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एमएस धोनी के 'बलिदान' पर क्यों मचा है विवाद, क्या कहते हैं ICC के नियम?

Sat, 08 Jun 2019 07:12 AM IST
अंशुल तलमले स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला
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एमएस धोनी बलिदान बैज - फोटो : सोशल मीडिया

विश्व कप के अपने पहले मैच में टीम इंडिया ने दक्षिण अफ्रीका को मात दी। इस मुकाबले के बाद टीम की जीत से ज्यादा जो एक बात चर्चाओं में है, वह है एमएस धोनी के विकेटकीपिंग गलव्स। धोनी उस मैच में ऐसे दस्ताने पहनकर उतरे जिसपर भारतीय सेना के प्रतीक चिन्हों में से एक 'बलिदान बैज' नजर आ रहा था। पहले आईसीसी ने इस पर आपत्ति जताई, लेकिन पहले पूरे देश और बाद में धोनी के साथ बीसीसीआई का कड़ा देख अपने तेवर नरम कर लिए।

आइए जानते हैं ऐसे मामलों पर क्या कहता है आईसीसी का नियम

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बलिदान बैज के साथ धोनी - फोटो : सोशल मीडिया
इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल के लोगो और ड्रेस कोड के मुताबिक कोई भी खिलाड़ी तय ड्रेस या किट से छेड़छाड़ नहीं कर सकता है। यहां तक कि उस पर किसी प्रकार का दूसरा रंग भी नहीं इस्तेमाल किया जा सकता। ड्रेस पूरी तरह से साफ होनी चाहिए और उसके रंग में भी कोई परिवर्तन नहीं होना चाहिए। 
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बलिदान बैज के साथ एमएस धोनी - फोटो : सोशल मीडिया
नियमों के मुताबिक किसी भी खिलाड़ी, बोर्ड या फिर संस्थान को किसी विशेष लोगो या बदलाव के लिए पहले से अनुमति मांगनी होगी। आईसीसी से अप्रूवल मिलने के बाद ही ड्रेस में कुछ बदलाव के साथ प्लेयर मैदान में उतर सकता है।

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धोनी ग्लव्स - फोटो : self
आईसीसी के मुताबिक किसी भी प्लेयर को तीन से ज्यादा लोगो अपनी ड्रेस पर इस्तेमाल करने की इजाजत नहीं दी जा सकती है। ग्लव्स पर सिर्फ मैन्युफैक्चरर का ही लोगो हो सकता है। खिलाड़ी और टीम के अधिकारियों को आर्म बैंड या ड्रेस के जरिए कोई भी निजी मेसेज देने की अनुमति नहीं है। हालांकि आईसीसी के क्रिकेट ऑपरेशंस डिपार्टमेंट से अनुमति लेने के बाद ऐसा किया जा सकता है।
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बलिदान बैज के साथ धोनी - फोटो : सोशल मीडिया
आईसीसी के नियमों के मुताबिक किसी भी तरह के राजनीतिक, धार्मिक संदेश को जारी के लिए अनुमति नहीं मिल सकती। संदेह को खत्म करते हुए आईसीसी ने यह भी अपने नियमों में स्पष्ट किया है कि यदि कोई बोर्ड या टीम किसी संदेश को लेकर मंजूरी देती है और आईसीसी असहमत है तो फिर अंतिम निर्णय अंतरराष्ट्रीय संस्था का ही माना जाएगा।
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क्या है ये निशानी?

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पैरा फोर्स - फोटो : social media
भारतीय सेना की एक स्पेशल फोर्सेज की टीम होती है जो आतंकियों से लड़ने और आतंकियों के इलाके में घुसकर उन्हें मारने में दक्ष होती है। मुश्किल ट्रेनिंग और पैराशूट से कूदकर दुश्मन के इलाके में घुसकर दुश्मन को मारने में महारत हासिल करने वाले इन सैनिकों को पैरा कमांडो कहा जाता है। इन्हीं पैरा कमांडो को एक खास तरह की निशानी/चिन्ह दी जाती है जिसे बलिदान चिन्ह/बैज कहा जाता है। यह बैज उन्हें ही मिलता है जो स्पेशल पैरा फोर्सेज से जुड़े हो।
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धोनी ने क्यों पहना बैज?

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आर्मी धोनी - फोटो : social media
महेंद्र सिंह धोनी को 2011 में टेरीटोरियल आर्मी में लेफ्टिनेंट कर्नल की उपाधि से नवाजा गया था। उसके बाद साल 2015 में धोनी ने पैरा फोर्सेज के साथ बुनियादी ट्रेनिंग और फिर पैराशूट से कूदने की स्पेशल ट्रेनिंग भी पूरी की जिसके बाद धोनी को पैरा रेजिमेंट में शामिल किया गया और उन्हें ये बैज लगाने की अनुमति दी गई। यह पहली बार नहीं है जब धोनी ने पैरा फोर्सेज से जुड़ी निशानी को पहना हो, इससे पहले वो IPL के दौरान बलिदान बैज वाले टोपी और फोन के कवर पर इस निशानी को लगाए देखे जा चुके हैं। धोनी अक्सर सेना की टोपी या सेना सी जुड़ी निशानियों को अपने कपड़ों या बैग पर लगाए दिख जाते हैं। वे पहले ही अपने इरादे बताते हुए कह चुके हैं कि क्रिकेट से संन्यास लेने के बाद वो सेना में जाकर देश सेवा करना चाहते हैं।
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