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बिना टीम में रहे युजवेंद्र चहल ने कैसे जिताया मैच, जानें कनकशन सब्स्टीट्यूट के बारे में सबकुछ

Sat, 05 Dec 2020 12:38 AM IST
मुकेश कुमार झा स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, कैनबरा
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- - फोटो : social media
ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ कैनबरा में खेले जा रहे पहले टी-20 मैच में रविंद्र जडेजा की जगह युजवेंद्र चहल ‘कनकशन सब्स्टीट्यूट’ खिलाड़ी के तौर पर उतरे। ऑस्ट्रेलिया के तेज गेंदबाज मिशेल स्टार्क की तेज गेंद रविंद्र जडेजा के सिर में लग गई, जिसके बाद चहल को 'कनकशन सब्स्टीट्यूट' (सिर में चोट लगने के कारण उसकी जगह मैदान पर उतरने वाला स्थानापन्न खिलाड़ी) के तौर पर उतारा गया।
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जडेजा हैमस्ट्रिंग से भी जूझ रहे हैं - फोटो : ट्विटर
बता दें कि अंतिम ओवर में स्टार्क की गेंद जडेजा को लगी। बल्लेबाजी पूरी होने के बाद उनको चेकअप के लिए बीसीसीआई की मेडिकल टीम ने रोक लिया। गेंद हेलमेट पर लगने के बाद पारी खत्म होते ही बीसीसीआई की मेडिकल टीम ने रविंद्र जडेजा का असेसमेंट करने के लिए उन्हें ड्रेसिंग रूम में ही रोक लिया और उनकी जगह युजवेंद्र चहल को बतौर सब्स्टीट्यूट मैदान पर फील्डिंग के लिए उतारा गया।




 
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रविंद्र जडेजा - फोटो : twitter@BCCI
जडेजा ने महज 23 गेंदों पर नाबाद 44 रन की पारी खेली। इस दौरान जडेजा के बल्ले से 5 चौके और एक छक्का आया। जडेजा की इस पारी के कारण ही भारतीय टीम ने ऑस्ट्रेलिया को 162 रनों का लक्ष्य दिया। चहल ने गेंदबाजी करते हुए चार ओवरों में 25 रन देकर तीन विकेट चटकाए। वहीं, लक्ष्य का पीछा करने उतरी ऑस्ट्रेलियाई टीम निर्धारित ओवरों में सात विकेट खोकर 150 रन ही बना सकी। इसी के साथ भारत पहला टी-20 11 रन से जीत गया। 

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रविंद्र जडेजा - फोटो : social media
क्या है कनकशन सब्स्टीट्यूट का नियम...
  • अगर कोई खिलाड़ी चोटिल होता है तो उसकी जगह दूसरा खिलाड़ी ले सकेगा। वह बल्लेबाजी, गेंदबाजी और विकेटकीपिंग भी कर सकता है।
  • कनकशन सब्स्टीट्यूट को मैदान पर उतारने का फैसला मैच रेफरी का होता है।
  • बल्लेबाज के चोटिल होने पर बल्लेबाज और तेज गेंदबाज चोटिल होता है तो उसकी जगह तेज गेंदबाज को शामिल किया जाता है।
  • दोनों टीमों के पास एक-एक कनकशन सब्स्टीट्यूट का अधिकार होगा।
  • अगर मेडिकल स्टाफ या डॉक्टर को लगता है कि प्लेयर के सिर में चोट गंभीर है तो उन्हें या उसे मैच रैफरी को यह बात बतानी होगी, तब जाकर उस चोटिल बल्लेबाज के सब्स्टीट्यूट को मैदान पर उतरने की अनुमति मिलेगी।
  • जिस चोटिल खिलाड़ी के बदले मैदान पर सब्स्टीट्यूट को उतारा गया है, उसे तब तक दोबारा मैदान पर उतरने की मंजूरी नहीं मिलेगी, जबतक डॉक्टर हरी झंडी न दे दे।
  • अगर किसी प्लेयर को सिर में चोट लगी है और वह मैदान से बाहर गया है तो फिर वह उसी दिन मैदान पर नहीं उतर सकता।
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भारत बनाम ऑस्ट्रेलिया - फोटो : twitter@ICC
कब हुई थी इस नियम की चर्चा पहली बार?
ऑस्ट्रेलिया के पूर्व ओपनर फिलिप ह्यूज के निधन के बाद इस नियम को लेकर चर्चाएं शुरू हो गई थीं। ह्यूज को 2014 में शेफील्ड शील्ड टूर्नामेंट के एक मैच में सिर पर बाउंसर लगी थी। इसके बाद ह्यूज को अस्पताल ले जाया गया था, लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका था।
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ऑस्ट्रेलिया बनाम भारत - फोटो : social media
ऑस्ट्रेलिया में हुआ था सबसे पहले इस नियम का इस्तेमाल
क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया ने सबसे पहले 2016-17 सीजन में कनकशन सब्स्टीट्यूट के नियम का इस्तेमाल घरेलू वनडे (पुरुष-महिला दोनों), बिग बैश और महिला बिग बैश सीरीज में किया था। आईसीसी से इस नियम को स्वीकृति नहीं मिलने के कारण वह शेफील्ड शील्ड और अन्य प्रथम श्रेणी टूर्नामेंट में इसका इस्तेमाल नहीं कर सका था। इंग्लैंड क्रिकेट बोर्ड ने पिछले सीजन में काउंटी में इसे लागू किया था।
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