भारतीय टीम ने दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ शानदार जीत के साथ अंडर-19 विश्व कप 2022 का आगाज किया है। यश धुल की कप्तानी में टीम इंडिया ने दक्षिण अफ्रीका को 45 रनों से हरा दिया। भारत की जीत में कप्तान धुल और गेंदबाज विक्की ओस्तवाल ने अहम भूमिका निभाई। यश ने 82 रन की पारी खेली तो विक्की ने 28 रन देकर 5 विकेट चटकाए। मैन ऑफ द मैच रहे विक्की ने पहले ही मुकाबले में अपनी छाप छोड़ी। विक्की ने प्रभावी प्रदर्शन के बाद अपने संघर्ष की कहानी बयां की। उन्होंने बताया कि कैसे कोच के कहने पर उनके पिता को पुणे में किराए का घर लेना पड़ा था और इसके बाद उन्होंने कठिन परिस्थितियों में खुद को तैयार किया।
विक्की रोजाना लोनावाला से मुंबई जाते थे
दरअसल जब विक्की 9 साल के थे तो वह क्रिकेट खेलने के लिए रोजाना लोनावाला से मुंबई जाते थे। भारतीय गेंदबाज के कोच मोहन जाधव ने बताया कि वो अक्सर देखते थे कि विक्की कभी देरी से आते हैं, तो कभी जल्दी आ जाते हैं। एक दिन उन्होंने इस संबंध में उनसे पूछा तो विक्की ने बताया कि वो रोजाना लोनावाला से आते हैं। उनकी ज्यादातर एनर्जी ट्रेन से आने जाने में ही खत्म हो जाती थी, मगर उन्होंने इसके बावजूद खेल को जारी रखा। वो हमेशा मैदान पर फ्रेश ही नजर आते रहे।
मुंबई क्रिकेट एसोसिएशन का नहीं बना था कार्ड
इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए जाधव ने उस पल को याद किया, जब विक्की उनके पास पहली बार आए और उन्होंने उनके पिता कन्हैया को फोन किया। लोनावाला मुंबई और पुणे के रूट पर है, लेकिन क्रिकेट के लिए विक्की को तय करना था कि उन्हें पुणे जाना है या मुंबई। कोच ने कहा कि विक्की मुंबई में खेलते थे और वह इसके लिए रोज लंबा सफर तय करते थे। एक दिन वह अपना मुंबई क्रिकेट एसोसिएशन का कार्ड बनवाने गया, मगर कार्ड नहीं बनाया गया, क्योंकि नियम के तहत मुंबई में जन्मे खिलाड़ी ही एमसीए टूर्नामेंट में खेल सकते हैं। इसके बाद मुझे विक्की को पुणे में एनरोल करने के लिए फोन आया। कोच जाधव ने विक्की के पिता को एक अहम सलाह भी दी थी। उन्होंने कन्हैया से कहा था कि आप पुणे में किराए का घर क्यों नहीं ले लेते, जिससे विक्की का समय बचे। इस सलाह के बाद भारतीय गेंदबाज के पिता ने पुणे में किराए का अपार्टमेंट लिया और फिर यहां से विक्की का एक नया सफर शुरू हुआ।