किसी भी फील्डर के लिए इससे बुरा क्या होगा कि वो कैच लपकने के लिए पूरी जी-जान लगा दे और जब कैच होने के बाद टीम जश्न मनाने में बिजी हो जाए लेकिन थर्ड अंपायर उस गेंद को नोबॉल करार दे दे।
कुछ ऐसा ही हुआ जब तपती धूप के बीच हैदराबाद में सनराइजर्स हैदराबाद के खिलाफ कोलकाता नाइटराइडर्स की टीम के साथ जब कैच लपकने के बाद गेंद नोबॉल हो गई और बल्लेबाज क्रीज पर कायम रहा। यह घटना घटी मैच के पहले ही ओवर की दूसरी गेंद पर।
टूर्नामेंट के आठवें मैच में पहले बल्लेबाजी करने उतरी मेजबान टीम को दूसरी ही गेंद पर जर्बदस्त जीवनदान मिला। करीब 2 महीने बाद मैदान पर लौटे कोलकाता के तेज गेंदबाज मोर्ने मोर्कल ने दूसरी गेंद ओपनर डेविड वार्नर को डाली जिसे उन्होंने पुल करने की कोशिश की और हवा में खेल दिया।
काफी देर तक गेंद हवा में रहने के बाद जब वह नीचे आ रही थी तो इस लपकने के लिए फील्डर पीयूष चावला ने लगातार उस पर ध्यान लगाए रखा और जब वह उनके करीब आई तो उसे पहली ही बार में लपका नहीं जा सका। पीयूष ने इस कैच को लपकने के लिए करीब 6 बार प्रयास किया। कभी गेंद उनके सीने पर लगी तो कभी हथेली से उछल कर उनसे दूर जा रही थी लेकिन फाइनली उसे लपक ही लिया।
इस शानदार कैच के बाद जब टीम जश्न मना रही थी तो अंपायर ने कुछ भी कहने से इंकार कर दिया, और फैसले के लिए थर्ड अंपायर के पास भेज दिया। टीवी रिप्ले में गेंद नोबॉल दिख रही थी और फिर अंपायर ने इसे नोबॉल करार देते हुए बल्लेबाज को नाबाद घोषित कर दिया।
वार्नर जैसे विस्फोटक बल्लेबाज को दूसरी ही गेंद पर आउट करने का मौका गंवाने के बाद कोलकाता की टीम थोड़ी मायूस जरूर हो गई लेकिन तेज गेंदबाज उमेश यादव ने चौथे ओवर की दूसरी ही गेंद पर सूर्यकुमार यादव के हाथों कैच आउट कराकर बड़ा खतरा बनने नहीं दिया। वार्नर 13 रन बनाकर आउट हुए।