरेन रेड कार्ड पाने वाले पहले क्रिकेटर बने थे। वह त्रिनबागो नाइट राइडर्स की ओर से खेलते हैं। यह घटना दिखाती है कि क्रिकेट के कुछ प्रारूपों और लीगों में मैदान पर अनुशासन को लेकर अलग व्यवस्थाएं अपनाई गई हैं। इस तरह ग्लेन मैक्ग्रा से जुड़ी 2005 की घटना क्रिकेट इतिहास का एक दिलचस्प किस्सा बन गई। जिस खेल में रेड कार्ड की कोई आधिकारिक अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था नहीं है, उसी खेल के पहले टी20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबले में एक दिग्गज गेंदबाज को यह कार्ड दिखाया गया था।
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