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WPL: जो लोग क्रिकेट खेलने पर डांटते थे, अब वही उनके लिए बजा रहे हैं ताली, जानें सिमरन शेख के संघर्ष की कहानी

Wed, 15 Mar 2023 03:32 PM IST
स्वप्निल शशांक स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, मुंबई

सार

सिमरन की मां का कहना है कि अब लोग उन्हें बेटी के कारण पहचानते हैं। लोग आते हैं और कहते हैं कि वह सिमरन की मां हैं। यह मेरे लिए गर्व का क्षण है।
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सिमरन शेख के संघर्ष की कहानी - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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महिला प्रीमियर लीग (WPL) को लेकर फैंस के बीच काफी क्रेज है। अपने पहले ही सीजन में यह लीग दुनियाभर में सुपरहिट हो गई है। इस लीग ने कई नए भारतीय खिलाड़ियों को निखर कर सामने आने का मौका भी दिया है। किरण नवगिरे और साइका इशाक समेत कई गरीब और छोटे शहर की लड़कियों ने इस लीग में अपना कमाल दिखाया है।
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अब यूपी वॉरियर्स की टीम का नियमित हिस्सा बन चुकीं सिमरन शेख की भी संघर्ष की कहानी सामने आई है। सिमरन देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में स्थित एशिया की सबसे बड़ा स्लम एरिया धारावी से ताल्लुक रखती हैं। 

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जो डांटते थे, अब वह बढ़ा रहे हौसला

21 वर्षीय यूपी वॉरियर्स की मध्यक्रम की बल्लेबाज सिमरन शेख को क्रिकेट की दुनिया में अपनी जगह बनाने के लिए काफी संघर्षों का सामना करना पड़ा है। दुनिया की सबसे बड़ी झुग्गी बस्तियों में से एक धारावी की रहने वाली सिमरन अपने संघर्ष करने की क्षमता की बदौलत ही यूपी वॉरियर्स की टीम का नियमित हिस्सा बनने में कामयाब रहीं।

बचपन के दिनों में उन्हें पार्क में क्रिकेट खेलने के लिए लोगों से डांट और अपशब्द भी सुनने पड़ते थे, लेकिन अब जब भी वह टीवी स्क्रीन पर आती हैं तो वही लोग उनका हौसला बढ़ाते हैं और तालियां बजाते हैं। सिमरन के पिता जाहिद अली ने सिमरन के संघर्षों के बारे में बात की है।

पिता का बयान

जाहिद ने कहा- जब मेरी बेटी छोटी थी तो उसे क्रिकेट खेलने में दिलचस्पी थी। जब भी वह पार्क में या किसी मैदान पर क्रिकेट खेलती थी तो बहुत सारे लोग उसे डांटते थे और बहुत सी बातें करते थे, लेकिन मेरी बेटी ने सभी शोरों को नजरअंदाज कर दिया। उसने क्रिकेट पर ध्यान दिया और आगे बढ़ना जारी रखा। 

क्रिकेट को करियर के रूप में अपनाना किसी के लिए भी एक कठिन काम है, लेकिन सिमरन अब सबसे बड़ी महिला क्रिकेट लीग में से एक में खेल रही हैं। उनके पिता को शुरू में विश्वास नहीं हुआ था कि वह इस मुकाम तक पहुंच पाएंगी।

Simran Shaikh's Father Didn't Believe Her Daughter Could Make Career In  Cricket | Cricket News

बहुत से लोगों ने किया सिमरन के परिवार का समर्थन

जाहिद ने कहा- नहीं, मैंने ऐसा नहीं सोचा था। हम गरीब लोग हैं और उस समय हम अपनी बेटी की मदद करने की स्थिति में नहीं थे, लेकिन ऊपर वाले की कृपा से वह आगे बढ़ पाईं। मैं बस इतना कहना चाहता हूं कि हम जो सम्मान आज पा रहे हैं वह हमारी बेटी के कौशल, कड़ी मेहनत और ऊपर वाले की कृपा के कारण मिला है। बहुत से लोगों ने हमारा समर्थन किया है।

मां ने क्या कहा?

यहां तक कि सिमरन की मां अख्तरी बानो को भी विश्वास नहीं हो रहा था कि उनकी बेटी इस स्तर पर खेल सकती है। अख्तरी ने कहा- हमें विश्वास नहीं था कि वह आगे खेलेंगी। मैं कोच के साथ-साथ ऊपर वाले को भी धन्यवाद देती हूं जिन्होंने कठिन समय में हमारी बेटी और हमें समर्थन दिया।

10वीं क्लास के बाद ही क्रिकेट खेलने लगी थीं सिमरन

सिमरन ने 10वीं क्लास के बाद अपनी पढ़ाई छोड़ दी थी और उनके पास जो कुछ भी पैसे बचे थे, उससे क्रिकेट खेलने लगीं। अब उन्होंने अपने माता-पिता को गौरवान्वित किया है और वह भारत में एक प्रसिद्ध क्रिकेट खिलाड़ी बन गई हैं। सिमरन की मां ने कहा- पहले वह हमारे नाम से जानी जाती थी, लेकिन अब लोग हमें सिमरन के कारण पहचानते हैं। लोग आते हैं और कहते हैं कि वह सिमरन की मां हैं। यह मेरे लिए गर्व का क्षण है।

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ऑक्शन में घबराई हुई थीं सिमरन

अख्तरी बानो ने महिला प्रीमियर लीग की नीलामी के दौरान परिवार की भावनाओं का भी वर्णन किया। सिमरन की मां ने कहा- हमने 13 फरवरी को WPL ऑक्शन के दौरान दोपहर दो बजे टेलीविजन चालू किया और हम उसके नाम के आने का इंतजार कर रहे थे। वह पूरे समय चिंतित थी, लेकिन फिर उसका नाम अचानक आया और मेरा परिवार और यहां तक कि पूरा समाज उत्साह में उछल पड़ा। सिमरन अब तक चार मैच खेल चुकी हैं। वह आज के मैच में रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर के खिलाफ खेल सकती हैं।
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