विवाद कहां से शुरू हुआ?
<p>सारा विवाद सितंबर में शुरू हुआ, जब विराट कोहली ने टी-20 वर्ल्ड कप के बाद टी-20 की कप्तानी छोड़ने का एलान किया। इसके साथ ही विराट ने वनडे और टेस्ट में कप्तानी जारी रखने की इच्छा जताई। विराट के ऐलान के बाद से ही कई दिग्गजों ने कहा कि टी-20 और वनडे में अलग-अलग कप्तान होना टीम के लिए सही नहीं होगा। हालांकि, मदनलाल जैसे कुछ दिग्गज इस थ्योरी के खिलाफ थे। </p>
अभी क्या हुआ?
विराट के टी-20 कप्तानी छोड़ने के एलान के बाद टीम इंडिया वर्ल्ड कप के सेमीफाइनल में भी नहीं पहुंची। इसके बाद न्यूजीलैंड के खिलाफ हुई टी-20 सीरीज में रोहित शर्मा ने कप्तानी की। सीरीज के तीनों मैच में भारत को जीत मिली। तब से ही कई एक्सपर्ट इस बात की वकालत कर रहे थे कि सीमित ओवर क्रिकेट की यानी टी-20 के साथ ही वनडे की कप्तानी भी रोहित को दे दी जाए। पिछले हफ्ते जब दक्षिण अफ्रीका दौरे के लिए टेस्ट टीम का एलान हुआ तो उसके साथ ही बीसीसीआई ने रोहित को वनडे का कप्तान बनाने की भी घोषणा की।<br>
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इस फैसले के बाद बीसीसीआई अध्यक्ष सौरव गांगुली ने कहा कि कोहली को इस बारे में पहले ही बता दिया गया था। गांगुली ने कहा कि बीसीसीआई ने विराट से टी-20 कप्तानी नहीं छोड़ने का भी अनुरोध किया था, लेकिन वे अपने फैसले पर अडिग थे। इसके साथ ही गांगुली ने कहा कि वनडे और टी-20 में अलग-अलग कप्तान बनाना सही होता। बोर्ड और चयनकर्ता सफेद गेंद के क्रिकेट के लिए अलग-अलग कप्तान नहीं चाहते थे।
विराट ने गांगुली की बातों पर क्या कहा?
विराट ने बुधवार को कहा कि वनडे कप्तानी से हटाए जाने के बारे में उन्हें 8 अगस्त को चयनकर्ताओं के साथ हुई मीटिंग में उन्हें टेस्ट टीम चुनने के बाद जानकारी दी गई। हालांकि, विराट ने ये भी कहा कि उन्होंने टी-20 की कप्तानी छोड़ते वक्त बीसीसीआई से कहा था कि अगर बोर्ड चाहे तो वनडे और टेस्ट में भी उनकी जगह दूसरा कप्तान बना सकती है। गांगुली के कप्तानी नहीं छोड़ने के अनुरोध वाले दावे का भी विराट ने खंडन किया। उन्होंने कहा कि जब मैंने इस्तीफे की बात बताई तो बीसीसीआई की ओर से किसी ने भी मुझसे ऐसा नहीं करने का कोई अनुरोध नहीं किया। <br>
बीसीसीआई के लिए विराट को वनडे का कप्तान बनाए रखने में क्या परेशानी थी?
<p>मौजूदा दौर में ऑस्ट्रेलिया, इंग्लैंड, दक्षिण अफ्रीका, श्रीलंका, बांग्लादेश जैसे देशों में अलग-अलग फॉर्मेट में अलग कप्तान हैं। इन सभी देशों में भी वनडे और टी-20 की कप्तानी एक खिलाड़ी के पास है। वहीं टेस्ट का कप्तान अलग है। दरअसल विशेषज्ञ इसे सफेद गेंद वाले क्रिकेट और लाल गेंद वाले क्रिकेट के रूप में दो अलग फॉर्मेट में देखते हैं।<br>
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ज्यादातर विशेषज्ञों का मानना है कि सफेद बॉल वाले क्रिकेट में दो कप्तान होने पर टीम के लिए कई तरह की परेशानियां होती हैं क्योंकि दोनों फॉर्मेट में ज्यादातर खिलाड़ी समान होते हैं। ऐसे में दो कप्तान से टीम में कई तरह की गफलत हो सकती है। </p>
आकाश चोपड़ा, वीवीएस लक्ष्मण जैसे कई पूर्व क्रिकेट इसके पक्ष में बोल चुके थे। रोहित को वनडे कप्तान बनाए जाने के बाद आकाश चोपड़ा ने कहा कि जिस दिन कोहली ने टी20 फॉर्मेट में कप्तानी छोड़ने का फैसला किया था कि था यह तभी से तय था कि वह जल्द ही अपनी वनडे कप्तानी भी छोड़ देंगे।<br>
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वर्ल्ड क्रिकेट में आपने कभी नहीं देखा होगा कि टेस्ट का कप्तान वनडे का कप्तान हो पर टी20 का नहीं। वनडे के कप्तान को टी20 में भी टीम की कप्तानी दी जाती है। अंतर हमेशा सफेद गेंद क्रिकेट और लाल गेंद क्रिकेट में होता है और वही अब हुआ है।
क्या पहले भी इस तरह के विवाद हुए हैं?
भारत में कप्तान बदलने के दौरान कई विवाद पहले भी हुए हैं। चाहे अजहर की जगह सचिन को कप्तान बनाए जाने का फैसला हो या गांगुली की जगह राहुल द्रविड़ को कप्तान बनाने के वक्त की बात हो। विवाद हमेशा हुए। सुनील गवास्कर और कपिल देव के दौर में भी विवाद हुए। राहुल द्रविड़ के कप्तानी छोड़ने पर भी विवाद हुआ। बस अंतर इतना रहा कि कभी भी किसी जाने वाले कप्तान ने इस तरह सार्वजनिक तौर पर अपना पक्ष नहीं रखा।