बड़ौदा के लिए रणजी ट्राफी खेलने वाले विष्णु सोलंकी ने 15 दिन के अंदर अपनी एक दिन की बेटी और पिता दोनों को खो दिया है। 12 फरवरी को उनकी बेटी का निधन हुआ था। इसके बाद 27 फरवरी को विष्णु के पिता भी उन्हें छोड़कर चले गए, लेकिन इस खिलाड़ी का हौसला अभी भी कायम है। विष्णु अपनी टीम के लिए खेलना चाहते हैं। उन्होंने बेटी के अंतिम संस्कार में शामिल होने के बाद शतकीय पारी खेली थी और सुर्खियों में आए थे। अब उन्होंने पिता के जाने के बाद भी मैच खेलने का फैसला किया है। बड़ौदा क्रिकेट एसोसिएशन के प्रमुख शिशिर हतंगड़ी ने भी उनके जज्बे को सलाम किया है।
29 साल के विष्णु सोलंकी लगातार अपने बल्ले से कमाल करते रहे हैं। 25 प्रथम श्रेणी मैचों में उन्होंने 41.97 के औसत से 1679 रन बनाए हैं। इसमें सात शतक भी शामिल हैं। वहीं 39 लिस्ट-ए मैच में उन्होंने 33.96 के औसत से 1019 रन बनाए हैं। टी-20 में सोलंकी के बल्ले से 46 मैच में 883 रन निकले हैं। इसमें उनका औसत 31.53 का रहा है।
सोलंकी के लिए मुश्किल रहा है फरवरी का महीना
विष्णु सोलंकी को इस साल बड़ौदा की रणजी टीम में चुना गया था और फिर से अपनी टीम के लिए कमाल करना चाहते थे। इस साल कोरोना की वजह से रणजी ट्रॉफी दो चरणों में हो रही है पहला चरण फरवरी में शुरू हो रहा था। इसी समय सोलंकी पिता बनने वाले थे, लेकिन उन्होंने क्रिकेट को प्राथमिकता दी। रणजी ट्रॉफी का पहला चरण शुरु होने वाला था तभी सोलंकी पिता बन गए। 11 फरवरी को उनकी पत्नी ने एक बेटी को जन्म दिया। पहली बार पिता बनने वाले सोलंकी के लिए यह बहुत खुशी की बात थी।
कभी बेटी की आवाज नहीं सुन पाए सोलंकी
हालांकि, सोलंकी की खुशी ज्यादा दिन नहीं चली और 12 फरवरी को उन्हें पता चला कि उनकी एक दिन की बेटी का निधन हो गया है। उसी दिन सोलंकी अपने घर निकल गए और बेटी के अंतिम संस्कार में शामिल हुए। बड़ौदा के लिए पहला मैच भी नहीं खेल पाए। 17 फरवरी को वे टीम के साथ जुड़े और दूसरे मैच की तैयारी करने लगे। चंडीगढ़ के खिलाफ मैच में उन्होंने 103 रन की नाबाद पारी खेली।
सोलंकी ने अपना शतक बेटी को समर्पित किया, जिसे वो कभी अपनी गोद में नहीं खिला सके थे।
पिता ने भी छोड़ा साथ
27 फरवरी को फिर सोलंकी के लिए दुख से भरी खबर मिली। उनके पिता का भी निधन हो गया था, जो लगभग दो महीने से बीमार थे। इस समय चंडीगढ़ और बड़ौदा का मैच चल रहा था। पिता के निधन की बात सुनकर सोलंकी मैदान से बाहर चले गए। मैच रेफरी ने उन्हें फोन पर बात करने की अनुमति दे दी। सोलंकी ने फोन पर ही अपने पिता का अंतिम संस्कार देखा और वो मैच खेलने के लिए तैयार थे। मैच अधिकारी और दोनों टीमों ने सोलंकी की बेटी और पिता के निधन पर शोक जताने के लिए दो मिनट का मौन रखा।
हैदराबाद के खिलाफ मैच में खेलेंगे सोलंकी
अब सोलंकी हैदराबाद और बड़ौदा के मैच में खेलेंगे, जो कि तीन मार्च से शुरू हो रहा है। बड़ौदा क्रिकेट एसोसिएश के प्रमुख शिशिर हतंगड़ी ने भी सोलंकी के हौसले को सलाम किया है। उन्होंने ट्वीट कर लिखा "एक क्रिकेटर की कहानी जिसने कुछ दिन पहले अपनी नवजात बेटी को खो दिया। अंतिम संस्कार में शामिल होने के बाद मैच खेले और शतक लगाया। उनके नाम पर सोशल मीडिया में शायद लाइक न मिलें, मेरे लिए विष्णु सोलंकी असली जिंगदी के हीरो हैं। एक प्रेरणा हैं।"