पूर्व भारतीय क्रिकेटर वेंकटेश प्रसाद अमर उजाला संवाद का हिस्सा बने। मन की जीत सत्र में बात करते हुए वेंकेटेश प्रसाद ने भारतीय क्रिकेट से जुड़ी कई कहानियां सुनाईं। उन्होंने भारत-पाकिस्तान मैच का आमिर सोहेल वाला मजेदार किस्सा भी सुनाया। प्रसाद ने भारतीय क्रिकेट के मौजूदा हालातों पर भी बात की और बताया कि मैनेजमेंट से लेकर खिलाड़ियों को रवैये तक। कहां कमी और क्या सुधार किया जा सकता है। इस दौरान उन्होंने वर्कलोड मैनेजमेंट के सवाल पर खिलाड़ियों पर निशाना साधा।
टीम में स्थायित्व होना जरूरी
वेंकेटेश प्रसाद ने कहा कि वह अपने ट्वीट के जरिए किसी पर निशाना नहीं साधते हैं और न ही किसी को नीचा दिखाने की कोशिश करते हैं। वह बस अपने मन की बात लिखते हैं। भारतीय टीम के मौजूदा मैनेजमेंट पर अपने हालिया ट्वीट को लेकर बात करते हुए उन्होंने कहा "मैंने उनका हौसला नहीं तोड़ा है। हम भी हारते थे। मौजूदा टीम भी काफी प्रतिभाशाली है। जब भी कोई भारत का प्रतिनिधित्व करता है, तो उसका नजरिया हमेशा जीत का होता है। एक स्थाई टीम होना चाहिए। आप बहुत ज्यादा बदलाव नहीं कर सकते। ये सही है कि आप एक तरह का खेल नहीं दिखा सकते। ऑस्ट्रेलिया-इंग्लैंड की भी वनडे और टेस्ट की अलग-अलग टीम है, लेकिन वे बहुत ज्यादा प्रयोग नहीं करते। आप ज्यादा प्रयोग करेंगे, खिलाड़ियों को ड्रॉप करेंगे तो उनमें असुरक्षा की भावना आ जाएगी। खिलाड़ियों को मानसिक रूप से तैयार करना होता है। क्षमता होती है, लेकिन मानसिक रूप से मजबूती ज्यादा जरूरी है।"
खिलाड़ी अनुशासित रहेंगे तो चोट कम लगेगी
जब वेंकटेश से पूछा गया कि क्या ज्यादा मैच होने की वजह से खिलाड़ी चोटिल हो रहे हैं तो उन्होंने कहा "आईपीएल की वजह से ऐसा हो रहा है। आईपीएल को अलग कर दें तो हम भी एक साल में औसतन 15 टेस्ट खेल लेते थे। 35 वनडे खेल लेते थे। आज भी लगभग वैसा ही है। आईपीएल के दो महीने बहुत लंबे हो जाते हैं। अब टी-20 इंटरनेशनल भी हो रहे हैं। यह नया जुड़ गया है। इसलिए हमें ऐसा लग रहा है कि बहुत क्रिकेट हो रहा है। इस वजह से सही इंजरी मैनेजमेंट नहीं है। अगर इसमें अनुशासन नहीं है तो आप करियर में आगे नहीं बढ़ सकते हैं। आप ठीक तरह से आराम नहीं कर रहे हैं, ठीक तरह से प्रैक्टिस नहीं कर पा रहे हैं। लोड, इंजरी मैनेजमेंट ठीक नहीं है।"