विराट कोहली के जीवट का जवाब नहीं है। वह भारतीय क्रिकेट के सबसे काबिल युवा तुर्क हैं। उनकी ताकत है उनका खुद पर भरोसा है। वह टीम इंडिया की बल्लेबाजी की रीढ़ बन चुके हैं।
खास तौर पर टारगेट जितना विकट होता विराट का जवाब उतना ही दमदार होता है। वह युवराज सिंह के साथ महेंद्र सिंह धोनी की अगुवाई में वन डे वर्ल्ड कप जीतने वाली भारतीय टीम की रीढ़ रहे। विराट सही मायनों में मॉडर्न क्रिकेट के सबसे चमकदार सितारे हैं। विराट ने अब तक वन डे में जो 16 सेंचुरी जड़ी हैं और इनमें से दस टारगेट का पीछा करते हुए जड़ी हैं। ये सभी सेंचुरी उन्होंने तीसरे नंबर पर बल्लेबाजी करते हुए जड़ीं। विराट क्रिकेट के हर फॉर्मेट में अपना सिक्का जमा चुके हैं।
मैच के मुताबिक खेलते हैं विराट
चाहे टेस्ट क्रिकेट हो, वन डे या टी-20 सभी में विराट ने अपने करीब पांच बरस के इंटरनैशनल क्रिकेट कैरियर में खुद को साबित किया है। विराट की सबसे बड़ी ताकत यह है कि क्रिकेट में मैच के मिजाज के मुताबिक गियर बदलना उन्हें खूब आता है। वह आगाज जरूर प्रतिद्वंद्वी टीम की बॉलिंग और पिच के मिजाज की थाह लेने के साथ करते हैं। इसके बाद वह प्रतिद्वंद्वी टीम की गेंदबाजी की बखिया ही उधेड़ देते हैं।
शोहरत के साथ अपने पांव जमीन पर रखना किसी भी यंग क्रिकेटर के लिए बड़ी चुनौती होता है। ऐसे में किसी भी यंग क्रिकेटर का राह भटकना कोई चौंकाने वाला नहीं है। विराट ने भारत को अपनी कप्तानी में अंडर-19 विश्व कप चैंपियन बनाया। इसके बाद भारत को वन डे विश्व कप भी जितवाने में विराट ने अहम रोल अदा किया।
वह युवराज सिंह सरीखे उन इने-गिने क्रिकेटरों में शामिल हैं जो जूनियर और सीनियर विश्व कप जीतने वाली भारतीय टीम के सदस्य रहे। विराट भी इंटरनैशनल क्रिकेट के शुरुआती सफर में इसकी चमक दमक में कुछ वक्त के लिए राह भटके। ऐसे में जल्द ही विराट के काबिल उस्ताद राज कुमार शर्मा की डांट ने उन्हें नींद से जगा दिया। वह शोहरत के बाद कल्पना लोक से लौट कर फिर हकीकत की दुनिया में लौट आ गए।
कप्तानी में भी जबरदस्त परफारमेंस
कामयाबी की सीढिय़ां चढ़ते-चढ़ते वह अब भारत के उपकप्तान बन गए हैं। माही और कई दिग्गजों को आराम दिए जाने के बाद विराट को जिंबाब्वे दौरे पर टीम की कप्तानी मिली थी। इस सीरीज में विराट ने खुद अनुकरणीय प्रदर्शन कर टीम को सीरीज जितवाई थी। ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ हाल ही में वन डे सीरीज में दूसरे वन डे जयपुर में जड़ी वनडे विराट की तूफानी और नॉटआउट सेंचुरी निश्चित रूप से सबसे यादगार है।
भारत ने ऑस्ट्रेलिया द्वारा रखे 360 रन के टारगेट को विराट की केवल 52 गेंदों में तूफानी नॉटआउट सेंचुरी की बदौलत 39 गेंदों और 9 विकेट के बाकी रहते हासिल कर लिया। विराट की इस तूफानी ने सुनील गावसकर, रवि शास्त्री, मदनलाल, नवजोत सिद्धू और कपिल देव जैसे धुरंधर को उनका मुरीद बना दिया। सचिन तेंडुलकरअगले महीने मुंबई में वेस्ट इंडीज के खिलाफ सीरीज के दूसरे और आखिरी टेस्ट के बाद अपना बल्ला टांगने की घोषणा कर चुके हैं। ऐसे में दुनिया के धुरंधरों को भारत की क्रिकेट के भविष्य के सितारे में जो खिलाड़ी नजर आ रहा है वह और कोई नहीं विराट कोहली हैं।
सचिन के करीब पहुंच सकते हैं विराट
