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IPL: 12 सालों बाद लखनऊ के मालिक गोयनका को मिलेगी फ्रेंचाइजी की कीमत, आरपीएसजी ग्रुप ने बनाया 15 सालों का प्लान

Mon, 01 Nov 2021 04:54 PM IST
शक्तिराज सिंह स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

एक अनुमान के मुताबिक नई आईपीएल टीम लखनऊ के मालिक आरपीएसजी ग्रुप को फ्रेंचाइजी की कीमत मिलने में 12 साल का समय लग जाएगा। वहीं लखनऊ के मालिक गोयनका ने कहा है कि पांच सालों की अंदर टीम की कीमत 10 हजार करोड़ के करीब पहुंच जाएगी। 
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संजीव गोयनका - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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दुबई में आईपीएल की दो नई टीमों की बोली के दौरान आरपीएसजी ग्रुप ने लखनऊ की टीम के लिए 7090 करोड़ रुपयों की बोली लगाकर सभी को चौका दिया था। बोली खत्म होने के बाद संजीव गोयनका सवाल भी किया गया कि एक आईपीएल टीम के लिए इतनी बड़ी राशि ज्यादा तो नहीं है। इसके जवाब में उन्होंने कहा कि ऐसा बिल्कुल नहीं है, आने वाले समय में उनकी टीम की कीमत बढ़ेगी और उन्हें काफी फायदा होने वाला है। अब एक अनुमान में कहा गया है कि लखनऊ के मालिक आरपीएसजी ग्रुप को टीम की लागत मिलने में 12 साल का समय लगेगा। 
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गणना के अनुसार लखनऊ को 7090 करोड़ रुपये भारतीय क्रिकेट बोर्ड को देने होंगे और उसे कई जगहों से फायदा मिलेगा। इसके बावजूद मालिक को टीम की लागत मिलने में 12 साल का समय लग सकता है। इकोनॉमिक टाइम्स की खबर के अनुसार गोयनका शुरुआत से आईपीएल में एक टीम खरीदना चाहते थे और इसके लिए वो कोई भी कीमत चुकाने को तैयार थे। इसे लेकर महीनों तक गणना की गई थी और कई परिदृश्यों पर चर्चा हुई थी। इसी वजह से लखनऊ के लिए आरपीएसजी ग्रुप ने इतनी बड़ी बोली लगाई।

खेल जगत के व्यवसाय से जुड़े लोगों का मानना है कि लखनऊ और अहमदाबाद के मालिकों का मुनाफा मीडिया राइट्स से जुड़ी डील के आधार पर तय होगा। सीवीसी कैपिटल ने 5,625 करोड़ में अहमदाबाद की फ्रेंचाइजी खरीदी है। 
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किस आधार पर हुई गणना
यह गणना आईपीएल के सेंट्रल रेवेन्यू पूल और आय के बाकी साधनों के आधार पर की गई है। इसमें स्पॉन्सरशिप, गेट रेवेन्यू,एफबी और लाइसेंसिंग भी शामिल हैं। वहीं खर्चे में फ्रेंचाइजी की फीस, खिलाड़ियों की फीस, मैंनेजमेंट और आईपीएल के दौरान होने वाले खर्चों के अलावा बाजार के खर्चे भी शामिल हैं। 

अहमदाबाद और लखनऊ के मालिकों को कैसे होगा फायदा
आरपीएसजी ग्रुप को अगले 10 सालों तक हर साल फ्रेंचाइजी फीस के रूप में 709 करोड़ रुपये भारतीय क्रिकेट बोर्ड को देनें होंगे। वहीं बीसीसीआई बदले में सेंट्रल रेवेन्यू पूल से इस टीम के मालिकों को उनका हिस्सा देगा। पहले साल का रेवेन्यू 200 करोड़ के करीब होगा, जो 2023-2027 और 2028-2032 के दौरान बढ़ेगा। वहीं लखनऊ टीम को पहले साल में 500 करोड़ रुपये बीसीसीआई को देने होंगे, जो आगे चलकर कम होंगे।

गोयनका का कहना है कि फिलहाल वो टीम का मालिकाना हक किसी के साथ नहीं बांटना चाहते हैं। हालांकि जरूरत पड़ने पर हमेशा ही उनके पास यह विकल्प रहेगा। उन्होंने कहा कि अगले पांच सालों में लखनऊ फ्रेंचाइजी की कीमत 10 हजार करोड़ से ज्यादा होगी। 

किस आधार पर पैसा देता है भारतीय क्रिकेट बोर्ड भारतीय क्रिकेट बोर्ड 
फ्रेंचाइजी एग्रीमेंट के अनुसार बीसीसीआई मीडिया राइट्स और ग्राउंड स्पॉन्सरशिप से मिलने वाले पैसे का आधा हिस्सा अपने पास रखता है, जबकि बाकी के 50 फीसदी हिस्से में से 45 फीसदी सेंट्रल रेवेन्यू पूल में चला जाता है और पांच फीसदी हिस्सा विजेताओं के बीच बांट दिया जाता है। सेंट्रल रेवेन्यू पूल का पैसा सभी टीमों के बीच बराबर बांट दिया जाता है। मौजूदा समय में सभी फ्रेंचाइजी को लगभग 215 करोड़ रुपये सेंट्रल रेवेन्यू पूल से मिल रहे थे।

बीसीसीआई को उम्मीद है कि 2023 से 2027 के मीडिया राइट्स 31 हजार करोड़ की कीमत पर बिकेंगे। वहीं आने वाले समय में उनकी कीमत 37 हजार करोड़ के करीब हो सकती है। 

हर फ्रेंचाइजी को कितना फायदा होगा
अनुमान के अनुसार हर फ्रेंचाइजी को दूसरे साल से सेंट्रल रेवेन्यू पूल के जरिए 288 करोड़ रुपये मिलेंगे और सातवें साल तक यह रकम 330 करोड़ तक पहुंच जाएगी। वहीं स्पॉन्सरशिप के जरिए उन्हें 100 करोड़ और गेट रेवेन्यू के जरिए 25 करोड़ रुपये की कमाई होगी। दोनों नई टीमों का रेवेन्यू पहले साल में 350 से 400 करोड़ के करीब होगा। वहीं आगे चलकर यह 600 से 650 करोड़ के करीब पहुंच जाएगा। सातवें से ग्यारहवें साल के बीच रेवेन्यू 800-850 करोड़ के बीच होगा। 

आने वाले समय में फ्रेंचाइजी का खर्चा भी बढ़ेगा। खिलाड़ियों और सपोर्ट स्टाफ पर 100 करोड़ खर्च होंगे। मैंनेजमेंट पर 50 करोड़ और 5-10 करोड़ मार्केटिंग पर खर्च होंगे। 
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