टीम इंडिया और क्रिकेट बोर्ड की रईसी का अंदाजा हम सभी को है। लेकिन हर मुल्क में क्रिकेट जगत इतना पैसा नहीं रखता। यह मुल्क ऐसा है, जहां के क्रिकेटर होटल में खाना खाने लायक पैसा नहीं रखते।
जिम्बाब्वे बोर्ड पैसों की कमी से जूझ रहा है। पैसों की इतनी दिक्कत है कि बोर्ड के पास जिम्बाब्वे टीम को होटल में खाना खिलाने तक के पैसे नहीं हैं।
पिछले हफ्ते जिम्बाब्वे पर सीरीज में 3-0 की बढ़त के बाद टीम इंडिया जीत का जश्न मनाने के लिए हरारे स्पोर्ट्स क्लब से जल्द ही होटल के लिए चली गई।
लेकिन जिम्बाब्वे के खिलाड़ी जल्दी में नहीं थे क्योंकि उनके खाने का इंतजाम स्टेडियम में ही किया गया था।
इंडियन एक्सप्रेस की खबर के अनुसार जिम्बाब्वे बोर्ड अपने खिलाड़ियों के लिए होटल में तीन समय के खाने और होटल तक ट्रांसपोर्ट की व्यवस्था भी नहीं कर पा रहा है।
पब्लिक ट्रांसपोर्ट से गए होटल
जिम्बाब्वे बोर्ड की माली हालत ऐसी है कि जिम्बाब्वे के खिलाडियों को होटल तक पहुंचने के लिए पब्लिक ट्रांसपोर्ट का इस्तेमाल करना पड़ रहा है।
जिम्बाब्वे क्रिकेट बोर्ड की खराब आर्थिक स्थिति किसी से छिपी नहीं है लेकिन वह खिलाड़ियों को होटल में नाश्ता, दिन और रात का खाना भी उपलब्ध नहीं करा पा रहा।
पिछले दो मैचों के लिए बुलावायो में जिम्बाब्वे की टीम होटल में ठहरी थी लेकिन उसे दिन में तीन बार खाने के लिए स्टेडियम जाना पड़ रहा था।
खतरे में टीम का अस्तित्व
टीम के बल्लेबाजी कोच ग्रैंट फ्लावर मानते हैं कि जिम्बाब्वे का क्रिकेट खतरे में है और हम संघर्ष कर रहे हैं। मैं नहीं जानता की हम कब तक इस बुरे दौर से बाहर आएंगे।
ग्रैंट कहते हैं कि जिम्बाब्वे बोर्ड बड़े कर्ज में डूबा हुआ है। अगर ऐसा ही चलता रहा तो हम अपनी पहचान खो देंगे।