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तारक सिन्हा को मिला द्रोणाचार्य पुरस्कार, धवन-नेहरा समेत कोहली के कोच तक को सिखाया था क्रिकेट

Thu, 27 Sep 2018 09:38 AM IST
सत्येन्द्र पाल सिंह, अमर उजाला, नई दिल्ली
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2018 के खेल पुरस्कार मंगलवार को दिए गए। इस साल राजीव गांधी खेल रत्न के लिए विराट कोहली और मीराबाई चानू को चुना गया। साल 2016 में भी कोहली के नाम चर्चा हुई थी, लेकिन उन्हें तब चुना नहीं गया था। साल 2007 के बाद पहली बार किसी क्रिकेटर को खेल रत्न दिया गया।

वहीं इस साल पांच लोगों को द्रोणाचार्य पुरस्कार दिया गया जिसमें देश को ऋषभ पंत, शिखर धवन, आशीष नेहरा और आकाश चोपड़ा जैसे खिलाड़ी देने वाले कोच तारक सिन्हा भी शामिल है। दिल्ली में सोनेट क्लब के नाम से अकेडमी चलाने वाले तारक सिन्हा का खेल रत्न विराट कोहली से भी गहरा रिश्ता है।

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दरअसल विराट कोहली के कोच राजकुमार शर्मा भी उन शिष्यों में से जिन्हें तारक सिन्हा ने क्रिकेट के गुर सिखाए हैं। राजकुमार शर्मा को साल 2016 में द्रोणाचार्य अवॉर्ड दिया जा चुका है। तारक सिन्हा सोनेट क्लब के अपने शागिर्दों में सुरिन्दर खन्ना, आशीष नेहरा और भारतीय क्रिकेट की नई सनसनी बताए जा रहे ऋषभ पंत के लिए 'उस्ताद जी’ हैं।

बतौर क्रिकेटर उस्ताद जी के दर्जन भर शागिर्द भारत की अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट में नुमाइंदगी कर चुके हैं और 100 से ज्यादा प्रथम श्रेणी क्रिकेट में झंडे गाड़ चुके हैं। वह भारतीय महिला क्रिकेट टीम के भी कोच रह चुके है।

अंजुम चोपड़ा जैसी कामयाब महिला क्रिकेटर ने भी क्रिकेट की बारीकियां तारक उस्ताद से ही सीखी। 69 बरस के तारक सिन्हा को बतौर क्रिकेटरों की देश में पूरी पौध तैयार करने के लिए द्रोणाचार्य पुरस्कार से मंगलवार को नवाजा गया। उन्हें बहुत पहले ही यह अवॉर्ड मिल जाना चाहिए था लेकिन तारक सिन्हा को शिकायत करना शायद आता नहीं है।
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तारक सिन्हा ने कहा, 'मेरे सुरिंदर खन्ना, रमण लाम्बा, मनोज प्रभाकर, आशीष नेहरा, संजीव शर्मा, आकाश चोपड़ा, शिखर धवन और ऋषभ पंत सहित दर्जन भर क्रिकेट शागिर्द भारत के लिए अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खेल चुके हैं।

विराट कोहली के क्रिकेट उस्ताद राज कुमार शर्मा ने भी पीजीडीएवी कॉलेज में अपने क्रिकेट कौशल को मेरे मार्गदर्शन में मांझा। यह भी संयोग है कि मुझसे पहले द्रोणाचार्य अवॉर्ड राज कुमार को मिला। इससे पहले भी कई बार खासतौर पर ऐसे मौके आए जब मुझे द्रोणाचार्य अवॉर्ड दिए जाने की चर्चा चली।

जब मेरे चार शागिर्द - मनोज प्रभाकर, रमण लाम्बा, संजीव शर्मा और अतुल वासन -टीम इंडिया के लिए इंग्लैंड में खेल जब मुझे द्रोणाचार्य पुरस्कार मिल जाना चाहिए था। मुझे कोई शिकायत नहीं है। खैर मैं अब द्रोणाचार्य अवॉर्ड से नवाजे जाने के बाबत बस यही कहूंगा कि जब यह अवॉर्ड मिला तभी सवेरा।

बतौर क्रिकेट कोच मेरी करीब पांच दशक की यात्रा खासी संतोषजनक रही है। मेरा मानना है कि एक कोच के लिए संतोष और गर्व की बात यह है कि उसके बनाए खिलाड़ी उसका सम्मान करे। मैं खुद को खुशकिस्मत मानता हूं कि मेरे शागिर्द चाहे वह सुरिंदर खन्ना हों, आशीष नेहरा, आकाश चोपड़ा, शिखर धवन या फिर ऋषभ पंत सभी वैसी ही इज्जत करते हैं, जैसी तब करते थे जब उन्होंने मुझसे क्रिकेट सीखनी शुरू की थी। ऋषभ पंत आज भी प्रैक्टिस के लिए मेरे पास सोनेट क्लब में ही आते हैं।’
 
वह बताते हैं, 'मैं बतौर कोच कभी भी क्रिकेटर के नेचुरल टैलंट से छेड़छाड़ नहीं करता। मैं क्रिकेटर को उसके नैसर्गिक अंदाज में सर्वश्रेष्ठ खेलने को प्रेरित करता हूं। ऋषभ पंत मिजाज से आक्रामक बल्लेबाजी में यकीन करते हैं। मैंने उन्हें इसी मिजाज से खेलना जारी रखने को कहा है। मेरी ऋषभ को बस सलाह यही है कि वह 'उड़ाने’ के लिए सही गेंद का चयन करें।

ऋषभ समय के साथ बतौर क्रिकेटर बेहतर हो रहे हैं और बेहतर होंगे। ऋषभ गजब के प्रतिभाशाली खिलाड़ी हैं और बहुत आगे जाएंगे। भारत की आज एशिया कप में नुमाइंदगी करने वाले दीपक चाहर और खलील अहमद जैसे खिलाडियों को मैने तब खोजा था जब मैं राजस्थान क्रिकेट अकादमी का डायरेक्टर था।

मैं दिल्ली के पीजीडीएवी कॉलेज में प्रशासनिक विभाग में था लेकिन क्रिकेट सिखाना मेरा जुनून था। मैं वहीं कॉलेज में 2008 तक क्रिकेट टीम को कोचिंग दी। इसके बाद ही मैंने राजस्थान का क्रिकेटर डायरेक्टर रहते ही उसे प्लेट डिविजन से लेकर उसे 2010-11 में ऋषिकेश कानिटकर की कप्तानी में खिताब जिताया। फिर जब झारखंड की टीम को कोचिंग देकर उसे भी प्लेट डिविजन से नॉकआउट तक पहुंचाया। उसके बाद से मैंने अपना पूरा ध्यान सोनेट क्लब में नौजवान क्रिकेटर्स को ट्रेनिंग देने पर लगाया है। मुझे भारत की अंडर-19 एशिया कप में बढ़िया प्रदर्शन करने वाले दिल्ली के यंग बल्लेबाज आयुष बदौनी से बहुत उम्मीद है। मुझे उसके बहुत आगे जाने की उम्मीद है।’
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