स्कॉटलैंड और नीदरलैंड की टीम ने सवाल खड़े किए हैं
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अगले साल दक्षिण अफ्रीका, जिम्बाब्वे और नामीबिया की मेजबानी में होने वाले आईसीसी पुरुष वनडे विश्व कप के प्रारूप में किए गए बदलावों को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। क्रिकेट स्कॉटलैंड और रॉयल डच क्रिकेट संघ (केएनसीबी) ने सोमवार को इन बदलावों की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि इससे अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट की निष्पक्षता, पारदर्शिता और विश्वसनीयता कमजोर होने का खतरा है। दोनों क्रिकेट बोर्ड ने न केवल नए प्रारूप के प्रभाव पर सवाल उठाए हैं, बल्कि यह भी पूछा है कि इतने बड़े बदलाव किस प्रक्रिया के तहत और किस तरह लागू किए गए।
क्या है 2027 विश्व कप का नया प्रारूप?
नए प्रारूप के तहत 2027 वनडे विश्व कप में कुल 14 टीमें हिस्सा लेंगी। हालांकि, रैंकिंग में 12वें, 13वें और 14वें स्थान पर रहने वाली टीमों के बीच पहले एक क्वालीफाइंग चरण खेला जाएगा। इसमें केवल एक टीम मुख्य प्रतियोगिता में जगह बना पाएगी। इसके बाद मुख्य टूर्नामेंट में 12 टीमों को छह-छह के दो ग्रुप में बांटा जाएगा। दोनों बोर्ड की सबसे बड़ी आपत्ति इसी बदलाव के समय और प्रक्रिया को लेकर है।
विश्व कप से 18 महीने पहले बदलाव पर सवाल
दक्षिण अफ्रीका, जिम्बाब्वे और नामीबिया में होने वाले विश्व कप में अब 18 महीने से भी कम समय बचा है। ऐसे में प्रारूप और क्वालीफिकेशन मार्ग में बड़े बदलाव किए जाने से क्रिकेट स्कॉटलैंड और केएनसीबी नाराज हैं। संयुक्त बयान में कहा गया, 'क्रिकेट स्कॉटलैंड और रॉयल डच क्रिकेट संघ आईसीसी द्वारा पुरुष 50 ओवर विश्व कप के क्वालीफिकेशन मार्ग और टूर्नामेंट प्रारूप में इतने बड़े बदलाव किए जाने से बेहद निराश हैं।' दोनों बोर्ड के मुताबिक, ये बदलाव एसोसिएट सदस्य देशों के क्रिकेट के लिए बड़ा झटका हैं और वैश्विक स्तर पर क्रिकेट के विस्तार के लिए हाल के वर्षों में किए गए प्रयासों को नुकसान पहुंचा सकते हैं।
'उभरते देशों को मौका कम करना गलत संदेश'
क्रिकेट स्कॉटलैंड और केएनसीबी ने कहा कि जब क्रिकेट नए देशों और नए दर्शकों तक पहुंचने की कोशिश कर रहा है, तब उभरते देशों के लिए बड़े टूर्नामेंट में पहुंचने के अवसर कम करना गलत संदेश देता है। संयुक्त बयान में कहा गया, 'ऐसे समय में जब क्रिकेट अपने दायरे का विस्तार करना, नए दर्शकों को जोड़ना और अंतरराष्ट्रीय खेल जगत में अपनी स्थिति मजबूत करना चाहता है, उभरते हुए देशों के लिए सार्थक मौकों को कम करना बिल्कुल गलत संदेश देता है।'
दोनों बोर्ड ने यह भी स्पष्ट किया कि वे आईसीसी और अन्य सदस्य देशों के साथ मिलकर वैश्विक क्रिकेट को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। हालांकि, उन्हें बदलावों के प्रभाव और इन्हें लागू करने की प्रक्रिया दोनों को लेकर गंभीर चिंता है।
प्रक्रिया को लेकर भी जताई नाराजगी
दोनों बोर्ड का कहना है कि किसी भी बड़े बदलाव से पहले एसोसिएट सदस्य देशों को पर्याप्त समय दिया जाना चाहिए था, ताकि वे इसके प्रभाव को समझ और उसका आकलन कर सकें। उन्होंने कहा, 'हम आईसीसी और अन्य सदस्य देशों के साथ मिलकर वैश्विक क्रिकेट को मजबूत करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं। लेकिन इन बदलावों के प्रभाव और इन्हें लागू करने की प्रक्रिया, दोनों को लेकर हमारी गंभीर चिंताएं हैं।' बोर्ड ने मजबूत प्रशासन, पारदर्शी निर्णय प्रक्रिया और सदस्य देशों के साथ प्रभावी संवाद की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
आईसीसी से जवाब नहीं मिलने पर नाराजगी
क्रिकेट स्कॉटलैंड और केएनसीबी ने बताया कि बदलावों की घोषणा के बाद उन्होंने अन्य एसोसिएट सदस्य देशों के साथ मिलकर आईसीसी के साथ दो बैठकें कीं। इन बैठकों में बदलावों से जुड़ी आधिकारिक लिखित जानकारी और पूरी प्रक्रिया को लेकर स्पष्टीकरण मांगा गया। इसके अलावा भविष्य में परिचालन संबंधी फैसलों को बेहतर बनाने और पूर्ण सदस्य देशों के साथ होने वाली द्विपक्षीय योजना बैठकों में एसोसिएट सदस्यों को शामिल करने का अनुरोध भी किया गया।
हालांकि, दोनों बोर्ड के अनुसार दूसरी बैठक के दो सप्ताह से अधिक समय बाद भी आईसीसी की ओर से कोई जवाब नहीं मिला है। संयुक्त बयान में कहा गया, 'दूसरी बैठक के दो सप्ताह से अधिक समय बीत जाने के बावजूद आईसीसी की ओर से कोई जवाब नहीं मिला है। हमारे द्वारा उठाए गए गंभीर मुद्दों के प्रति यह निराशाजनक और अनादरपूर्ण रवैया है।'
आईसीसी से दोबारा बातचीत की अपील
- क्रिकेट स्कॉटलैंड और केएनसीबी ने अंत में आईसीसी से एसोसिएट सदस्य देशों के साथ दोबारा संवाद शुरू करने की अपील की है। दोनों बोर्ड चाहते हैं कि सभी सदस्य देशों के साथ खुले और पारदर्शी तरीके से चर्चा हो तथा वैश्विक क्रिकेट के दीर्घकालिक हितों को प्राथमिकता दी जाए।
- संयुक्त बयान में कहा गया, 'हम आईसीसी से आग्रह करते हैं कि वह एसोसिएट सदस्यों के साथ दोबारा बातचीत करे और सभी सदस्य देशों के साथ खुले एवं पारदर्शी तरीके से चर्चा करते हुए वैश्विक क्रिकेट के दीर्घकालिक हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता दे।'