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ANALYSIS: चालाक-चपल-चतुर चहल, LBW से हासिल करते हैं 25% विकेट

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युजवेंद्र चहल - फोटो : ट्विटर
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23 जुलाई 1990 को हरियाणा के जींद में जन्मा एक पतला-दुबला सा लेग स्पिनर, जो क्रिकेटर से पहले शतरंज का ग्रैंडमास्टर बनना चाहता था। 1998 में महज 8 साल की उम्र में पहला नेशनल खेला। 2003 में जब सौरव गांगुली की अगुवाई में टीम इंडिया अपना दूसरा विश्व कप जीतने के लिए जी-जान लगा रही थी, तब 13 साल का यह बच्चा भी भारत की ही ओर से शतरंज विश्व कप खेल रहा था, लेकिन आखिरकार उसने काली-सफेद गोटियों के खेल को छोड़कर क्रिकेट को चुना और 2009 में हरियाणा की ओर प्रथण श्रेणी क्रिकेट खेलना शुरू किया।

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अब तक इस खिलाड़ी की कोई पहचान नहीं बनी थी, लेकिन 2009 में अंडर-19 कूच बिहार ट्रॉफी में सर्वाधिक 34 विकेट लेकर उसने पूरी दुनिया को बता दिया कि उसका नाम युजवेंद्र चहल है। 29 वर्षीय चहल एक जिगरी लेग स्पिनर हैं। माने वह खिलाड़ी जो रिस्क लेने से नहीं चूकता। उनकी कद-काठी और गेंदबाजी शैली को देखकर बल्लेबाज जब यह सोचने लगता है कि वह चहल को बड़े शॉट्स मारेगा तो वही सबसे बड़ी चूक कर जाता है क्योंकि युजी अब क्रिकेट में शतरंज की चाल चलते हैं।

आखिर क्यों घातक हैं चहल?

- फोटो : सोशल मीडिया
युजवेंद्र चहल, शेन वॉर्न की तरह गेंद के बहुत बड़े टर्नर नहीं। न ही राशिद खान की तरह क्विक आर्म एक्शन हैं, जो उनकी गुगली को अबूझ बनाती हो और न ही आधुनिक लेग स्पिनर्स की तरह हवा में इतने तेज कि बल्लेबाज क्रीज से बाहर निकलकर मारने में गच्चा खा जाए, तो फिर आखिर वह कौन सा चूरन है, जिसे चाटकर यह खिलाड़ी इतने कम समय में ही सफेद बॉल क्रिकेट में हर प्लेइंग इलेवन की जरूरत बन गया।

इसे समझने के लिए यह जानना जरूरी है कि युजी किस अंदाज में शिकार करते हैं। 52 एकदिवसीय मुकाबलों में 91 विकेट ले चुके चहल 25% विकेट एलबीडब्ल्यू, 11% स्टंपिंग और 11 फीसदी शिकार बल्लेबाज का विकेट उखाड़कर करते हैं। शेष अलग-अलग पोजिशन पर कैच आउट से आते हैं। बोल्ड और स्टंपिंग से मिलने वाली 36 प्रतिशत सफलताओं में ही उनकी गेंदबाजी का सार है। कहते का मतलब है कि उनकी अधिकतर विकेट टेकिंग डिलिवरी संट्प्स पर ही आकर खत्म होती है। मगर उसी वक्त स्टंपिंग से आने वाले 11% विकेट यह भी बताते हैं कि वह गेंद को बल्लेबाज से दूर ले जाना भी बखूबी जानते हैं।

चालाक-चपल-चतुर चहल

युजवेंद्र चहल - फोटो : social Media
हालातों के मुताबिक खुद को और अपनी गेंदबाजी शैली को बदलन में इस खिलाड़ी का कोई तोड़ नहीं। उनके अंदर वह सारे गुण मौजद हैं, जो एक स्मार्ट आधुनिक बॉलर के भीतर होना चाहिए। स्थिति के मुताबिक अपने तरकश में मौजूद किस तीर को कब निकालना है यह युजी को भली-भांति पता है। वह आसानी से बल्लेबाजों को रन नहीं बनाने देते। विपक्षी को उनके खिलाफ बड़ा शॉट मारने के लिए जोखिम मोल लेना ही होता है और यही वह गच्चा भी खा जाते हैं। चहल की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि वह अपनी गेंदों को फ्लाइट करवाते हैं। कुशल गेंदबाजी एक्शन और सटीक लाइन-लेंथ बल्लेबाजों को बांधी रखती है तो फ्लीपर भी उन्हें विकेट दिलाता है।

लाइन, तेजी और स्पिन

युजवेंद्र की सफलता का बड़ा कारण IPL भी है। 2011 में उन्हें बड़ा ब्रेक उस समय मिला जब वह मुंबई इंडियंस के साथ जुड़े, हालांकि उस साल वे कोई मैच नहीं खेल पाए। आईपीएल में गेंदबाजों के लिए तथाकथित कब्रिस्तान बेंगलुरु के चिन्नास्वामी स्टेडियम ने चहल को एक स्पिनर के रूप में जीवित रहने की कला में अहम सबक सिखाया। युजी अब उस लाइन में गेंदबाजी करना सीख गए, जहां से गेंद बल्ले के नीचे नहीं आती और वही कारण है कि वह किफायती साबित होते हैं।

लेग स्टंप पर गेंद रखकर बल्लेबाज के बांध देने उनका शगल है, विकल्प कम होने के बल्लेबाज के पास स्क्वैयर लेग और फाइन लेग के ऊपर से मारने के सिवाय कोई चारा नहीं होता। लेग स्पिन, गूगली और फ्लिपर। ये वो तीन हथियार हैं, जो विराट के इस चहेते खिलाड़ी को और खतरनाक बनाते हैं। खब्बू बल्लेबाजों के लिए वह गूगली फेंकते हैं तो दाएं दाएं हाथ के विपक्षी को निपटाने के लिए फ्लिपर।

गेंद मिडिल और लेग पर टप्पा खाकर बाहर को निकलती है, इसकी विड्थ कम होती है और इस वजह से बल्लेबाज न तो इसे कट कर सकता है और न ही स्टेप आउट कर सकता है। स्विप खेलने के चक्कर में कई बार टॉप एज लग जाता है और बल्लेबाज कैच आउट हो जाता है। वह गेंद फुल रखना पसंद करते हैं शायद यही वजह है कि जब कप्तान को उनसे विकेट चाहिए होता है वह निकालकर देते हैं।
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नहीं मिल रहे लगातार मौके

Yuzvendra Chahal - फोटो : social Media
चहल एक ऐसे गेंदबाज है जो कप्तान की सलाह और गेम प्लानिंग के अनुसार ही गेंदबाजी करते हैं। विकेटकीपर के साथ उनका समन्वय देखते ही बनता है। टीम के कप्तान कोहली हो या रोहित शर्मा, चहल का महत्व उतना ही बना रहता है, लेकिन फिलहाल ऐसा लगता है कि टीम इंडिया उनके और कुलदीप यादव के बीच में फंसी हुई है। किसी भी गेंदबाज को अगर यह पता हो कि वह अगली पूरी सीरीज खेल रहा है तो उसकी रंगत बदल जाती है। जरूरी होगा कि भारतीय कप्तान विराट कोहली इस गेंदबाज को ज्यादा से ज्यादा मौका दे वरना हिंदुस्तानी टीम एक बेहतरीन खिलाड़ी को खो देगी।
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