यह हैट्रिक शमी के उस संघर्ष की कहानी बयां करती है, जिसे उन्होंने पिछले कई अरसों से झेला है। परिवार में बिखराव से लेकर टीम में अंदर-बाहर होने तक के दर्द ने शमी को एक खतरनाक खिलाड़ी के रूप में परिपक्व कर दिया और जब शमी लौटे हैं, तो उन्होंने अपने खेल से पूरे देश को एक बार फिर से इंडिया-इंडिया चिल्लाने का मौका दिया, लेकिन ये सब कुछ इतना आसान नहीं था शमी के लिए।
यह किसी से छुपा नहीं है कि शमी ने किन पारिवारिक परेशानियों के बीच भारतीय टीम में वापसी की है। उनके कोच बदरुद्दीन-सिद्दीकी की माने तो शमी के लिए सबसे बड़ी चुनौती मानसिक और शारीरिक रूप दोनों तरीके से फिट होना था।
शमी ने जहां शारीरिक रूप से फिट होने के लिए ट्रैक्टर से खेत की मिट्टी को खुदवा कर सुबह और शाम नंगे पैर दौड़ लगाई। वहीं मानसिक रूप से फिट होने में उनके परिवार, पुराने साथियों के अलावा अकादमी ने उनका बखूबी साथ दिया।
पारिवारिक परेशानियों के बीच शमी ने कोलकाता को छोड़ अमरोहा स्थित गांव सहसपुर को ठिकाना बनाया। उनका वजन बढ़ गया था। उन्होंने देसी तरीकों को आजमाया। सुबह डेढ़ से दो घंटे और शाम को एक घंटा 400 और 50-50 मीटर की स्प्रिंट अपने खेत में लगाते थे। फिट होने के लिए उन्होंने बिरयानी और वजन बढ़ाने वाले व्यंजनों की तिलांजलि दे दी।
बदरुद्दीन के मुताबिक उन्होंने इस दौरान उस शमी को देखा जब वह शुरुआत में उनके पास आते थे। पहले वह बहुत परेशान थे, लेकिन वह मानसिक रूप से बहुत मजबूत हैं। एक बार वह ठान लें कि उसे कुछ करके दिखाना है तो वह कर डालता है। बीच में उन्होंने यहां आना बंद कर दिया था, लेकिन इस बार जब आए तो बदले हुए थे। जिस तरह वह पहले मैदान पर बच्चों से घुलते-मिलते थे।
इस बार भी उनका सहारा बच्चे थे। वह उनके साथ खूब समय बिताते थे। उन्हें लगता था कि शमी इस हादसे से जल्द नहीं उबर पाएंगे पर उसने जबरदस्त वापसी की, शमी ने वापसी करते ही अपनी गेंदबाजी से ऐसा कारनामा किया कि पूरे देश के जुबां पर सिर्फ एक ही नाम है और वो नाम है मोहम्मद शमी।