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Virat Kohli: सीनियर खिलाड़ियों के 'चीकू' और जूनियरों के लिए भैया, विराट कोहली ने टेस्ट में लंबा सफर तय किया

Mon, 12 May 2025 07:15 PM IST
शोभित चतुर्वेदी स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

कोहली ने जब पहली बार भारतीय ड्रेसिंग रूम में कदम रखा था तो उनका स्वैग चर्चा का विषय रहा, लेकिन उन्होंने ऐसे समय लाल गेंद के इस प्रारूप से विदाई ली, जब किसी को इसकी उम्मीद नहीं थी।
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जडेजा और कोहली - फोटो : ANI
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विस्तार
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भारतीय टीम के अनुभवी बल्लेबाज विराट कोहली ने सोमवार को टेस्ट क्रिकेट से संन्यास लेने की घोषणा कर दी। कोहली का करियर कई मायनों में यादगार रहा और उन्होंने कई उपलब्धियों के साथ इसका अंत भी किया। 2011 में टेस्ट करियर की शुरुआत करने वाले कोहली ने इस बात को स्वीकार भी किया कि उनके लिए संन्यास का फैसला लेना आसान नहीं था। 
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मैदान पर दिखता था आक्रामक रवैया
कोहली मैदान पर आक्रामक रवैये के लिए जाने जाते हैं। उनकी छवि ऐसी है कि वह अपने साथी खिलाड़ियों का साथ देने के लिए आक्रामक रुख अपनाने से भी नहीं हिचकिचाते। कोहली ने जब पहली बार भारतीय ड्रेसिंग रूम में कदम रखा था तो उनका स्वैग चर्चा का विषय रहा, लेकिन उन्होंने ऐसे समय लाल गेंद के इस प्रारूप से विदाई ली, जब किसी को इसकी उम्मीद नहीं थी। माना जा रहा था कि कोहली अगले कुछ साल तक इस प्रारूप में खेल सकते हैं। 

किस कारण लिया फैसला?
भारत को अगले महीने इंग्लैंड के खिलाफ पांच मैचों की टेस्ट सीरीज खेलनी है और इस महत्वपूर्ण सीरीज से ठीक पहले कोहली के संन्यास ने प्रशंसकों के साथ ही पूर्व खिलाड़ियों को भी चौंका दिया। हालांकि, सवाल यह उठता है कि टेस्ट प्रारूप को छोड़ने का विचार उनके जेहन में पहली बार कब कौंधा ? शायद ऑस्ट्रेलिया के खराब दौरे के बाद जहां उन्होंने पर्थ में दूसरी पारी में शतक के बाद सिर्फ 91 रन बनाए। स्विंग और उछाल को झेलने में उन्हें इतनी परेशानी हुई कि उनकी वापसी संभव नहीं लग रही थी। इसके बावजूद भारतीय क्रिकेट को इंग्लैंड दौरे पर उनकी जरूरत थी। शरीर से ज्यादा दिमाग की, लेकिन शायद वह पांच टेस्ट मैचों की एक और सीरीज खेलने के लिए तैयार नहीं थे।

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चुनौतियों से नहीं मानी हार 
कोहली को सीनियर खिलाड़ी प्यार से चीकू नाम से पुकारते हैं। वहीं, जूनियर खिलाड़ियों के लिए वह विराट भैया हैं। कोहली ने अपने टेस्ट करियर में लंबा सफर तय किया है और साथ ही काफी उतार चढ़ाव भी देखे, लेकिन चुनौतियों से कभी हार नहीं मानी। उनके करियर में ऐसा भी दौर आया जब वह शतक लगाने के लिए संघर्ष करते दिखे, लेकिन उन्होंने दमदार वापसी की। वह वनडे क्रिकेट खेलते रहेंगे, लेकिन टेस्ट क्रिकेट में उनकी बात ही अलग थी।

पिता के निधन की खबर सुनकर भी नहीं रोकी बल्लेबाजी 
कोहली ने जब अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में अपनी पहचान स्थापित की तो उनके पिता से जुड़ा एक भावुक किस्सा सामने आया। दरअसल, 2006 में 18 साल की उम्र में जब कोहली ने अपने पिता को खोया उस वक्त वह दिल्ली के लिए फिरोज शाह कोटला स्टेडियम (अब अरुण जेटली स्टेडियम) में मैच खेल रहे थे। कोहली को पिता के निधन की जानकारी उसी वक्त लगी थी, लेकिन उन्होंने भावनाओं को काबू रखा और यह खबर सुनने के बाद भी खेलना जारी रखा। कोहली ने उस मैच में 90 रन बनाए और दिल्ली को फॉलोआन से बचाया। इसके बाद वह मैदान से सीधे श्मशान घाट गए और पुत्र होने का फर्ज अदा किया। 

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रणजी ट्रॉफी में खेलते आए थे नजर 
कोहली इस साल रणजी ट्रॉफी में खेलने उतरे थे। उन्होंने रेलवे के खिलाफ दिल्ली के लिए अरुण जेटली स्टेडियम में मुकाबला खेला। इस मैच के लिए स्टेडियम में भारी भीड़ देखने मिली, लेकिन कोहली का बल्ला नहीं चला और वह मध्यम गति के तेज गेंदबाज हिमांशु सांगवान की गेंद पर अपना विकेट गंवा बैठे थे। हिमांशु की उस गेंद से 20000 दर्शकों को शांत कर दिया था। यह आखिरी बार था जब कोहली सफेद जर्सी में चमचमाती एसजी गेंद खेलते नजर आए।
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