टेस्ट सीरीज में जिस तरह से भारतीय बल्लेबाजों ने ऑस्ट्रेलियाई टीम को चुनौती दी थी उससे यही लग रहा था कि वनडे क्रिकेट में भी बल्लेबाज रन बटोरने में कामयाब रहेंगे। लेकिन जब त्रिकोणीय सीरीज शुरू हुई तो भारतीय टीम का खेल एकदम से दोयम दर्जे का हो गया।
भारतीय बल्लेबाजी सीरीज के शुरुआती दोनों मैचों में बेहद लचर दिखी। पहले मैच में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ अगर रोहित शर्मा ने सेंचुरी नहीं लगाई होती तो टीम 200 रन भी नहीं बना पाती। इसके बाद दूसरे वनडे में इंग्लैंड के खिलाफ भारत की पूरी टीम 40 ओवर भी नहीं खेल सकी और आउट हो गई। रोहित के नहीं होने से बल्लेबाजी बुरी तरह से ढह गई।
टीम इंडिया के प्रशंसकों की उम्मीद नहीं थी कि उनके खिलाड़ी इस कदर खराब खेलेंगे, लगातार 2 मैचों में हार के बाद सीरीज के फाइनल में पहुंचने की उसकी उम्मीदें खत्म नहीं हुई हैं और इन रास्तों से वह खिताबी जंग में शामिल हो सकती है।