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क्या वाकई धोनी के बिना अधूरे हैं विराट? भारत की हार के बाद फिर उठे सवाल

Thu, 14 Mar 2019 08:36 AM IST
अंशुल तलमले अंशुल तलमले, नई दिल्ली
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विश्व कप की तैयारियों को लेकर भारतीय टीम को गहरा झटका लगा है। दिल्ली में बुधवार को हुए आखिरी वन-डे में ऑस्ट्रेलिया ने न सिर्फ टीम इंडिया को हराया बल्कि 3-2 से श्रृंखला भी अपने नाम की। इसके पहले टी-20 सीरीज में भी निराशा ही हाथ लगी थी। ऐसे में अब विश्व कप से पहले भारतीय टीम पर सवाल उठने तो लाजिमी है। सवाल तो विराट की कप्तानी पर उठेंगे क्योंकि धोनी की गैरहाजिरी में उनकी घबराहट और बौखलाहट दोनों स्पष्ट तौर पर नजर आती रही।

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कुछ ही दिन पहले पूर्व भारतीय क्रिकेटर अजय जडेजा ने कहा था कि आईसीसी क्रिकेट विश्व कप 2019 के लिए महेंद्र सिंह धोनी को कप्तान सौंप देनी चाहिए। अपने बेबाक बयानों के लिए मशहूर पूर्व महान भारतीय स्पिनर व कप्तान बिशन सिंह बेदी ने भी विराट कोहली की कप्तानी को लेकर अपनी प्रतिक्रिया दी थी।

बिशन सिंह बेदी ने विराट को 'आधा कप्तान' करार दिया था। बेदी ने यह बात मोहाली वन-डे के बाद कही थी। मगर अब जब पूरी सीरीज खत्म होने के बाद हार का विश्लेषण करें तो यही नजर आता है कि धोनी के बिना विराट अधूरे ही हैं। दिल्ली वन-डे में उस वक्त जब भारतीय टीम को विकेट की तलाश थी, विराट वह जाल नहीं बुन पाए, जिससे कंगारुओं को फंसाया जा सके। प्लेइंग इलेवन में लगातार बदलाव करना भी खिलाड़ियों के मनोबल पर नकारात्मक प्रभाव डालते दिखा।
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कुलदीप यादव, युजवेंद्र चहल सरीखे गेंदबाज कई बार कह चुके हैं कि विकेट के पीछे से धोनी की टिप्स ही उनकी सफलता का सबसे बड़ा राज है। केदार जाधव तो एक बार यह तक कहते दिखे कि जो धोनी भाई बोलते हैं, मैं आंख बंद कर वही करता हूं। धोनी इस खेल के माहिर खिलाड़ी हैं। विकेट के पीछे से पूरे खेल को दिमाग से ऑपरेट करते हैं। बल्लेबाज का दिमाग पढ़ लेते हैं और फिर गेंदबाज को उसके हिसाब से ही गेंदबाजी करवाते हैं। स्टंप माइक पर कई दफे उनकी आवाज रिकॉर्ड हुई और उनका अनुमान भी सही साबित हुआ। डीआरएस में उनका कोई सानी नहीं, इस बात से पूरी दुनिया वाकिफ है।

तीसरे वन-डे के बाद धोनी ने आराम लेने का फैसला लिया था। शेष दो वन-डे में उनकी जगह ऋषभ पंत को मौका दिया गया। बिना माही के विराट चौथे वनडे में बेहद असहज नजर आए। बतौर फिल्डर वे बाउंड्री से टीम को चलाने की असफल कोशिश करते रहे। गेंदबाजों को वो टिप्स नहीं दे पाए जो एक कप्तान का काम होता। कई मौकों पर झुंझलाते दिखे तो कई बार ऋषभ पंत की लापरवाही पर आपा भी खो बैठे।

निश्चित तौर पर धोनी अब युवा नहीं रहे। वह पहले जैसे फुर्तीले भी नहीं हैं, लेकिन टीम को उनकी जरूरत है। उनकी उपस्थिति से टीम शांतभाव से खेलती है। कप्तान को भी उनकी जरूरत महसूस होती है और उनके बिना वह असहज नजर आते हैं। यह अच्छा संकेत नहीं है। या तो कप्तान कोहली को खिलाड़ी कोहली की तरह शातिर होना होगा या फिर 'आधा कप्तान' जैसा ताना सहना होगा।
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