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कोच रवि शास्त्री की खिलाड़ियों को दो टूक, बोले- यो-यो टेस्ट पास करो वरना आप बाहर...

Fri, 22 Jun 2018 09:50 PM IST
स्पोर्ट्स डेस्क, नई दिल्ली
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इंग्लैंड दौरे के लिए रवाना होने से पहले टीम इंडिया के हेड कोच रवि शास्त्री ने प्रेस से बात की। इस दौरान कप्तान विराट कोहली भी मौजूद थे। पूरी बातचीत के दौरान रवि शास्त्री ने यह साफ कर दिया कि भारतीय क्रिकेट टीम में चयन के लिए यो-यो टेस्ट कितना अहम है। उन्होंने दो टूक कह दिया, 'आप टेस्ट पास कीजिए और भारत के लिए खेलिए।
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यो-यो टेस्ट को लेकर शास्त्री ने कहा कि, ‘आप के अंदर कुछ निश्चित काबिलियत है, लेकिन अगर आप फिट हो तो आप इसमें निखार ला सकते हो। इसलिए हम यो-यो टेस्ट पर जोर देते हैं। अगर किसी को लगता है कि यह बहुत ज्यादा गंभीर नहीं है, तो यह उनकी भूल है। वह जा सकते हैं।’
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शास्त्री का साथ देते हुए कोहली ने भी कहा कि, 'इसे भावुक होने के बजाय ‘कड़े फैसले’ के रूप में देखा जाना चाहिए, जिससे टीम को फायदा ही मिलेगा। इस दौरान कोहली ने उदाहरण के तौर पर जसप्रीत बुमराह का भी जिक्र किया। बकौल कोहली, बुमराह तेज गेंदबाज के दमखम और सहनशक्ति को दर्शाने का सबूत है।

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उन्होंने कहा , ‘जसप्रीत बुमराह अंतिम टेस्ट के दौरान अपने आखिरी स्पेल में 144 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से गेंदबाजी कर रहे थे और यहीं फिटनेस की असली परीक्षा होती है। जब आपके पास ऐसे लोग होते हैं जो फिट हैं, अच्छे प्रदर्शन के भूखे हैं और तैयार हैं, तो आप सिर्फ प्रतिस्पर्धा नहीं करते, बल्कि आप मैचों में जीत हासिल करते हो।'
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बता दें कि इसके पहले पूर्व मुख्य चयनकर्ता संदीप पाटिल ने टीम चयन में यो-यो टेस्ट को पैमाने बनाने का विरोध किया था। आईपीएल 11 के सुपरस्टार रहे अंबाती रायुडू के यो-यो टेस्ट में फेल होने के बाद उन्हें टीम इंडिया से बाहर का रास्ता दिखाया गया था, जिसके बाद चयन समिति के इस पूर्व अध्यक्ष ने बीसीसीआई के नीतियों पर सवाल उठाए थे।
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आखिर क्या है यो-यो टेस्ट?

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फुटबाल,रग्बी जैसे खेलों में जहां दमखम की अपेक्षाकृत ज्यादा जरूरत पड़ती है, ऐसे खेलों में यह टेस्ट पहले से होता आ रहा है। यो-यो टेस्ट में कई 'कोन्स' की मदद से 20 मीटर की दूरी पर दो पंक्तियां बनाई जाती हैं। खिलाड़ी रेखा के पीछे अपना पांव रखकर शुरुआत करता है और निर्देश मिलते ही दौड़ना शुरू करता है।
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yo yo test - फोटो : Cricbuzz
20 मीटर की दूरी पर बनी दो पंक्तियों के बीच लगातार दौड़ना होता है और जब बीप बजती है तो मुड़ना होता है। हर एक मिनट या तय किए गए समय में खिलाड़ी को अपने दौड़ने की गति को तेज करना होता है। अगर वह समय पर रेखा तक नहीं पहुंचे तो दो और 'बीप' के बाद उसे तेजी पकड़नी पड़ती है।
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अगर इसके बाद भी खिलाड़ी दो छोरों पर मानकों के मुताबिक तेजी हासिल नहीं कर पाता तो उसका परीक्षण रोक दिया जाता है। ये पूरी प्रक्रिया सॉफ्टवेयर पर आधारित होती है, जिसमें नतीजे रिकॉर्ड किए जाते हैं। यो-यो टेस्ट में ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेटर सबसे आगे माने जाते हैं। इस टेस्ट में उनका औसतन स्कोर 21 होता है।
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