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Virender Sehwag: कुंबले ने बचाया था वीरेंद्र सहवाग का करियर, पूर्व ओपनर ने 15 साल पुराने किस्से का किया खुलासा

Wed, 25 May 2022 04:38 PM IST
रोहित राज स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

2007-08 ऑस्ट्रेलिया सीरीज के पहले दो टेस्ट मैच में सहवाग को खेलने का मौका नहीं मिला था। दोनों मुकाबलों में टीम इंडिया को हार मिली थी। पर्थ में खेले गए तीसरे टेस्ट में उन्होंने वापसी की  और भारत को जीत मिली थी।
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वीरेंद्र सहवाग और अनिल कुंबले - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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पूर्व सलामी बल्लेबाज वीरेंद्र सहवाग भारत के लिए खेलने वाले सर्वश्रेष्ठ ओपनर में से एक हैं। उनकी आक्रामक बल्लेबाजी ने उन्हें अन्य खिलाड़ियों से अलग बनाया। दिल्ली के इस बल्लेबाज के नाम टेस्ट में दो तिहरे शतक हैं। हालांकि, एक समय था जब चयनकर्ता सहवाग को बाहर करने की योजना बना रहे थे। उन्हें 2007 के दौरान हटा भी दिया गया था। हालांकि, उन्होंने 2007-08 की भारत-ऑस्ट्रेलिया सीरीज में वापसी की। सहवाग ने अब खुलासा किया है कि कैसे तत्कालीन कप्तान अनिल कुंबले ने उनकी मदद की थी।
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सहवाग ने एक स्पोर्ट्स चैनल को दिए इंटरव्यू में 15 साल पुरानी कहानी का खुलासा किया। सहवाग ने कहा, ''2007 में मुझे पता चला था कि मैं टेस्ट टीम का हिस्सा नहीं हूं। तब मुझे दुख हुआ था। अगर मुझे उस दौरान टीम से बाहर नहीं किया जाता तो मेरे नाम भी टेस्ट में 10 हजार से ज्यादा रन होते।'' 2007-08 ऑस्ट्रेलिया सीरीज के पहले दो टेस्ट मैच में सहवाग को खेलने का मौका नहीं मिला था। दोनों मुकाबलों में टीम इंडिया को हार मिली थी। पर्थ में खेले गए तीसरे टेस्ट में उन्होंने वापसी की  और भारत को जीत मिली थी।

कुंबले ने वापसी के लिए रखी थी शर्त
अभ्यास मैच से पहले तत्कालीन कप्तान कुंबले के शब्दों को याद करते हुए सहवाग ने कहा, "कुंबले ने मुझे कहा था कि अभ्यास मैच में 50 रन बनाने पर पर्थ में होने वाले तीसरे टेस्ट के लिए चुना जाएगा।" सहवाग ने एसीटी इनविटेशन इलेवन के खिलाफ मैच में लंच से पहले ही शतक ठोक दिया। इसके बाद उन्हें पर्थ टेस्ट में खेलने का मौका मिला और उन्होंने पहली पारी में 29 और दूसरी पारी में 43 रन बनाए थे। गेंदबाजी में उन्होंने दो अहम विकेट लेकर टीम को जीत दिलाई थी।
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'मेरे जिंदगी के सबसे कठिन 60 रन थे'
पर्थ टेस्ट में तो सहवाग का बल्ला नहीं चला, लेकिन एडिलेड में खेले गए मुकाबले में उन्होंने धमाकेदार पारी खेली। पहली पारी में सहवाग ने 90 गेंद में 63 रन और दूसरी पारी में 236 गेंदों पर 151 रन ठोके थे। सहवाग ने उस टेस्ट को याद करते हुए कहा, "वो 60 रन मेरे जीवन में सबसे कठिन थे। मैं अनिल भाई के भरोसे पर खरे उतरने के लिए खेल रहा था। मैं नहीं चाहता था कि कोई भी उनसे मुझे ऑस्ट्रेलिया लाने के लिए सवाल करे। मैंने अपने पसंदीदा गाने गुनगुनाते हुए अंपायर से बात की। दबाव खत्म हो गया था।" 

उस दौरे के बाद कुंबले ने सहवाग से वादा किया, "जब तक मैं टेस्ट टीम का कप्तान हूं, आपको टीम से बाहर नहीं किया जाएगा। एक खिलाड़ी सबसे ज्यादा यही चाहता है, अपने कप्तान का आत्मविश्वास। मुझे अपने शुरुआती सालों में गांगुली से और बाद में कुंबले से वह मिला।" 

कुंबले नहीं होते तो ऑस्ट्रेलिया दौरा बीच में ही रद्द हो जाता
2007-08 में सिडनी टेस्ट के दौरान हरभजन सिंह और एंड्रयू साइमंड्स के बीच तीखी बहस हुई थी। साइमंड्स ने आरोप लगाया था कि हरभजन ने नस्लीय गालियां दीं और इससे हरभजन पर प्रतिबंध लगा था। हालांकि, उस फैसले को उलट दिया गया था। भारत ने स्वदेश लौटने की बात की थी क्योंकि टीम इंडिया को लगा था कि हरभजन पर प्रतिबंध अनुचित था।

इस मसले पर सहवाग ने कहा, "अगर अनिल भाई कप्तान नहीं होते तो दौरा बीच में ही खत्म हो जाता और शायद हरभजन सिंह का करियर भी खत्म हो जाता।" सहवाग ने ऑस्ट्रेलिया दौरे के बाद कुंबले के नेतृत्व में सात टेस्ट खेले। इस दौरान उनका औसत 62 से अधिक का रहा। कुंबले के नेतृत्व में सहवाग ने दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ 319 और श्रीलंका के खिलाफ नाबाद 201 रन बनाए। उन्होंने कप्तान और खिलाड़ी दोनों के रूप में कुंबले के आखिरी टेस्ट में 104 रन देकर पांच विकेट लिए थे।
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