गेंदबाजों के संदिग्ध एक्शन की पहचान के लिए अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट काउंसिल (आईसीसी) एक नई तकनीक पर काम कर रही है। हालांकि आईसीसी ने साफ किया है कि इस नई तकनीक के 2015 से पहले आने की उम्मीद नहीं है।
आईसीसी के जनरल मैनेजर ज्यॉफ एलारडिस ने बुधवार को कहा कि यह एक पहनने वाला उपकरण होगा जिसमें सेंसर के जरिए संदिग्ध गेंदबाजी एक्शन की पहचान की जा सकेगी।
यह तकनीक अपने तीसरे और आखिरी चरण पर पहुंच चुकी है लेकिन अभी कुछ चुनौतियां बाकी हैं। आईसीसी इस तकनीक पर ऑस्ट्रेलियाई विशेषज्ञों के साथ मिलकर काम कर रही है।
इस तकनीक का अगला चरण 18 महीने या दो साल भी ले सकता है। ऐसे में आप इस तकनीक के ट्रॉयल का 2015 के मध्य या उससे पहले तक उम्मीद नहीं कर सकते।
यह सेंसर गेंदबाज की बांह के ऊपर और कलाई के उस प्वाइंट पर लगा होगा जहां से वह सफलतापूर्वक उस पल का पता लगा सके जहां से बॉल फेंकी गई है।
हालांकि विश्लेक्षण में यह तकनीकी पहले से ही काफी उपयोगी है लेकिन सेंसर में अभी भी गेंदबाजी के दौरान बांह को सीधे मापने की क्षमता में कमी है जो कि सही गेंदबाजी एक्शन और चकिंग को नापने के बीच एक अहम कड़ी है।
एलारडिस ने कहा कि इस स्टेज पर हम कुछ साफ्टवेयर के जरिए जो सेंसर से सिगनल हासिल कर रहे हैं उससे बॉल फेंकने के दौरान हाथ की पोजिशन को ऑटोमेटिकली देख रहे हैं और बिना किसी सूचना से इसे कैसे पकड़े।’
इस नई तकनीक को युवा खिलाड़ियों और दुबई में हुए अंडर-19 वर्ल्ड कप के दौरान नेट्स सेशन के दौरान खिलाड़ियों पर टेस्ट किया जा चुका है।