कपिल देव की कप्तानी वाली 1983 विश्व कप की विजेता टीम के लिए इस साल का 25 जून बेहद अहम होने वाला था। टीम के सभी सदस्यों को उम्मीद थी कि जो जौहर उन्होंने 37 साल पहले इंग्लैंड के मैदानों पर दिखाया था उसका दीदार रुपहले पर्दे पर आज की युवा पीढ़ी कर सकेगी, लेकिन कोरोना ने 83 कि विजेताओं के इन अरमानों को पूरा नहीं होने दिया। इस विश्व कप के फाइनल में वेस्टइंडीज के गोर्डन ग्रीनिज का पहला और अहम विकेट अपनी इनस्विंग से चटकाने वाले मुंबईकर बलविंदर सिंह संधू अमर उजाला से खुलासा करते हैं कि फिल्म 83 जब भी आएगी तो सिनेमा घरों के बड़े पर्दें पर ही आएगी। स्थितियां सामन्य होने के लिए चाहें दो साल क्यों न इंतजार करना पड़े, लेकिन फिल्म सिनेमा घरों में ही रिलीज होगी।
83 की जीत का मंत्र देने को लगाया विशेष कैंप
संधू के मुताबिक 83 की जीत का सबसे बड़ा मंत्र टीम की एकजुटता थी। इसी एकजुटता ने हमें वेस्टइंडीज जैसी टीम को हराने में मदद दिलाई। जब फिल्म बन रही थी तो उन्होंने निर्देशक कबीर खान को यह बता बताई। कबीर खान ने कहा कि यही बात फिल्म में भी आनी चाहिए। इसके बाद उन्होंने फिल्म में काम कर रहे सभी एक्टरों का धर्मशाला में 10 दिनों का एक विशेष कैंप लगाने का फैसला लिया। इन 10 दिनों के अंदर सभी एक्टरों के अंदर ऐसी टीम बॉंडिंग हो गई जैसी उनकी टीम के अंदर थी।