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'जिस सीट पर गिरा था धोनी का मशहूर छक्का, उसे विश्व विजेता कप्तान के नाम करो'

Tue, 18 Aug 2020 11:42 AM IST
अंशुल तलमले स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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धोनी का विजयी शॉट - फोटो : सोशल मीडिया
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याद कीजिए 2 अप्रैल 2011 की शाम। मुंबई का वानखेड़े स्टेडियम। स्ट्राइक पर धोनी। नॉनस्ट्राइक एंड पर युवराज। श्रीलंकाई पेसर नुवान कुलशेखरा की गेंद पर रांची के इस राजकुमार का गननचुंबी छक्का। बैकग्राउंड में कमेंट्री करते रवि शास्त्री की आवाज। इस विजयी प्रहार ने 28 साल बाद भारत को विश्व कप दिलाया था। गेंद जिस सीट पर जाकर गिरी थी, उसे अब विश्व विजेता कप्तान के नाम पर रखा जा सकता है।

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बीते कुछ दिन से बेहद निराश-हताश और दुखी हो चुके फैंस यह खबर सुनते ही खुशी से उछल सकते हैं। दरअसल, 15 अगस्त 2020 को धोनी के अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट को अलविदा कहने के बाद मुंबई क्रिकेट एसोसिएशन को (एमसीए) एक प्रस्ताव मिला है, जिसके मुताबिक उन्हें उस सीट को धोनी के नाम पर रखना होगा, जहां माही के बल्ले से निकला छक्का गिरा था। यह प्रस्ताव एमसीए के सदस्य अजिंक्य नाइक ने रखा है।

अजिंक्य नाइक ने यह भी प्रस्ताव रखा है कि जल्द ही बनने वाले एमसीए के क्रिकेट म्यूजियम में वर्ल्ड कप बॉल को रखा जाए। यह भी महान महेंद्र सिंह धोनी को सम्मान देने का एक छोटा सा सुझाव है। उनका कहना है कि इस सीट को ऐसे सजाया जाएगा जिससे भारतीय क्रिकेट में महेंद्र सिंह धोनी के योगदान और वानखेड़े स्टेडियम से उनके जुड़ाव के प्रति 'सम्मान और शुक्रिया' का भाव प्रदर्शित हो सके।
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वर्ल्ड कप 2011 के फाइनल में श्रीलंका ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 274 रन बनाए। इसमें महेला जयवर्धने के 103 रन शामिल थे। जवाब में भारतीय टीम की शुरुआत खराब रही। 31 रन पर दो विकेट खो दिए, वीरेंद्र सहवाग और सचिन तेंदुलकर जल्दी ही पवेलियन लौट गए। इसके बाद गौतम गंभीर और विराट कोहली ने तीसरे विकेट के लिए 83 रनों की साझेदारी की। 22वें ओवर में कोहली भी आउट हो गए। इसके बाद चौथे विकेट के लिए धोनी ने गंभीर के साथ मिलकर 109 रन की भागीदारी निभाई। गंभीर आउट हुए तो युवराज के साथ धोनी ने मोर्चा संभाला और नाबाद 54 रन की साझेदारी करते हुए भारत को विश्व चैंपियन बना दिया।

गंभीर ने 97 रन की पारी खेल भारतीय टीम को लक्ष्य के करीब पहुंचाया था। युवराज 24 गेंद पर 21 रन बनाकर नाबाद रहे, जबकि धोनी ने 79 गेंदों में आठ चौके और दो छक्के की मदद से नाबाद 91 रन बनाए। भारतीय क्रिकेट टीम 28 वर्ष के बाद वन-डे चैंपियन बनी। सचिन खिलाड़ियों के कंधे पर चढ़े और मैदान का पूरा चक्कर लगाया। टीम के साथ-साथ खेल प्रेमियों की आंखों से भी उस दिन खुशी के आंसू छलक गए थे।

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