अंडर-19 विश्व कप के लीग मुकाबलों में कप्तान यश ढुल समेत साथियों के संक्रमित होने की बात मनोबल बनाए रखने के लिए टीम के बाकी सदस्यों को नहीं बताई गई थी। विश्व कप जीतकर भारत लौटे अलीगढ़ के रवि कुमार ने अमर उजाला से खुलासा किया कि आयरलैंड के खिलाफ मैच की सुबह उन्हें पता लगा कि टीम की कमान निशांत सिंधू के हाथों में है और नियमित कप्तान समेत कुछ क्रिकेटर नहीं खेल रहे हैं। इसके बाद पूरी टीम ने जीतने के लिए मैदान पर अपने को झोंक दिया।
12 और 13 फरवरी को होने वाली आईपीएल की मेगा बोली में रवि कुमार का नाम नहीं है, लेकिन यह क्रिकेटर आत्मविश्वास से बोलता है आज नहीं तो कल वह आईपीएल में जरूर खेलेंगे, लेकिन अभी उन्हें लंबा सफर तय करना है और देश के लिए सीनियर टीम में खेलना उनके लिए बेहद महत्वपूर्ण है।
बांग्लादेश के खिलाफ तीन विकेट यादगार क्षण
रवि ने राज अंगद बावा केसाथ मिलकर फाइनल में इंग्लैंड को 189 रन पर समेटने में मुख्य भूमिका निभाई, लेकिन उनके लिए सबसे यादगार क्षण बांग्लादेश के खिलाफ निकाले गए शुरूआती तीन विकेट हैं। रवि के मुताबिक बांग्लादेश मैच से पहले उन्हें विकेट नहीं मिल रहे थे, लेकिन इस मैच में उन्होंने जिस तरह से पहले तीन विकेट लिए वह उन्हें कभी नहीं भूलेगा।
लक्ष्मण का दोस्तों सा व्यवहार काम किया
रवि खुलासा करते हैं कि वीवीएस लक्ष्मण की टीम में मौजूदगी बड़ी बात रही। उनका दोस्तों सा व्यवहार और हर वक्त प्रेरित करना खास था। फाइनल से पहले हेड कोच ऋषिकेश कानितकर और लक्ष्मण ने यही कहा कि उन्हें दिमाग में कोई बोझ नहीं रखना है और अपना प्राकृतिक खेल खेलना है। रही बात विराट कोहली से उनकी कमजोरी के बारे में पूछने की तो वह सिर्फ यह जानने की कोशिश कर रहे थे कि उनके जैसा बल्लेबाज ऐसी स्थिति में किस तरह से अपनी मनोदशा बनाकर रखता है।
गर्व है बटालियन में पिता को मेरे नाम से जानते हैं
रवि को इस बात की खुशी है कि उनके कोच अरविंद भारद्वाज ने पिता को जिस तरह समझाया तो वह उन्हें क्रिकेट खिलाने के राजी हो गए। रवि कहते हैं कि न तो पिता को और न ही उन्हें उस वक्त अंदाजा था कि एक दिन वह देश के लिए खेलेंगे। लेकिन उन्हें इस बात का गर्व है कि उनके पिता राजेंदर सिंह को सीआरपीएफ बटालियन में आज उनके नाम से जानते हैं। यह बात उन्हें पिता ने बताई बेटे के लिए इससे बड़ा गौरव और कोई नहीं हो सकता कि उसके पिता को उसके नाम से जाना जाए।
रवि को याद है पैर की चोट और खुद खाना बनाना
विश्व कप जीतने केबाद रवि को अपने संघर्ष के दिन अच्छी तरह याद हैं। वह याद करते हैं कि किस तरह कोलकाता और नोएडा में उन्हें खुद खाना बनाना पड़ता था और नेट लगाना पड़ता था। एक बार कोलकाता में उनके चाचा-चाची दुबई चले गए तो वह हॉस्टल रहने लगे। यहां मैच में उन्हें घुटने और एड़ी में ऐसी चोट लग गई कि लगा कि कभी क्रिकेट नहीं खेल पाऊंगा। हॉस्टल की पांचवीं मंजिल पर वह रहते थे। लेकिन कोई मानने को तैयार नहीं था कि उनके चोट लगी है। यह बेहद दुख भरा समय था। उन्हें खुद पांचवीं मंजिल से उतर दवा लेने जाना पड़ता था और नीचे खाना खाने आना पड़ता था।
चाहत है खुद के नाम से जाना जाऊं
रवि कहते हैं कि वैसे तो वह कई लोगों से प्रभावित हैं। इनमें महेंद्र सिंह धोनी और मिचेल स्टार्क शामिल हैं, लेकिन वह अपना रोल मॉडल किसी को नहीं मानते हैं। उनकी चाहत है कि उन्हें उनके खुद के नाम से जाना जाए।