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वर्ल्ड कप 2019: इस एक बल्ले से बदल गए क्रिकेट के नियम

Sat, 08 Jun 2019 08:43 PM IST
Trainee Trainee बीबीसी
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बॉब मेसी और डॉग वाल्टर्स के साथ डेनिस लिली - फोटो : social Media
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इस बात को करीब चालीस साल हो गए हैं। बात 15 दिसंबर, 1979 की है जब एशेज सिरीज का एक मैच खेला जा रहा था। पर्थ के डब्ल्यूएसीए मैदान में हो रहा ये मैच ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड के बीच था।ऑस्ट्रेलिया का स्कोर आठ विकेट पर 219 था और मैदान में मौजूद डेनिस लिली ने आयन बॉथम की एक गेंद को एक्स्ट्रा कवर की तरफ खेल दिया। गेंद खेल कर वो तुरंत तीन रन लेने के लिए दौड़ पड़े लेकिन इस बीच सबका ध्यान गया एक आवाज की तरफ। ये उनके बल्ले से निकली आवाज थी। यही वो विवादित बल्ला बना जिसके कारण बाद में क्रिकेट में खेल के नियम बदले गए।

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क्या था विवाद?

डेनिस लिली के हाथ में जो बल्ला था वो अन्य खिलाड़ियों के बल्ले की तरह लकड़ी का नहीं बना था, बल्कि एल्युमिनियम का बना था। यही कारण था कि गेंद के इससे लगने पर मैदान में एक आवाज गूंजी थी। इस मैच से बारह दिन पहले लिली ने वेस्ट इंडीज के खिलाफ एक मैच में इसी बल्ले का इस्तेमाल किया था।


 

अंपायर ने उठाए सवाल

वेस्टइंडीज के साथ हुए मैच में किसी ने भी डेनिस लिली के एल्युमिनियम बल्ले को लेकर ऐतराज़ नहीं किया था। लेकिन इंग्लैंड के साथ खेले जा रहे मैच में टीम के कप्तान माइक ब्रियरली ने ऐतराज जताया।

उन्होंने शिकायत की कि एल्युमिनियम का बल्ला इस्तेमाल करने से बॉल की शक्ल पर असर पड़ने का खतरा है। इसके बाद मैच के अंपायर मैक्स ओ'कॉनेल और डॉन वेजर ने लिली से कहा कि वो मैच में अपने बल्ले का इस्तेमाल नहीं कर सकते, लेकिन लिली ने इस पर आपत्ति जताई और कहा कि क्रिकेट की रूल बुक (खेल के नियमों की किताब) में कहीं भी ये नहीं लिखा है कि सिर्फ लकड़ी का बल्ला इस्तेमाल करना है और एल्युमिनियम के बल्ले का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। वो इस दौरान अपने गुस्से पर काबू नहीं रख पाए और उन्होंने अपना बल्ला फेंक दिया।

आखिर में ऑस्ट्रेलिया टीम के कप्तान ग्रेग चैपल को मैदान में आकर डेनिस को समझाना पड़ा कि वो लकड़ी के बल्ले का इस्तेमाल करें। इसके बाद लिली ने लकड़ी के बल्ले से खेलना शुरु किया और तीन और रन लेने के बाद वो आउट हो गए।

कैसे बना ये बल्ला ?

पहले के सालों में बेसबॉल का बल्ला लकड़ी का बनाया जाता था. लेकिन वक्त के साथ-साथ इसके लिए लकड़ी का जगह पर एल्युमिनियम का इस्तेमाल होने लगा। इससे प्रेरित होकर क्रिकेट क्लब में खेलने वाले एक खिलाड़ी ग्राएम मोनघन ने एक खास बल्ला बनाया जो एल्युमिनियम का था।

क्रिकेट क्लब में ग्राएम और डेनिस लिली अच्छे मित्र थे। ये दोनों बिजनेस पार्टनर भी थे। यही कारण था कि लिली भी इसी एल्युमिनियम बल्ले के साथ खेल के मैदान में उतरे थे। लेकिन अंपायर के ऐतराज जताने के बाद इस पर रोक लगा दी गई।

बल्ले के लिए बदले गए नियम

एल्युमिनियम बल्ले पर हुए विवाद के बाद ऑस्ट्रेलिया में इस तरह के बल्लों की बिक्री काफी बढ़ गई। लेकिन इस घटना के कुछ दिनों बाद क्रिकेट की रूल बुक में कई नए नियम जोड़ दिए गए। इन नियमों में एक था कि क्रिकेट के खेल में केवल लकड़ी के बल्ले का इस्तेमाल ही होगा। इससे पहले बल्ले को लेकर क्रिकेट की रूल बुक में किसी तरह का कोई नियम नहीं लिखा गया था।

नए नियम बनने के बाद एल्युमिनियम के बल्लों के इस्तेमाल पर पूरी तरह से रोक लग गई, लेकिन क्रिकेट के इतिहास में ये घटना जरूर दर्ज हो गई। 1981 में हुए इंग्लैंड के खिलाफ मैच में डेनिस लिली अपनी गेंद के साथ कमाल दिखाते नजर आए। उन्होंने चार विकेट लिए और इंग्लैंड के बैटिंग ऑर्डर को ही ध्वस्त कर दिया। ये सिरीज ऑस्ट्रेलिया ने 3-0 से जीती। लेकिन इस सिरीज को क्रिकेट प्रेमी 'एल्युमिनियम के बल्ले से जुड़े विवाद' से जोड़कर ही देखते हैं।
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'वो मार्केटिंक का एक हथकंडा था'

डेनिस लिली ने अपनी जीवनी में इस विवाद के बारे में विस्तार से बताया है। इसमें उन्होंने कहा है कि ये एक मार्केटिंग हथकंडा था जो हमने अपने बल्ले को बेचने के लिए अपनाया था। अयन बॉथम ने भी अपनी किताब 'बॉथम्स बुक ऑफ द ऐशेज- अ लाइफटाइम लव अफेयर विद क्रिकेट्स ग्रेटेस्ट राइवलरी' में भी इस विवाद के बारे में लिखा है।

डेनिस लिली के बारे में उन्होंने लिखा, "लिली एक बेहतरीन गेंदबाज थे, लेकिन एक बल्लेबाज़ के तौर पर वो उतने अच्छे नहीं थे। उन्होंने बस खेल में खुद को आगे बढ़ाने के लिए एल्युमिनियम के बल्ले से खेलने का फैसला किया था।"
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