टीम इंडिया के क्रिकेटर युवराज सिंह ने अपने छोटे भाई जोरावार सिंह के वैवाहिक विवाद पर निजता बरकरार रखने के लिए पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। इस मामले पर जस्टिस राजन गुप्ता ने फैसला सुनाया कि पहली बात ये स्पष्ट कर दूं कि रिट क्षेत्राधिकार में यह मामला नहीं सुना जाएगा। जस्टिस गुप्ता ने कहा कि फिलहाल इस याचिका का कोई औचित्य नहीं है। युवराज के वकील बीबीएस सोबती ने जवाब देने के लिए हाई कोर्ट से समय की मांग की। हाई कोर्ट ने मांग स्वीकार करते हुए सुनवाई 18 सितंबर तक के लिए स्थगित कर दी है।
बता दें कि युवराज सिंह ने ये याचिका जून 2015 में दायर की थी। तब से लेकर अब तक हुई 19 सुनवाई के बाद भी हाई कोर्ट ने किसी भी पक्ष को नोटिस जारी नहीं किया है। जून 2015 में हुई पहली सुनवाई पर ही हाई कोर्ट ने यह कहा था कि संविधान से प्राप्त अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर महज इस अंदेशे से कि इस मामले में मीडिया में समाचार प्रकाशित होने से उनकी साख खराब होगी रोक नहीं लगाई जा सकती है।
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युवराज सिंह, उनकी मां शबनम सिंह और जोरावार सिंह ने हाई कोर्ट में याचिका दायर उनके पारिवारिक मसले पर मीडिया के दखलंदाजी का आरोप लगाते हुए प्रतिबंध लगाए जाने की मांग की थी। याचिका में यह भी आरोप था कि जोरवार की पत्नी के परिवार वाले उनकी छवि खराब करने की कोशिश कर रहे हैं और प्रेस कांफ्रेंस कर उनकी छवि खराब की जा रही है।
इस पर हाई कोर्ट ने कहा था कि याचिकाकर्ता ऐसा कोई दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर पाए, जिससे साबित हो कि इस मामले में मीडिया संयम से काम नहीं कर रहा है। हाई कोर्ट ने कहा था संविधान में हर किसी को अपनी बात कहने की आजादी है, बशर्ते वो एक सीमा में हो।