दिग्गज क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर इन दिनों काफी चर्चा में हैं। उन्हें उनके एक ट्वीट के लिए लगातार आलोचनाओं का सामना करना पड़ा है। सचिन ने पिछले हफ्ते देश से एकजुट रहने और समस्यायों का मिलकर समाधान करने की अपील की थी। हालांकि उनके इस ट्वीट को लोगों ने किसान आंदोलन से जोड़कर देखा और उनका विरोध शुरू कर दिया। उधर सचिन के समर्थन में भी उनके प्रशंसक सड़कों पर उतर आए और उनके समर्थन में रैली निकाली।
भारत रत्न से सम्मानित और पूर्व राज्यसभा सदस्य सचिन वैसे बहुत पहले से ही सोशल मीडिया पर एक्टिव हैं और हर मुद्दे पर अपनी राय जाहिर करते रहते हैं। कोविड-19 के दौरान भी उन्होंने लोगों से सावधानियां बरतने की अपील की थी। उन्होंने साल 2017 में भी सोशल मीडिया का सहारा लेते हुए एक शानदार कदम उठाया था और अपनी बात कही थी।
अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में सर्वाधिक रन बनाने वाले सचिन 2012 में संसद सदस्य बनने वाले पहले सक्रिय भारतीय एथलीट बने थे। उस समय मास्टर ब्लास्टर को राज्यसभा सांसद के लिए नामित किया गया था। उस समय तेंदुलकर को पहली बार दिसंबर 2017 में राज्यसभा में बोलने के लिए कथित तौर पर दोपहर दो बजे का स्लॉट आवंटित किया गया था।
लेकिन सदन में हंगामे की वजह से तेंदुलकर को बोलने का मौका नहीं मिला। विपक्षी दलों ने तब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा पूर्व पीएम मनमोहन सिंह पर की गई टिप्पणी का विरोध किया और सदन में हंगामा किया। इन सबके बीच सचिन अपनी बात नहीं रख पाए। हालांकि सचिन ने भी हार नहीं मानीं और अपनी बात कहने के लिए सोशल मीडिया का सहारा लिया।
उन्होंने उस साल दिसंबर में अपने फेसबुक अकाउंट पर एक 15 मिनट की अवधि का वीडियो साझा किया था। इसमें उन्होंने भारत को खेल-प्रेमी राष्ट्र बनने से लेकर खेल खेलने वाले राष्ट्र बनाने तक के सुंदर विचार साझा किए। उन्होंने कहा, 'हमें अपना समय और प्रयास निवेश करना चाहिए और अपना कल्याण सुनिश्चित करना चाहिए। हममें से प्रत्येक को एक सक्रिय खेल अपनाने और इसे नियमित रूप से खेलने की आवश्यकता है।
उन्होंने अपनी बात में देश के खेलों पर बात की थी। इसमें उन्होंने खेलों को बढ़ावा देने और राष्ट्र निर्माण में भागीदार बनने के लिए कहा था। सचिन ने देश के विकास को लेकर बात करते हुए कहा था कि स्वस्थ रहेगा इंडिया तभी तो बढ़ेगा इंडिया। सचिन ने अपने विकास कार्यों पर भी बताया था।
पूर्व क्रिकेटर का राज्यसभा का कार्यकाल अप्रैल 2018 में खत्म हुआ। इसके बाद उन्होंने अपने छह साल की पूरी तनख्वाह प्रधानमंती राहत कोष में दान कर दी थी।