क्रिकेट की दुनिया में अपनी एक अलग पहचान बना चुके साइमन टाफेल ने टी-20 वर्ल्ड कप के बाद अंतराष्ट्रीय क्रिकेट अंपायरिंग से भले ही संन्यास ले लिया हो लेकिन इन दिनों वह चैंपियन लीग में दूसरे अंदाज में नजर आ रहे है। क्रिकेट प्रमियों को इस बात का खुशी है कि इस बेहतरीन अंपायर को वह कम से कम मैदान पर देख पा रहे है। साइमन टाफेल के संन्यास की घोषणा करने के बाद क्रिकेट प्रेमियों ने उनके इस निर्णय का जहां सम्मान किया है वहीं उन्हें इस अंपायर को दोबारा अंतर्राष्ट्रीय मैचों में फील्ड पर न देखने का दुख भी है। इस बात से सभी सहमत है कि साइमन टाफेल ने अपने निर्णयों से एक अलग पहचान बनाई है।
टाफेल का पूरा नाम साइमन जेम्स आर्थर टाफेल है, इनका जन्म 21 जनवरी 1971 में ऑस्ट्रेलिया के नोर्थ साउथ वेल्स में हुआ था। क्रिकेट में अंपायर बनने की इच्छा नहीं थी लेकिन एक दोस्त के साथ इन्होंने अंपायरिंग का कोर्स किया और फिर इसे ही अपना पेशा बना लिया। 24 वर्ष की आयु में टाफेल ने प्रथम श्रेणी क्रिकेट में पहली बार अंपायरिंग की।
अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट में टाफेल का आगाज 13 जनवरी 1999 को सिडनी में ऑस्ट्रेलिया बनाम श्रीलंका के मैच में हुआ। जब टाफेल ने अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट में अंपायरिंग शुरु की वह 28 वर्ष के थे। उनकी प्रतिभा का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि आईसीसी ने उन्हें 2004 से 2008 के बीच लगातार पांच बार दुनिया के सर्वश्रेष्ठ अंपायर के खिताब से नवाजा। टाफेल ने भले ही संन्यास की घोषणा कर दी हो लेकिन उन्होंने साफ कर दिया कि उनका नाता क्रिकेट से हमेशा रहेगा और वह सेवानिवृत्ति के बाद प्रदर्शन और प्रशिक्षण प्रबंधन की नई भूमिका में नजर आते रहेंगे। टाफेल के शानदार सफर और उनके क्रिकेट में योगदान को क्रिकेट प्रेमी हमेशा याद रखेंगे।