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चहल का खुलासा, इस ऑस्ट्रेलियाई दिग्गज के VIDEO को देख सीखी लेग स्पिन की बारीकियां 

Thu, 07 Jan 2021 07:22 PM IST
मुकेश कुमार झा स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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युजवेंद्र चहल - फोटो : social Media
टीम इंडिया के स्टार लेग स्पिनर युजवेंद्र चहल ऑस्ट्रेलिया के पूर्व दिग्गज गेंदबाज शेन वॉर्न को अपना आदर्श मानते हैं। चहल ने कहा कि इस ऑस्ट्रेलियाई दिग्गज ने ही उन्हें लेग स्पिन करने के लिए प्रेरित किया। चहल का कहना है कि उन्होंने शेन वॉर्न के वीडियो को देख लेग स्पिन की बारीकियां सीखी।

 
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Yuzvendra Chahal - फोटो : सोशल मीडिया
30 साल के चहल ने कहा कि मैंने उनके वीडियो को देखकर लेग स्पिन की ABCD सीखी। जब मैंने उनके वीडियो को देखना शुरू किया, तब मुझे एहसाल हुआ कि लेग स्पिन है क्या। मैं उन्हें अपना आदर्श मानता हूं। मैं उनकी तरह बनना चाहता था और उनकी तरह गेंदबाजी करना चाहता था। 
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शेन वॉर्न - फोटो : social Media
चहल ने आगे कहा कि मैं उनके सभी वीडियो को देखता था और उससे सीखता था। एक बार की बात है जब उनका नाम सुर्खियों और सभी अखबारों में था, तब मैं बहुत खुश हुआ था, ये सोचकर कि वो किस तरह बल्लेबाजों को फंसाते थे। इस दौरान चहल ने 1993 में एशेज सीरीज के दौरान शेन वॉर्न की जादुई गेंद का जिक्र किया। 

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युजवेंद्र चहल - फोटो : social Media
चहल ने कहा, वार्न के इस डिलीवरी का वीडियो विशेष रूप से देखता था। उन्होंने जिस तरह से इंग्लैंड के बल्लेबाज माइक गेटिंग बोल्ड किया, हर लेग स्पिनर की ड्रीम डिलीवरी होती है। मुझे लगता है कि मुझे भी एक बार एक बल्लेबाज को इस तरह आउट करना चाहिए। चहल ने बताया कि शेन वॉर्न जैसी बॉल ऑफ दे सेंचुरी फेंकना उनका सपना है। इसके बाद उन्होंने कहा कि मुझे जहां तक याद है कि न्यूजीलैंड दौरे के दौरान मैंने मार्टिन गुप्टिल का विकेट लिया था। मुझे लगता है कि यह मेरी विशेष डिलीवरी थी।
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Shane Warne
बता दें कि वॉर्न ने 1993 में एशेज सीरीज के दौरान उन्होंने ऐसी जादुई गेंद डाली, जिसे 'बॉल ऑफ द सेंचुरी' कहा गया। वह गेंद लगभग 90 डिग्री के कोण से घूमी थी, जिसे देखकर सभी दंग रह गए। उस गेंद ने वॉर्न की जिंदगी बदल कर रख दी थी।
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चहल
चहल ने यह भी बताया कि कैसे उन्होंने पिता की सलाह पर मीडियम पेसर से लेग स्पिनर बन गए। उन्होंने कहा स्कूल के दिनों में मैं मीडियम पेस गेंदबाजी करता था, लेकिन बाद में पिताजी ने कहा कि मध्यम गति के गेंदबाज को एक उचित शरीर की दरकार होती है और इसमें चोट लगने के भी डर होते हैं। इसके बाद पता नहीं मुझे क्या हुआ और मैंने तब से ही लेग स्पिन गेंदबाजी करना शुरू कर दिया। 
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