दुनिया की सबसे बड़ी क्रिकेट लीग आईपीएल के मीडिया अधिकार हासिल करने के लिए दुनिया की बड़ी प्रसारण कंपनियां जोर लगा रही हैं। इस रेस में यूट्यूब भी शामिल हो चुका है। साल 2023 से 2027 तक के लिए आईपीएल के मीडिया अधिकारों की नीलामी की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। सबसे पहले इच्छुक कंपनियों को नीलामी में शामिल होने के लिए एक टेंडर खरीदना होगा। इसे बीसीसीआई ने जारी किया है। यह टेंडर खरीने वाली कंपनियां ही बोली में शामिल हो पाएंगी और सबसे ज्यादा बोली लगाने वाली कंपनी को आईपीएल के प्रसारण के मीडिया अधिकार मिलेंगे। मौजूदा समय में आईपीएल के प्रसारण के अधिकार स्टार स्पोर्ट्स के पास हैं।
भारत में खेल से जुड़े प्रसारण करने वाली कंपनी स्टार स्पोर्ट्स और सोनी नेटवर्क के अलावा कई विदेशी कंपनियों ने भी आईपीएल के मीडिया अधिकार हासिल करने में रुचि दिखाई है। इसमें अमेजन और डिज्नी जैसी बड़ी कंपनियां भी शामिल हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार यूट्यूब की पैरेंट कंपनी अल्फाबेट इंक ने भी आईपीएल की नीलामी में शामिल होने के लिए टेंडर खरीदा है।
आईपीएल मीडिया अधिकार हासिल करने की रेस में हैं ये कंपनियां
साल 2023 से 2027 तक के लिए आईपीएल मीडिया राइट्स हासिल करने की रेस में कई कंपनियां हैं। इसमें अमेजन, अल्फाबेट इंक, द वॉल्ट डिज्नी, रिलायंस इंडस्ट्रीज, सोनी ग्रुप, जी एंटरटेनमेंट और ड्रीम 11 भी शामिल है। इन सभी कंपनियों ने बोली में शामिल होने के लिए टेंडर खरीदे हैं। हालांकि, ये कंपनियां जब चाहें, तब बोली की रेस से हट सकती हैं।
दर्शकों की संख्या के लिहाज से आईपीएल दुनिया की तीसरी सबसे लोकप्रिय खेल लीग है। पिछले साल 600 मिलियन (60 करोड़) लोगों ने आईपीएल के मैच देखे थे।
बीसीसीआई को मिल सकते हैं पांच हजार करोड़
बीसीसीआई को मीडिया राइट्स से पांच हजार करोड़ से ज्यादा की कमाई की उम्मीद है। पिछली बार की तरह इस बार सभी के लिए एक साथ बोली नहीं लगाई जाएगी। इस बार बीसीसीआई ने मीडिया राइट्स को चार अलग-अलग पैकेज में बांटा है। टीवी अधिकार, डिजिटल अधिकार, 18 मैचों के अधिकार (शुरूआती, सप्ताह के अंत में डबल हेडर, चार प्लेऑफ) और शेष विश्व के लिए अधिकार इसमें शामिल हैं। बोली के लिए आधार कीमत 32890 करोड़ रूपये है। आईपीएल के 15वें सीजन के समाप्त होने के बाद मीडिया राइट्स के लिए ई-नीलामी होगी।
मौजूदा मीडिया राइट्स स्टार के पास है, जिसकी शुरुआत 2017 में हुई थी और इस सीजन यह खत्म हो रही है। बीसीसीआई सचिव जय शाह ने कहा था कि इस पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी रखा जाएगा। इससे होने वाली कमाई को घरेलू क्रिकेट को मजबूत करने के लिए इस्तेमाल करेंगे। टेंडर दस्तावेज खरीदने के लिए इच्छुक पार्टियों को करीब 25 लाख रुपये बोर्ड के पास जमा कराना होता है।