24 बरस के विराट कोहली और सचिन तेंडुलकर में एक बात 'कॉमन' है। वह यह है कि बतौर यंग क्रिकेटर सचिन तेंडुलकर और विराट ने शुरुआती दौर में जो आस बंधाई थी उस पर ये दोनों ही क्रिकेटर खरे उतरे। सचिन करीब ढाई बरस तक भारत की बल्लेबाजी की रीढ़ रहे। विराट ने अपने पांच बरस अंतरराष्टरीय क्रिकेटर करियर में बतौर यंग क्रिकेटर सचिन की राह पर आगे बढ़ते लगते हैं। विराट कोहली के जज्बे और जीवट के तो सुनील गावसकर भी मुरीद हो गए हैं। मोहिंदर अमरनाथ को विराट में सचिन के करीब पहुंचने का दम लगता है।
विराट कोहली को क्रिकेट का ककहरा सिखाने वाले उनके उस्ताद राजकुमार शर्मा भी अपने शागिर्द के इतनी तेजी से कामयाबी की सीढिय़ां चढऩे से बहुत खुश है। राज कहते हैं 'जब गावसकर और मोहिंदर अमरनाथ जैसे भारतीय क्रिकेट के धुरंधर विराट की तारीफ करते हैं तो मुझे वाकई गर्व होता है। उनका खुद पर भरोसा भी विराट है। शुरू से ही विराट को चुनौतियां का सामना करना खूब भाता है। चुनौती जितनी बड़ी होगी और प्रतिद्वंद्वी टीम जितनी मजबूत होती है विराट उससे उतनी ही शिद्दत से निबटते हैं।
विराट को चुनौतियों से कामयाबी से निबटने की क्षमता ने कुंदन की तरह निखारा है। विराट नाकामी से घबराते नहीं है बल्कि और बेहतर करने की ठानते हैं। जब वह नाकाम भी हो जाते हैं तो मुझसे कहते हैं सर चिंता न करें मैं अगली सीरीज में जरूर एक या दो सेंचुरी जडूंगा। वह ऐसा सिर्फ करते ही नहीं हैं करके भी दिखाते हैं। टीम इंडिया अपने पिछले ऑस्ट्रेलिया दौरे पर मेजबान टीम से टेस्ट सीरीज 0-4 से हारी थी। तब उसके खिलाफ पूरी भारतीय टीम नाकाम रही थी।
ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ उसकी धरती की पिछली टेस्ट सीरीज के शुरू के दो टेस्ट में विराट भी नाकाम रहे थे। तब लोगों ने उनकी आलोचना शुरू कर दी थी। तभी एकबारगी जरूर विराट का आत्मविश्वास कुछ डगमगाया। उसके बाद वहां ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ आखिरी टेस्ट में सेंचुरी जड़ कर विराट ने खोया आत्मविश्वास पाने के बाद पलट कर नहीं देखा था। विराट से आज भी उनके हर मैच के बाद उनकी हर पारी पर चर्चा होती है। इसमें मैं उन्हें बराबर बताता हूं कि उन्होंने कहां गलत किया और कहां ठीक। विराट आज भी मेरी बात को शिद्दत से सुनते हैं। मैंने विराट को मैंने एक ही बात समझाई है कि वह क्रिकेट के लिए हैं। उनका वजूद क्रिकेट से है। इस बात को विराट ने गांठ बांध लिया और कामयाबियों की सीढिय़ां चढ़ते गए।
लक्ष्य का पीछा करते हुए सेंचुरी लगाने की आदत
लक्ष्य का पीछा करते हुए विराट (10) सेंचुरी जडऩे में सचिन तेंडुलकर (17) और क्रिस गेल (11) के बाद तीसरे नंबर पर हैं। अमूमन पहले बल्लेबाजी करते हुए सेंचुरी जडऩा टारगेट का पीछा करते हुए सेंचुरी जडऩे से आसान माना जाता है। पहले बल्लेबाजी करते हुए बल्लेबाज ज्यादा सहज होकर और खुल कर खेलता है।
विराट कोहली की कहानी तो इसके एकदम उलट है। वह उन्होंने अपनी 16 में 10 सेंचुरी टारगेट का पीछा करते हुए मुश्किल हालात में जड़ी हैं। सबसे रोचक बात यह है उन्होंने अपनी इन सेंचुरी की बदौलत टारगेट का पीछा करते हुए जीत ही दिलाई है। इनमें से पांच बार कोहली नाटआउट रहकर टीम इंडिया को जीत दिलाई।
इस बारे में एक और रोचक बात यह है कि तीन बार तो विराट जब तीसरे नंबर पर बल्लेबाजी के लिए उतरे टीम इंडिया ने खाता भी नहीं खोला था। विराट की टॉप पर दमदार बल्लेबाजी की बदौलत ही भारत ने अपनी बेदम बॉलिंग के बावजूद बड़े लक्ष्य पाए हैं। उ मीद यही है कि विराट इसी तरह एकाग्र होकर कामयाबी की सीढिय़ां चढ़ते रहेंगे और भारतीय क्रिकेट को बुलंदी पर पहुंचाएंगे। ऐसे में संभवत: भारतीय क्रिकेट प्रेमी यही कहते नजर आएंगे बड़ा टारगेट है, कोई चिंता नहीं, टीम इंडिया के पास विराट है।